Dhangawa से डुंडी रेलवे स्टेशन तक सड़क निर्माण की मांग, सांसद को सौंपा गया ज्ञापन
सिहोरा/जबलपुर | 20/05/2026
जिला कटनी के अंतर्गत आने वाले ग्राम Dhangawa से डुंडी रेलवे स्टेशन तक लगभग 4 किलोमीटर लंबे पहुंच मार्ग के निर्माण की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। ग्रामीणों की वर्षों पुरानी इस समस्या को लेकर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने जनहित में सक्रिय पहल करते हुए जबलपुर के माननीय सांसद Ashish Dubey को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
इस ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने मांग की है कि धनगवा से डुंडी रेलवे स्टेशन तक शीघ्र सड़क निर्माण कार्य शुरू किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को आवागमन की गंभीर समस्या से राहत मिल सके।
वर्षों से अधूरी सड़क, ग्रामीण परेशान
स्थानीय लोगों के अनुसार यह मार्ग लंबे समय से उपेक्षित पड़ा हुआ है। लगभग 4 किलोमीटर का यह कच्चा और असुविधाजनक रास्ता बरसात के मौसम में और भी खराब स्थिति में पहुंच जाता है। कीचड़, गड्ढों और फिसलन भरी जमीन के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग से होकर गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है। बच्चों को स्कूल जाने में कठिनाई होती है, मरीजों को अस्पताल ले जाना जोखिम भरा हो जाता है, और नौकरीपेशा लोगों को समय पर अपने कार्यस्थल तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
रेलवे स्टेशन तक पहुंच में सबसे बड़ी बाधा
डुंडी रेलवे स्टेशन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र है, जहां लोकल ट्रेनों का ठहराव भी होता है। इसके बावजूद स्टेशन तक पहुंचने के लिए कोई पक्का और सुविधाजनक सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है।
इस वजह से रेलवे सुविधा का पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। कई बार यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है या असुविधाजनक रास्तों का सहारा लेना पड़ता है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि यह क्षेत्र जबलपुर और कटनी जिलों की सीमा पर स्थित कई गांवों के लिए जीवनरेखा जैसा है, जहां से प्रतिदिन सैकड़ों लोग आवागमन करते हैं।
जनप्रतिनिधियों से तत्काल कार्रवाई की मांग
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि यह बुनियादी मानव अधिकारों से जुड़ा विषय है।
संगठन ने कहा कि जब तक क्षेत्र में सुगम सड़क उपलब्ध नहीं होगी, तब तक शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी अधिकारों तक पहुंच सीमित रहेगी।
संगठन ने सांसद से आग्रह किया कि इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत कर जल्द से जल्द निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।
संगठन का सामाजिक दृष्टिकोण
इस अवसर पर संगठन के पदाधिकारियों ने ग्रामीण विकास और जनहित के मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल शिकायत करना नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच एक सेतु की भूमिका निभाना है।
कार्यक्रम के दौरान संगठन ने अपनी विभिन्न सामाजिक गतिविधियों की जानकारी भी साझा की, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और जागरूकता अभियान शामिल हैं।
जनहित में निरंतर प्रयास का संकल्प
संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे भविष्य में भी इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को उजागर करते रहेंगे और प्रशासन तक पहुंचाते रहेंगे। उनका मानना है कि जब तक स्थानीय समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब तक विकास की गति अधूरी रहेगी।
संगठन ने यह भी कहा कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र आज भी विकास की मुख्यधारा से पीछे हैं।
ग्रामीणों की आवाज़ — “सड़क नहीं तो विकास नहीं”
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब पूरा रास्ता दलदल में बदल जाता है। कई बार बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में घंटों लग जाते हैं।
ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि “अगर सड़क नहीं, तो विकास की बातें सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगी।”
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सड़क बनती है तो न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति मिलेगी।
कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी, परिवहन लागत कम होगी और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
इसके अलावा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच से ग्रामीण जीवन स्तर में भी सुधार आने की संभावना है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
हालांकि ग्रामीणों और संगठन की ओर से बार-बार मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है।
इस कारण लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास योजनाएं अक्सर कागजों में ही सीमित रह जाती हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
सांसद से उम्मीदें
अब इस पूरे मामले में सभी की निगाहें सांसद Ashish Dubey पर टिकी हैं। ग्रामीणों और संगठन को उम्मीद है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द सड़क निर्माण की दिशा में कदम उठाएंगे।
लोगों का मानना है कि यदि यह परियोजना स्वीकृत होती है तो यह क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
निष्कर्ष
धनगवा से डुंडी रेलवे स्टेशन तक सड़क निर्माण की मांग अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
यह मामला इस बात को दर्शाता है कि आज भी कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं जहां मूलभूत सुविधाओं की कमी लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही है।
अब जरूरत इस बात की है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें, ताकि ग्रामीणों को वह अधिकार और सुविधा मिल सके जिसके वे हकदार हैं।
