इंफाल: अपने मणिपुर दौरे के दूसरे दिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सामाजिक एकता और परिवार-आधारित समाधान पर जोर देते हुए कहा कि परिवार के मुद्दों का समाधान परिवार के भीतर ही होना चाहिए। उन्होंने जनजातीय नेताओं से संवाद करते हुए सामाजिक सद्भाव और भारतीय सभ्यता के मूल्यों के प्रति समर्पण का आह्वान किया।
भागवत बोले समाज को मजबूत बनाता है सेवा संघ :
भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को मजबूत बनाने के लिए समर्पित है। “संघ किसी के खिलाफ नहीं है; इसका गठन समाज को नष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि समाज को समृद्ध करने के लिए किया गया है।
संघ राजनीति नहीं करता और न ही किसी संगठन को नियंत्रित करता है। यह केवल मित्रता, स्नेह और सामाजिक सद्भाव के माध्यम से काम करता है,” उन्होंने स्पष्ट किया।

RSS प्रमुख बोले साझा चेतना के कारण है एकजुट :
आरएसएस प्रमुख ने भारतीय सभ्यता की निरंतरता और साझा चेतना पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “हम अपनी साझा चेतना के कारण एकजुट हैं। विविधता के बावजूद, हम एक सभ्यतागत परिवार के सदस्य हैं। एकता के लिए एकरूपता आवश्यक नहीं है।” भागवत ने संघ संस्थापक डॉ. के. बी. हेडगेवार के प्रयासों का स्मरण करते हुए बताया कि संघ की स्थापना बाहरी ताकतों की प्रतिक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि आंतरिक फूट को दूर करने के लिए की गई थी।
जनजातीय नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर उन्होंने कहा कि उनका समाधान संवैधानिक ढांचे के भीतर होना चाहिए। “संवाद एकता पर आधारित होना चाहिए, न कि अनुबंधात्मक सौदेबाजी पर। हमें अपनी परंपराओं, भाषाओं और सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करना चाहिए,” उन्होंने कहा।
युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रहना का किया आग्रह :
युवा नेताओं से बात करते हुए भागवत ने भारत की प्राचीन और सतत सभ्यता पर जोर दिया और युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आरएसएस शाखाओं का उद्देश्य जिम्मेदार, सक्षम और नि:स्वार्थ नागरिक तैयार करना है, जो देश के लिए अपने कौशल और प्रतिभा का योगदान दे सकें।
