—Advertisement—

Sagar बांदरी नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, छिरारू मौजा की आदिवासी बस्ती के 70 से 100 परिवारों ने लगाया सर्वे से वंचित रहने का आरोप

Author Picture
Published On: 12 July 2026
Sagar
— बांदरी नगर परिषद पर उठे सवाल, छिरारू मौजा की आदिवासी बस्ती के 70–100 परिवारों ने एसआईआर सर्वे से वंचित रहने का लगाया आरोप

—Advertisement—

Sagar बांदरी नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, छिरारू मौजा की आदिवासी बस्ती के 70 से 100 परिवारों ने लगाया सर्वे से वंचित रहने का आरोप

Sagar मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मतदाता सत्यापन और एसआईआर (SIR) सर्वे को डिजिटल, पारदर्शी और जीपीएस आधारित प्रक्रिया बताते हुए घर-घर जाकर सर्वे किए जाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन सागर जिले की बांदरी नगर परिषद क्षेत्र से सामने आया एक मामला इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। बांदरी नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले छिरारू मौजा की आदिवासी बस्ती के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उनके क्षेत्र में अब तक एसआईआर सर्वे की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी बस्ती में रहने वाले करीब 70 से 100 परिवार आज भी सरकारी सर्वे और डिजिटल रिकॉर्ड से बाहर हैं। उनका आरोप है कि सर्वे के लिए न तो कोई अधिकारी या प्रगणक उनके घर तक पहुंचा और न ही उनके मकानों का रिकॉर्ड तैयार किया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कर जल्द से जल्द सर्वे कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप— न हुआ मकानों का सर्वे, न मिली डिजिटल पहचान

छिरारू मौजा की आदिवासी बस्ती के लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा प्रत्येक परिवार और मकान का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया चलाई जा रही है, लेकिन उनके क्षेत्र में यह काम जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, बस्ती में न तो मकानों की गणना की गई, न ही डिजिटल हाउस नंबर उपलब्ध कराए गए और न ही किसी प्रकार की जीपीएस जियो-टैगिंग की गई। उनका कहना है कि यदि वास्तव में पूरे प्रदेश में घर-घर सर्वे किया जा रहा है, तो उनकी पूरी बस्ती इस प्रक्रिया से कैसे छूट गई, यह एक बड़ा सवाल है।

ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में नाम और मकान का विवरण दर्ज नहीं होने के कारण उन्हें कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से वे योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।

सरकारी योजनाओं से वंचित होने की जताई आशंका

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए सही और अद्यतन रिकॉर्ड होना जरूरी है। यदि किसी परिवार का नाम या मकान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, तो भविष्य में उन्हें आवास, पेयजल, सड़क, बिजली सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिलने में कठिनाई आ सकती है।

बस्ती के लोगों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करे और सभी परिवारों को सरकारी रिकॉर्ड में शामिल किया जाए।

प्रशासनिक लापरवाही या सिस्टम की चूक?

इस पूरे मामले ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और सर्वे प्रक्रिया की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक पूरी बस्ती सर्वे से छूट गई है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

सवाल यह भी उठ रहा है कि सर्वे के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा क्षेत्र का वास्तविक निरीक्षण किया गया था या नहीं। यदि डिजिटल और जीपीएस आधारित सर्वे की व्यवस्था लागू है, तो फिर छिरारू मौजा की बस्ती का रिकॉर्ड क्यों नहीं तैयार हो पाया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल तकनीकी समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक स्तर पर हुई गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट की जाए।

ग्रामीणों ने की तत्काल सर्वे कराने की मांग

बस्ती के निवासियों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द विशेष टीम भेजकर क्षेत्र का सर्वे कराया जाए। उन्होंने कहा कि हर परिवार को सरकारी रिकॉर्ड में शामिल करना जरूरी है ताकि उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके।

ग्रामीणों का कहना है कि वे भी प्रदेश के अन्य नागरिकों की तरह सरकारी योजनाओं और सुविधाओं के हकदार हैं। इसलिए उनका नाम और उनके मकानों का विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए और सर्वे प्रक्रिया में छूटे हुए सभी परिवारों को शामिल किया जाए।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर

छिरारू मौजा की आदिवासी बस्ती से सामने आए इस मामले के बाद अब प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीणों के आरोपों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सर्वे प्रक्रिया में वास्तव में कोई लापरवाही हुई है या किसी तकनीकी कारण से रिकॉर्ड तैयार नहीं हो पाया।

फिलहाल ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है और वे अपने अधिकारों तथा सरकारी योजनाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सर्वे कराने की मांग कर रहे हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि डिजिटल सर्वे और जमीनी हकीकत के बीच जो अंतर दिखाई दे रहा है, उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp