मोहन भागवत का छत्तीसगढ़ दौरा: साल के अंतिम दिन हिंदू महासम्मेलन से गूंजेगा प्रदेश, जानिए पूरा कार्यक्रम और तैयारियां
Chhattisgarh News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 31 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। वर्ष के अंतिम दिन उनका यह दौरा प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। इस अवसर पर वे रायपुर जिले के अभनपुर विकासखंड स्थित सोनपैरी गांव में आयोजित होने वाले विशाल हिंदू महासम्मेलन को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करेंगे।
यह महासम्मेलन प्रदेश में सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। आयोजन को लेकर न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि आसपास के राज्यों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
हिंदू महासम्मेलन का उद्देश्य
आयोजकों के अनुसार, हिंदू महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना, सनातन परंपराओं की महत्ता को रेखांकित करना और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना है। सम्मेलन के दौरान धर्म, संस्कृति, राष्ट्र और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
डॉ. मोहन भागवत अपने संबोधन में सामाजिक समरसता, राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका, सांस्कृतिक चेतना और वर्तमान समय में सनातन मूल्यों की प्रासंगिकता जैसे विषयों पर अपने विचार साझा कर सकते हैं। उनके विचारों को सुनने के लिए प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग सम्मेलन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
राष्ट्रीय संत असंग देव जी होंगे मुख्य अतिथि
इस विशाल आयोजन में राष्ट्रीय संत असंग देव जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। संत असंग देव जी अपने ओजस्वी विचारों और सामाजिक चेतना से जुड़े संदेशों के लिए देशभर में जाने जाते हैं। उनके सान्निध्य से सम्मेलन को आध्यात्मिक और वैचारिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
संतों, धर्माचार्यों और समाजसेवियों की उपस्थिति इस महासम्मेलन को एक व्यापक सामाजिक मंच प्रदान करेगी, जहां विभिन्न वर्गों के लोग आपसी संवाद और विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्राप्त करेंगे।
प्रदेशभर से जुटेंगे संत, समाजसेवी और नागरिक
आयोजन समिति के अनुसार, इस महासम्मेलन में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों से संत, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी वर्ग और आम नागरिकों के शामिल होने की संभावना है। बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी को लेकर भी आयोजक उत्साहित हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से आने वाले प्रतिभागियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं ताकि सभी को सम्मेलन में सहज और व्यवस्थित रूप से शामिल होने का अवसर मिल सके।

तैयारियां अंतिम चरण में, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
हिंदू महासम्मेलन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजन स्थल सोनपैरी गांव में मंच, पंडाल, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और अन्य मूलभूत सुविधाओं को व्यवस्थित किया जा रहा है।
इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति पूरी तरह सतर्क है। पुलिस और स्वयंसेवकों की टीम सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए अलग-अलग मार्गों की योजना बनाई गई है ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
हिंदू सम्मेलन समिति निभाएगी अहम भूमिका
सम्मेलन के सफल संचालन के लिए हिंदू सम्मेलन समिति की एक समर्पित टीम तैनात की गई है। यह टीम मंच संचालन, अतिथियों के स्वागत, अनुशासन व्यवस्था और कार्यक्रम के समयबद्ध संचालन की जिम्मेदारी निभाएगी।
आयोजन समिति ने बताया कि स्वयंसेवकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि किसी भी स्थिति में कार्यक्रम बिना बाधा के संपन्न हो सके।
समय से पहुंचने की अपील
आयोजन समिति की ओर से प्रदेश के सभी सनातनी और हिंदू भाई-बहनों से अपील की गई है कि वे इस महासम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। साथ ही, किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए प्रतिभागियों से कार्यक्रम स्थल पर समय से पहले पहुंचने का अनुरोध किया गया है।
समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुशासन और सहयोग के साथ ही इस विशाल आयोजन को सफल बनाया जा सकता है।
वर्ष के अंतिम दिन विशेष महत्व
31 दिसंबर को आयोजित यह महासम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि यह वर्ष के अंतिम दिन आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि वर्ष का समापन सकारात्मक ऊर्जा, सांस्कृतिक चिंतन और सामाजिक एकता के संदेश के साथ होना चाहिए।
डॉ. मोहन भागवत का यह दौरा न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक चेतना और राष्ट्रवादी विचारधारा को मजबूती देने वाला भी माना जा रहा है।
निष्कर्ष
मोहन भागवत का छत्तीसगढ़ दौरा और अभनपुर के सोनपैरी गांव में आयोजित हिंदू महासम्मेलन प्रदेश के लिए एक बड़ा सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन बनने जा रहा है। संतों, समाजसेवियों और आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी से यह सम्मेलन सनातन संस्कृति और सामाजिक समरसता का सशक्त मंच साबित हो सकता है।
अब सभी की निगाहें 31 दिसंबर पर टिकी हैं, जब साल के आखिरी दिन छत्तीसगढ़ हिंदू महासम्मेलन की गूंज से एक नई वैचारिक ऊर्जा का साक्षी बनेगा।
