10×10 के कमरों में घुटता बचपन, सुरक्षा मानकों की उड़ रहीं धज्जियां
Ashoknagar के कोचिंग सेंटर बने ‘मौत के अड्डे’, शिक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
स्वराज वाणी संवाददाता : राहुल जैन , अशोकनगर।
Ashoknagar : शिक्षा के नाम पर चल रहे निजी कोचिंग संस्थानों की हकीकत अब चिंता का विषय बनती जा रही है। अशोकनगर शहर में बड़ी संख्या में ऐसे कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, जहां बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। छोटे-छोटे कमरों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा के जरूरी इंतजामों का अभाव दिखाई दे रहा है।
स्थिति यह है कि कई कोचिंग संस्थान बिना पंजीयन, बिना सुरक्षा जांच और बिना आवश्यक अनुमति के संचालित हो रहे हैं। शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने वर्षों से चल रहे इन संस्थानों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
10 बाय 10 के कमरों में 50 से 60 बच्चों की भीड़
शहर के कई इलाकों में प्राइवेट कोचिंग सेंटर छोटे-छोटे कमरों में संचालित हो रहे हैं। एक कमरे में क्षमता से कई गुना अधिक विद्यार्थियों को बैठाया जा रहा है। 10 बाय 10 फीट जैसे छोटे कमरों में 50 से 60 बच्चों को बैठाने की स्थिति सामने आ रही है।
इन कमरों में न तो पर्याप्त हवा आने-जाने की व्यवस्था है और न ही प्राकृतिक रोशनी की सुविधा। गर्मी और भीड़ के बीच विद्यार्थियों को घंटों तक बैठना पड़ता है। सबसे गंभीर बात यह है कि किसी आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए पर्याप्त रास्ते भी उपलब्ध नहीं हैं।
यदि अचानक आग लगने जैसी घटना होती है या कोई अन्य दुर्घटना घटती है तो बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे रह जाएगी। ऐसे स्थानों पर भगदड़ की स्थिति में बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
फायर सेफ्टी और आपात सुविधाओं का अभाव
कोचिंग संस्थानों के संचालन के लिए सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होता है। इनमें अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकासी मार्ग, प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, पर्याप्त वेंटिलेशन और सुरक्षित भवन व्यवस्था जैसी सुविधाएं जरूरी हैं।
लेकिन अशोकनगर के कई कोचिंग सेंटरों में इन मूलभूत सुविधाओं का अभाव दिखाई देता है। कई स्थानों पर अग्निशामक यंत्र तक उपलब्ध नहीं हैं। फायर एनओसी और अन्य सुरक्षा प्रमाणपत्रों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन संस्थानों को संचालन की अनुमति कैसे मिल रही है और संबंधित विभाग समय-समय पर इनकी जांच क्यों नहीं कर रहा है।
केशु अखाई वाली गली में हालात बेहद चिंताजनक
शहर के प्रमुख व्यावसायिक एवं आवासीय क्षेत्र केशु अखाई वाली गली में नवनीत फैशन की दुकान के आसपास संचालित हो रहे कोचिंग सेंटर प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आए हैं।
यह क्षेत्र पहले से ही संकरी गलियों के लिए जाना जाता है। यहां संचालित कई कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों के प्रवेश और निकासी के लिए केवल एक छोटा रास्ता उपलब्ध है।
यदि किसी कारण से आग लगती है या कोई आपात स्थिति उत्पन्न होती है तो यहां राहत और बचाव कार्य करना भी मुश्किल हो सकता है। संकरी गली होने के कारण दमकल वाहन और एंबुलेंस के पहुंचने में भी परेशानी आ सकती है।
यह स्थिति किसी बड़े हादसे को निमंत्रण देने जैसी है।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
शहर में इतने बड़े पैमाने पर कोचिंग संस्थानों का संचालन हो रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग द्वारा समय-समय पर जांच की बात तो कही जाती है, लेकिन धरातल पर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आता।
लोगों का आरोप है कि कई संस्थान वर्षों से बिना उचित मानकों के संचालित हो रहे हैं। यदि विभाग नियमित निरीक्षण करता तो सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी कमियां सामने नहीं आतीं।
अब सवाल यह है कि क्या विभाग को इन संस्थानों की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
सरकारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी
राज्य सरकार द्वारा कोचिंग संस्थानों के संचालन को लेकर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त स्थान, सुरक्षित भवन, फायर सेफ्टी व्यवस्था, आपातकालीन निकासी मार्ग और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश शामिल हैं।
लेकिन अशोकनगर में कई संस्थानों में इन नियमों का पालन होता दिखाई नहीं दे रहा है।
नियमों की अनदेखी कर बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना गंभीर विषय है। शिक्षा संस्थान बच्चों के भविष्य निर्माण का केंद्र होते हैं, लेकिन यदि वहां उनकी सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं है तो यह चिंता का विषय बन जाता है।
अभिभावकों की चिंता बढ़ी
अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए अभिभावक कोचिंग संस्थानों पर भरोसा करते हैं। लेकिन जब ऐसे संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होती है तो अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों को पढ़ाई के लिए भेजते हैं, लेकिन उन्हें यह भरोसा होना चाहिए कि उनका बच्चा सुरक्षित वातावरण में है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सभी कोचिंग संस्थानों की जांच कराई जाए और जो संस्थान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कार्रवाई नहीं हुई तो हो सकता है बड़ा हादसा
अशोकनगर में वर्तमान स्थिति प्रशासन के लिए चेतावनी है। छोटे कमरों में बड़ी संख्या में बच्चों को बैठाकर संचालित किए जा रहे कोचिंग सेंटरों की जांच समय रहते नहीं की गई तो भविष्य में किसी गंभीर दुर्घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन और शिक्षा विभाग को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखनी होगी। बच्चों की सुरक्षा किसी भी व्यवस्था से अधिक महत्वपूर्ण है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और असुरक्षित कोचिंग संस्थानों पर क्या कार्रवाई करता है।
