S. Jaishankar Mongolia Visit: भारत–मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती
S. Jaishankar Mongolia Visit: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इन दिनों दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर मंगोलिया पहुंचे हुए हैं। इस यात्रा को भारत की “एक्ट ईस्ट” और व्यापक एशियाई कूटनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों, विकास साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करना है।
मंगोलिया की भौगोलिक स्थिति, चीन और रूस के बीच इसकी रणनीतिक लोकेशन, तथा खनिज संसाधनों की प्रचुरता इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण देश बनाती है। ऐसे में भारत के विदेश मंत्री की यह यात्रा कई वैश्विक समीकरणों के दृष्टिकोण से भी अहम मानी जा रही है।
Bharat –Mongolia संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और मंगोलिया के संबंध केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं, बल्कि गहरे सभ्यतागत और आध्यात्मिक जुड़ाव पर आधारित हैं। दोनों देशों के बीच बौद्ध धर्म एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक सेतु का कार्य करता है, जिसने सदियों से लोगों के बीच संपर्क और विश्वास को मजबूत किया है।
डॉ. जयशंकर ने अपनी यात्रा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत और मंगोलिया केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि “आध्यात्मिक रूप से जुड़े हुए देश” भी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विकास की आकांक्षाओं और जन-जन के मजबूत संपर्कों पर आधारित हैं।
उच्चस्तरीय वार्ता और सहयोग की समीक्षा
इस यात्रा के दौरान विदेश मंत्री ने मंगोलिया के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लिया। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच चल रही विकास परियोजनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
डॉ. जयशंकर ने बताया कि यह यात्रा विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति उखना खुरेलसुख के बीच पिछले वर्ष भारत यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं और समझौतों की प्रगति की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भारत और मंगोलिया के बीच द्विपक्षीय सहयोग के लगभग सभी क्षेत्रों—ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, शिक्षा, संस्कृति और रक्षा—पर सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है।
तेल रिफाइनरी परियोजना बनी सहयोग का केंद्र
भारत और मंगोलिया के बीच चल रहे विकास सहयोग में सबसे महत्वपूर्ण परियोजना तेल रिफाइनरी निर्माण है। यह परियोजना मंगोलिया के डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी क्षेत्र में विकसित की जा रही है।
भारत सरकार ने इस परियोजना के लिए 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर की सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) प्रदान की है। इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी विकास ऋण सहायता परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।
इस परियोजना का उद्देश्य मंगोलिया को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे देश की आयात पर निर्भरता कम हो सके। यह परियोजना पूरी होने के बाद मंगोलिया के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
Mongolia का रणनीतिक महत्व
Mongolia को दुनिया के सबसे खनिज संपन्न देशों में गिना जाता है। यहां तांबा, सोना, कोयला और ऊर्जा संसाधनों सहित 1,000 से अधिक खनिज भंडार मौजूद हैं।
देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खनन और निर्यात पर आधारित है, जिसमें लगभग 90 प्रतिशत राजस्व खनिज निर्यात से आता है। हालांकि, यह भी सच है कि मंगोलिया इस क्षेत्र में काफी हद तक चीन पर निर्भर है।
चीन मंगोलिया के खनिजों का सबसे बड़ा खरीदार है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक संतुलन में बीजिंग की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में भारत का मंगोलिया के साथ बढ़ता सहयोग इस क्षेत्रीय समीकरण में एक नया आयाम जोड़ता है।
ऊर्जा और परमाणु सहयोग की संभावनाएं
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत मंगोलिया के साथ नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम आपूर्ति पर भी बातचीत कर रहा है। यदि यह सहयोग आगे बढ़ता है, तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
इसके अलावा, दोनों देशों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा, खनन तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई है।
जयशंकर का बयान: साझा मूल्यों पर आधारित संबंध
पत्रकारों से बातचीत के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और मंगोलिया के रिश्ते केवल कूटनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि यह साझा सभ्यता और आध्यात्मिकता से जुड़े हुए संबंध हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों देश विकास, लोकतंत्र और शांति के समान मूल्यों को साझा करते हैं, जो उनके संबंधों को और मजबूत बनाते हैं।
क्षेत्रीय भू-राजनीति में भारत की भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार, मंगोलिया के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी एशिया में चीन के प्रभाव के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम है। मंगोलिया का चीन और रूस के बीच स्थित होना इसे भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बनाता है।
भारत की यह पहल न केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देती है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद करती है।
निष्कर्ष
डॉ. एस. जयशंकर की यह यात्रा भारत और मंगोलिया के संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऊर्जा, खनन, बुनियादी ढांचा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में हो रही प्रगति दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत कर रही है।
यह दौरा स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अब एशियाई भू-राजनीति में अपनी भूमिका को और अधिक सक्रिय और प्रभावी बना रहा है, जहां सहयोग, विकास और रणनीतिक संतुलन प्रमुख आधार बनते जा रहे हैं।
