MP में महंगे सफर और खतरनाक सड़कें: Toll वसूली दोगुनी, मौतें तीन गुना
भोपाल। MP में नेशनल हाईवे (NH) पर सफर करना अब महंगा और खतरनाक दोनों हो गया है। संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार सालों में राज्य में टोल कलेक्शन लगभग दोगुना हो गया है, लेकिन सड़क की खराब गुणवत्ता के कारण मौतों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। यह स्थिति न केवल यात्रियों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के लिए भी गंभीर चुनौती पेश करती है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में MP में नेशनल हाईवे से ₹2,178.19 करोड़ रुपये टोल के रूप में वसूले गए थे। उस समय गड्ढों और सड़क की खराब हालत के कारण 96 लोगों की जान गई थी। यह संख्या 2024-25 में चिंताजनक रूप से बढ़कर 277 हो गई, जबकि टोल कलेक्शन ₹4,188.15 करोड़ तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि राज्य के हर दूसरे दिन कोई व्यक्ति हाईवे पर गड्ढे के कारण अपनी जान गंवा रहा है।
Toll और सड़क की गुणवत्ता का असंतुलन
यह असंतुलन यह संकेत देता है कि टोल वसूली के साथ सड़क की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है। मध्य प्रदेश के हाईवे, विशेषकर नेशनल हाईवे, देशभर में यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यह हाईवे न केवल व्यापार और लॉजिस्टिक्स के लिए जरूरी हैं, बल्कि रोज़मर्रा के यात्री और स्थानीय लोग भी इन पर निर्भर हैं।
मध्य प्रदेश का यह आंकड़ा उत्तर प्रदेश के बाद देश में दूसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश में भी सड़क हादसों और टोल वसूली के आंकड़े चिंताजनक हैं, लेकिन मध्य प्रदेश का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।
Toll वसूली का निरंतर बढ़ता ग्राफ
अंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में ₹2,178.19 करोड़ की टोल वसूली चार साल में बढ़कर ₹4,188.15 करोड़ रुपये हो गई। इसका मतलब है कि राज्य में हर दो दिन में करीब 23 करोड़ रुपये टोल के रूप में वसूले जा रहे हैं।
इसके विपरीत, सड़क पर मरने वालों की संख्या में भी तीन गुना वृद्धि हुई। 2020-21 में 96 मौतें हुई थीं, जबकि 2024-25 में यह बढ़कर 277 हो गई हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि टोल से प्राप्त धन का उपयोग सड़क सुधार और सुरक्षा में पर्याप्त रूप से नहीं हो रहा है।
अधिकारियों की चेतावनी और केंद्रीय मंत्री की नाराजगी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नवंबर 2022 में मंडला दौरे के दौरान मध्य प्रदेश के हाईवे की खराब गुणवत्ता पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि सड़क की स्थिति तुरंत सुधारी जाए और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
लेकिन आंकड़े बताते हैं कि चार साल बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। गड्ढों और टूट-फूट वाली सड़कें अब यात्रियों के लिए जानलेवा बन गई हैं।
यात्री और स्थानीय लोगों की समस्याएं
हाईवे पर गड्ढों की संख्या और टोल की अधिक वसूली के कारण यात्री लगातार समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
- वाहन मालिकों के लिए मेंटेनेंस खर्च बढ़ गया है।
- सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी के कारण मानसिक तनाव और सुरक्षा की चिंता भी बढ़ी है।
- यात्रियों को लंबा समय लगता है, और सफर महंगा हो गया है।
स्थानीय लोगों ने भी शिकायत की है कि सरकारी टीमें अक्सर गड्ढों को अस्थायी रूप से भरती हैं, जिससे लंबे समय तक सुधार नहीं होता।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि टोल वसूली और सड़क सुधार के बीच संतुलन होना आवश्यक है। यदि टोल वसूली बढ़ रही है लेकिन सड़क की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है, तो यह यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए जोखिम बन जाता है।
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं:
- टोल से प्राप्त राशि का न्यूनतम 50% सड़क मरम्मत और सुरक्षा उपायों पर खर्च किया जाए।
- हाईवे पर नियमित निरीक्षण और गड्ढों की शीघ्र मरम्मत सुनिश्चित की जाए।
- हादसों की रोकथाम के लिए चेतावनी संकेत, गार्ड रेल और सुरक्षा बंपर जैसे उपाय लागू किए जाएं।
राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कदम
MP और केंद्र सरकार ने हाईवे सुधार के लिए कई परियोजनाओं की शुरुआत की है, लेकिन कार्यान्वयन की धीमी गति और अनियमित निगरानी के कारण परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हैं।
यदि यह स्थिति इसी तरह जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं और यात्री हानि की संख्या और बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
MP के नेशनल हाईवे पर टोल वसूली का दोगुना होना यात्रियों के लिए महंगा तो है, लेकिन गड्ढों और खराब सड़क स्थिति के कारण जानलेवा भी साबित हो रहा है। यह साफ-साफ संकेत है कि टोल से प्राप्त धन का सही उपयोग नहीं हो रहा और सड़क सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
राज्य और केंद्र सरकार के लिए यह समय की मांग है कि वे हाईवे सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और सुनिश्चित करें कि टोल वसूली से मिलने वाले धन का उपयोग सड़क सुधार और यात्रियों की सुरक्षा में हो। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मध्य प्रदेश के हाईवे यात्रियों के लिए और अधिक खतरनाक बन सकते हैं।
