इंदौर में RSS की बड़ी बैठक 30 अक्टूबर से, मोहन भागवत-होसबाले समेत 450 कार्यकर्ता होंगे शामिल; संगठनात्मक ढांचे पर होगा मंथन
4 नवंबर तक चलेगी अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक, शताब्दी वर्ष के कार्यों की होगी समीक्षा; मालवा प्रांत को इंदौर-उज्जैन संभाग में बांटने की तैयारी
इंदौर, 1 सितंबर 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की महत्वपूर्ण बैठक इस बार इंदौर में आयोजित होगी। 30 अक्टूबर से शुरू होने वाली यह बैठक 4 नवंबर तक चलेगी। इसमें संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, भैयाजी जोशी और सुरेश सोनी सहित केंद्रीय कार्यकारिणी के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। देशभर के 46 प्रांतों से करीब 450 कार्यकर्ताओं के इंदौर पहुंचने की संभावना है।
बैठक के लिए इंदौर के डेली कॉलेज को संभावित आयोजन स्थल बताया जा रहा है। छह दिनों तक चलने वाली इस बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में हुए कार्यों की समीक्षा के साथ आगामी संगठनात्मक योजनाओं पर मंथन किया जाएगा।
बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय संघ की वर्तमान प्रांत आधारित संगठनात्मक संरचना में बदलाव का प्रस्ताव भी होगा। वर्ष 2027 से प्रांत संरचना के स्थान पर संभाग आधारित व्यवस्था लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी। इस व्यवस्था को लेकर इंदौर की बैठक में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श होने की संभावना है।
संघ का शीर्ष नेतृत्व पहुंचेगा इंदौर
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में संघ का शीर्ष नेतृत्व मौजूद रहेगा। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के साथ केंद्रीय कार्यकारिणी, क्षेत्र और प्रांत स्तर के वरिष्ठ प्रचारक भी इसमें शामिल होंगे।
बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 450 कार्यकर्ताओं की भागीदारी प्रस्तावित है। इतने बड़े आयोजन को देखते हुए स्थानीय स्तर पर भी व्यवस्थाओं की तैयारियां महत्वपूर्ण रहेंगी।
शताब्दी वर्ष के कामकाज की होगी समीक्षा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए यह बैठक शताब्दी वर्ष के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगी। बैठक में शताब्दी वर्ष के दौरान विभिन्न प्रांतों में हुए कार्यक्रमों, संगठनात्मक गतिविधियों और अन्य कार्यों की समीक्षा की जाएगी।
अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले पदाधिकारियों द्वारा अपने क्षेत्रों में हुए कार्यों और गतिविधियों की जानकारी बैठक में रखे जाने की संभावना है। समीक्षा के आधार पर आगामी कार्यक्रमों की रणनीति और प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हो सकती है।
2027 से बदल सकती है संगठनात्मक संरचना
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक मुद्दा प्रांत व्यवस्था में संभावित बदलाव बताया जा रहा है। प्रस्ताव के अनुसार वर्ष 2027 से मौजूदा प्रांत संरचना को समाप्त कर संभाग आधारित संगठनात्मक संरचना लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
यदि इस प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलता है तो संगठन की विभिन्न इकाइयों के संचालन और जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नई व्यवस्था में संभाग स्तर की इकाइयों को प्रांत की तरह जिम्मेदारियां दिए जाने की बात सामने आई है।
मालवा प्रांत से बनेंगे इंदौर और उज्जैन संभाग
प्रस्तावित बदलाव का असर मालवा प्रांत पर भी पड़ेगा। वर्तमान मालवा प्रांत को इंदौर और उज्जैन संभाग में विभाजित किए जाने की योजना है।
मालवा प्रांत की वर्तमान संरचना वर्ष 2009 में बनाई गई थी। अब संगठनात्मक बदलाव के बाद इंदौर और उज्जैन संभाग की अलग-अलग संरचना तैयार होने की बात सामने आई है।
नई व्यवस्था में प्रत्येक संभाग की जिम्मेदारी अलग प्रचारक को दी जा सकती है। इससे संगठनात्मक गतिविधियों का संचालन संभाग स्तर पर किया जाएगा।
मालवा प्रांत में 5 हजार से अधिक शाखाएं
मौजूदा मालवा प्रांत में संघ की गतिविधियों का बड़ा नेटवर्क है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वर्तमान प्रांत में 3,292 स्थानों पर 5,029 शाखाएं संचालित हो रही हैं।
इसके अलावा विद्यार्थी और महाविद्यालयीन स्तर की 527 शाखाएं भी संचालित होने की जानकारी है। इन आंकड़ों से मालवा क्षेत्र में संघ के संगठनात्मक विस्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
नई संभागीय व्यवस्था लागू होने पर इस पूरे नेटवर्क को इंदौर और उज्जैन संभाग की नई संगठनात्मक संरचना के अनुसार व्यवस्थित किया जा सकता है।
बैठक से पहले इंदौर में निकलेगा पथ संचलन
अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक से पहले इंदौर शहर में संघ का पथ संचलन भी निकाले जाने की योजना है। इसमें स्थानीय स्वयंसेवकों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल सकती है।
पथ संचलन के मार्ग, समय और अन्य व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी आयोजन के करीब आने पर स्पष्ट होने की संभावना है।
साल में होती हैं संघ की दो प्रमुख बैठकें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में वर्ष के दौरान दो बड़ी संगठनात्मक बैठकों का विशेष महत्व है। इनमें मार्च में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा और अक्टूबर-नवंबर के दौरान अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक आयोजित की जाती है।
इंदौर में होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें शताब्दी वर्ष की समीक्षा के साथ संगठन की भविष्य की संरचना पर चर्चा होगी।
46 प्रांतों से आएंगे करीब 450 कार्यकर्ता
30 अक्टूबर से 4 नवंबर तक प्रस्तावित बैठक में देशभर के 46 प्रांतों के लगभग 450 कार्यकर्ता शामिल होंगे। केंद्रीय कार्यकारिणी के अलावा क्षेत्र और प्रांत स्तर के प्रचारकों की उपस्थिति भी रहेगी।
शीर्ष पदाधिकारियों के इंदौर प्रवास को देखते हुए बैठक के दौरान संगठनात्मक गतिविधियां तेज रहेंगी। आयोजन स्थल से लेकर पदाधिकारियों के ठहरने और बैठक के अलग-अलग सत्रों के लिए तैयारियां की जाएंगी।
इंदौर की बैठक पर रहेगी नजर
इंदौर में होने वाली अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक संगठनात्मक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण निर्णयों की भूमिका तैयार कर सकती है। विशेष रूप से वर्ष 2027 से प्रांत व्यवस्था की जगह संभाग संरचना लागू करने के प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यदि नई व्यवस्था पर सहमति बनती है तो मालवा प्रांत की वर्तमान संरचना भी बदलेगी और इंदौर तथा उज्जैन अलग संभागीय इकाइयों के रूप में काम कर सकते हैं।
30 अक्टूबर से शुरू होकर 4 नवंबर तक चलने वाली इस बैठक में शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा, भविष्य की योजनाओं और संगठनात्मक विस्तार पर मंथन होगा। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित शीर्ष पदाधिकारियों की मौजूदगी के कारण इंदौर में होने वाली इस बैठक को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
