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15 दिनों में तीसरी Ragging घटना: छात्र ने कुलसचिव और छात्र कल्याण अधिष्ठाता से शिकायत की

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Published On: 7 February 2026
Gwalior: Rising Cases of Ragging and Assault at Jiwaji University
— Gwalior: Rising Cases of Ragging and Assault at Jiwaji University

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Gwalior: जीवाजी विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ Raggingऔर मारपीट के मामले बढ़े, 

आर्यभट्ट हॉस्टल में Ragging का नया मामला

Gwalior के जीवाजी विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट हॉस्टल में बी-फार्मेसी चौथे वर्ष के छात्र आशुतोष मरावी के साथ रैगिंग और मारपीट का मामला सामने आया है। छात्र आशुतोष ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव और छात्र कल्याण अधिष्ठाता को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में छात्र ने आरोप लगाया कि उसके सहपाठी लगातार उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं और नशा करने के लिए दबाव डालते हैं।

15 दिनों में तीसरी Ragging घटना

विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट हॉस्टल में यह 15 दिनों के भीतर तीसरा रैगिंग मामला है। इसके पहले भी हॉस्टल में दो अन्य घटनाएं हुई थीं, जिनमें फार्मेसी और लॉ के छात्र शामिल थे। आशुतोष ने आरोप लगाया कि सौरभ गुर्जर और अनंत प्रताप सिंह लगातार उसके साथ रैगिंग और मारपीट कर रहे हैं।

छात्र ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी छात्र उसके कमरे में घुसकर मारपीट करते हैं और जबरन ऑडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। इस प्रकार की घटनाओं से हॉस्टल में छात्रों के लिए डर और मानसिक तनाव का माहौल बन गया है।

छात्र की शिकायत: नशा और धमकियाँ

आशुतोष ने शिकायत में बताया कि आरोपी छात्र शराब के नशे में होने पर गाली-गलौज करते हैं और विरोध करने पर मारपीट की धमकी देते हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी छात्र कई बार उसके कमरे में घुसकर उत्पीड़न करते हैं। इस कारण आशुतोष ने लिखित शिकायत दर्ज कराई ताकि भविष्य में उसे और अन्य छात्रों को सुरक्षा मिल सके।

छात्र ने यह भी कहा कि हॉस्टल में लगातार इस प्रकार की घटनाओं के कारण छात्र मानसिक रूप से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन पर उठ रहे सवाल

Ragging की लगातार बढ़ती घटनाओं से विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्र की सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ सकती है।

आरोपी छात्रों ने मारपीट करने से इंकार किया है, लेकिन घटना का वीडियो एंटी-रैगिंग कमेटी के सामने पेश किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन को उम्मीद है कि वीडियो साक्ष्य और शिकायत के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

हॉस्टल में छात्रों के लिए बढ़ती असुरक्षा

छात्रों के अनुसार, हॉस्टल में रैगिंग की घटनाएं केवल आशुतोष तक सीमित नहीं हैं। अन्य छात्र भी मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत कर चुके हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि हॉस्टल में एंटी-Ragging नियमों का पालन नहीं हो रहा है।

छात्रों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में ऐसे मामलों की संख्या और बढ़ सकती है।

आवश्यक उपाय और सुझाव

छात्रों और शिक्षकों के अनुसार, रैगिंग रोकने के लिए न केवल कानूनी कदम उठाने की आवश्यकता है, बल्कि हॉस्टल में अनुशासन और जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किए जाने चाहिए।

  • छात्रों को बताया जाना चाहिए कि रैगिंग गंभीर अपराध है।
  • हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरे, नियमित निरीक्षण और एंटी-रैगिंग वर्कशॉप जैसी पहल करनी चाहिए।
  • हॉस्टल में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।

इससे छात्रों को सुरक्षित वातावरण प्राप्त होगा और मानसिक स्वास्थ्य पर असर कम होगा।

मानसिक स्वास्थ्य और छात्र जीवन पर प्रभाव

Ragging केवल शारीरिक प्रताड़ना नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालती है। छात्र आशुतोष ने कहा कि उसने यह शिकायत इसलिए दर्ज कराई ताकि भविष्य में किसी अन्य छात्र को इस प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

हॉस्टल में लगातार मारपीट और धमकियों के कारण छात्रों में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन और एंटी-रैगिंग कमेटी का सक्रिय होना अत्यंत आवश्यक है।

प्रशासन और एंटी-रैगिंग कमेटी की भूमिका

विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायतों की तुरंत सुनवाई करनी चाहिए और एंटी-रैगिंग कमेटी को सक्रिय रूप से जांच करनी चाहिए। आरोपी छात्रों के खिलाफ उचित कार्रवाई से अन्य छात्रों के लिए भी एक संदेश जाएगा कि रैगिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है। समय पर कार्रवाई न होने पर छात्र जीवन प्रभावित हो सकता है और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठ सकते हैं।

निष्कर्ष

जीवाजी विश्वविद्यालय में लगातार बढ़ती Ragging और मारपीट की घटनाएं छात्र जीवन के लिए गंभीर खतरा हैं। छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को तत्काल कदम उठाने होंगे।

विश्वविद्यालय में रैगिंग रोकने और छात्रों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्रवाई, जागरूकता कार्यक्रम और निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है। इससे न केवल छात्रों का विश्वास बहाल होगा बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा भी सुरक्षित रहेगी।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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