Petlawad में 16-17 मई को मेवानगर निर्माण के तहत बड़े धार्मिक आयोजन होंगे।
Petlawad में धार्मिक आस्था और भक्ति का एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। श्री नाकोड़ा भैरव देव के परम उपासक गादीपति सुमित पिपाड़ा के आदेशानुसार झाबुआ जिले के पेटलावद में “मेवानगर” के रूप में एक भव्य धार्मिक केंद्र का निर्माण किया जा रहा है, जिसे मध्यप्रदेश की प्रथम मेवानगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पावन अवसर पर 15 से 17 मई तक कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
15 मई को होगा आचार्य श्री का भव्य मंगल प्रवेश
आचार्य श्री विश्वरत्न सागर महाराज साहब का 15 मई को पेटलावद में भव्य मंगल प्रवेश होगा। उनके साथ साधु-संतों का आदि ठाणा भी नगर में प्रवेश करेगा। इस अवसर पर श्री नाकोड़ा पार्श्व भैरव ट्रस्ट मंडल और समाजजन द्वारा आचार्य श्री का भव्य स्वागत किया जाएगा।
नगर में धार्मिक उत्साह का वातावरण रहेगा और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनेंगे।
16 मई को भक्ति संध्या का आयोजन
मंगल प्रवेश के बाद 16 मई की रात्रि को उदय गार्डन, पेटलावद में एक भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध भजन गायक अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से नाकोड़ा पार्श्व भैरव देव की भक्ति का वातावरण बनाएंगे।
यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति भाव से भरपूर रहेगा।
17 मई को निकलेगा भव्य वरघोड़ा
17 मई को आयोजन का मुख्य आकर्षण भव्य वरघोड़ा होगा। यह वरघोड़ा सुबह 7 बजे दामोदर कॉलोनी स्थित श्री नाकोड़ा भैरव दरबार से प्रारंभ होगा।
इस भव्य शोभायात्रा में 11 अश्व, बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ आचार्य श्री विश्वरत्न सागर महाराज की निश्रा में यात्रा निकलेगी। यह वरघोड़ा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए दादा द्वारा चयनित पावन भूमि तक पहुंचेगा।
27 शिलाओं का विधिवत पूजन
वरघोड़े के समापन पर 27 शिलाओं का विधिवत पूजन किया जाएगा। इन शिलाओं में श्री पार्श्वनाथ भगवान, श्री नाकोड़ा भैरव देव, श्री नाकोड़ा काला भैरव देव, शासन देवी श्री अछुपता माताजी और क्षेत्रपाल राजा की मुख्य शिलाएं शामिल होंगी।
संगीतमय वातावरण में विधिकारकों द्वारा इन शिलाओं का पूजन कराया जाएगा। यह धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहेगा।
12:39 बजे होगा महामांगलिक
इसी दिन दोपहर 12:39 बजे शुभ मुहूर्त में आचार्य श्री विश्वरत्न सागर महाराज द्वारा महामांगलिक का आयोजन किया जाएगा। इस महामांगलिक को अत्यंत चमत्कारिक और फलदायी माना जाता है।
मान्यता है कि इस महामांगलिक के श्रवण मात्र से जीवन की बाधाएं, कष्ट, रोग और संकट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
कई क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की भागीदारी
इस भव्य आयोजन में झाबुआ, रतलाम, नागदा, आलोट, राजगढ़, इंदौर, आगर, शाजापुर और उज्जैन सहित कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
ट्रस्ट मंडल ने बताया कि आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं और कार्यकर्ता दिन-रात व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं।
मेवानगर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
पेटलावद में हो रहा यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मेवानगर के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
यह स्थान भविष्य में एक प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचेंगे।
समाजजनों से अधिकाधिक सहभागिता की अपील
श्री नाकोड़ा पार्श्व भैरव ट्रस्ट मंडल ने सकल श्रीसंघ और समाजजनों से अपील की है कि वे सपरिवार अधिक से अधिक संख्या में आयोजन में शामिल होकर इसे सफल बनाएं।
साथ ही मेवानगर निर्माण के इस पावन कार्य में तन, मन और धन से सहयोग करने का आह्वान भी किया गया है।
निष्कर्ष
पेटलावद में 15 से 17 मई तक आयोजित होने वाला यह भव्य धार्मिक आयोजन आस्था, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम साबित होगा। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान नगर का वातावरण पूर्ण रूप से आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से सराबोर रहेगा। आचार्य श्री विश्वरत्न सागर महाराज के मंगल प्रवेश से लेकर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों, भजन संध्या, भव्य वरघोड़े और महामांगलिक तक सभी कार्यक्रम श्रद्धा और भक्ति की भावना को और अधिक प्रबल करेंगे।
आचार्य श्री के आगमन से नगर में एक विशेष धार्मिक चेतना का संचार होगा, जिससे श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का वातावरण बनेगा। 17 मई को निकलने वाला भव्य वरघोड़ा और 27 शिलाओं का विधिवत पूजन इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहेगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी अपेक्षित है। वहीं शुभ मुहूर्त में होने वाला महामांगलिक आयोजन लोगों के लिए आध्यात्मिक लाभ और शांति का माध्यम बनेगा।
यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मेवानगर के निर्माण की दिशा में यह एक ऐतिहासिक और निर्णायक पहल मानी जा रही है, जो भविष्य में पेटलावद को एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।
