श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में भक्तामर महापूजन का भव्य आयोजन हुआ। पांच घंटे चले पूजन में 44 गाथाओं की आराधना और 108 दीपकों से महाआरती उतारी गई।
श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में भव्य भक्तामर महापूजन, 108 दीपकों से उतारी महाआरती
झाबुआ। श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में भक्तामर महापूजन का भव्य एवं भक्तिमय आयोजन किया गया। दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेंद्र सुरीश्वर जी महाराज साहेब द्वारा प्रतिष्ठित स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय की पुण्य धरा पर आयोजित महा-प्रभावशाली श्री भक्तामर महापूजन में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। करीब पांच घंटे तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पूरा वातावरण प्रभु भक्ति, मंत्रोच्चार और सुमधुर संगीत से धर्ममय बना रहा।
पुण्य सम्राट श्री जयंतसेन सुरीश्वर जी महाराज साहेब जी के पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री नित्यसेन सुरीश्वर जी म.सा., आचार्य श्री जयरत्न सुरीश्वर जी म.सा. की आज्ञानुवर्तीनी एवं साध्वी श्री शशीकलाश्री जी म.सा. की सुशिष्या विदुषी साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्रीजी म.सा. आदि ठाणा-7 की पावनकारी शुभ निश्रा में महापूजन का आयोजन हुआ।
इस धार्मिक आयोजन के लाभार्थी भावेशकुमार, उमेशकुमार, नंदलालजी मेहता परिवार रहे। महापूजन की संपूर्ण क्रिया विधि कारक हर्षद जैन उन्हेल द्वारा संपन्न कराई गई।
दोपहर 12.39 बजे शुरू हुआ भक्तामर महापूजन
श्री संघ के रिंकू रूनवाल ने बताया कि दोपहर 12.39 बजे बावन जिनालय के गुरु मंदिर हॉल में पूज्य साध्वी जी भगवंत के विशिष्ट मंत्रोच्चार के साथ श्री भक्तामर महापूजन प्रारंभ हुआ। मंत्रोच्चार के साथ जैसे ही पूजन प्रारंभ हुआ, पूरा वातावरण धर्ममय हो गया।
महापूजन के अंतर्गत श्रीमती नेहा भावेश मेहता एवं नीता उमेश मेहता परिवार ने इंद्र-इंद्राणी बनकर पूजन में भाग लिया। भक्तामर स्तोत्र की 44 महा-प्रभावशाली गाथाओं के प्रत्येक पद के साथ भक्तामर यंत्र पर विशिष्ट पूजन किया गया।
जल, चंदन, पुष्प और दीप से अष्टप्रकारी पूजन
श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में भक्तामर महापूजन के दौरान भक्तामर यंत्र पर जल, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, अक्षत, नैवेद्य एवं फल आदि विशिष्ट सामग्री के माध्यम से अष्टप्रकारी पूजन की संपूर्ण विधि संपन्न की गई।
पूजन के दौरान प्रभु भक्ति का विशिष्ट माहौल दिखाई दिया। सुमधुर संगीत और सुंदर धार्मिक प्रस्तुति के बीच उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। मंत्रों की गूंज और भक्तिमय संगीत से जिनालय परिसर का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
पूज्य साध्वी जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्तामर महापूजन की विशिष्टता के बारे में बताया। उन्होंने भक्तामर स्तोत्र और इसकी गाथाओं के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। समाजजनों ने भी पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजन की विभिन्न क्रियाओं में सहभागिता की।
पांच घंटे तक चला श्री भक्तामर महापूजन
आदि, व्याधि एवं उपाधि को दूर करने वाली श्री भक्तामर महापूजन की धार्मिक क्रिया करीब पांच घंटे तक चली। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु जिनालय में उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने प्रभु भक्ति के साथ महापूजन में सहभागिता करते हुए धर्मलाभ लिया।
आयोजन के दौरान भक्तामर स्तोत्र की 44 गाथाओं की आराधना विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रत्येक गाथा के साथ विधिपूर्वक पूजन किए जाने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
महापूजन के दौरान लाभार्थी मेहता परिवार ने भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया। आयोजन की शुरुआत से लेकर पूर्णाहुति तक श्रद्धालुओं की उपस्थिति बनी रही।
108 दीपकों से उतारी गई विशिष्ट महाआरती
करीब पांच घंटे तक चले श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में भक्तामर महापूजन की पूर्णाहुति अत्यंत भक्तिमय वातावरण में हुई। पूर्णाहुति के अवसर पर भक्तामर यंत्र के समक्ष 108 दीपकों से युक्त विशिष्ट महाआरती उतारी गई।
यह महाआरती लाभार्थी भावेशकुमार, उमेशकुमार, नंदलालजी मेहता परिवार द्वारा उतारी गई। एक साथ प्रज्ज्वलित 108 दीपकों की रोशनी और भक्तिमय वातावरण ने आयोजन को और भी दिव्य बना दिया। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रभु की आराधना करते हुए धर्मलाभ लिया।
प्रभु भक्ति में भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
महापूजन के दौरान सुमधुर संगीत, मंत्रोच्चार और धार्मिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। श्री ऋषभदेव बावन जिनालय की पुण्य धरा पर हुए इस आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और आराधना का अद्भुत संगम देखने को मिला।
पूजन की पूर्णाहुति के साथ 108 दीपकों की महाआरती आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही। बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने भक्तामर महापूजन में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरे आयोजन के दौरान जिनालय परिसर में धर्ममय एवं भक्तिमय वातावरण बना रहा।

