Rewa आर्यिका हत्याकांड में मुख्य आरोपी राशिद अली की दूसरी जमानत याचिका भी न्यायालय ने खारिज कर दी। न्यायालय ने इसे जघन्य अपराध बताते हुए जमानत देने से इनकार किया। जैन समाज ने फैसले का स्वागत करते हुए आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग दोहराई।
Rewa आर्यिका हत्याकांड: आरोपी राशिद अली की जमानत याचिका दूसरी बार निरस्त, न्यायालय ने कहा- जघन्य अपराध में राहत का कोई आधार नहीं
राजेश जैन दद्दू | इंदौर
Rewa आर्यिका हत्याकांड में बड़ा फैसला
Rewa आर्यिका हत्याकांड में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय सामने आया है। रीवा में विहाररत दो पूज्य दिगंबर जैन आर्यिकाओं की निर्मम हत्या के मामले में मुख्य आरोपी राशिद अली को एक बार फिर न्यायालय से राहत नहीं मिली। माननीय न्यायालय ने आरोपी की दूसरी जमानत याचिका को भी निरस्त कर दिया।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यह मामला अत्यंत जघन्य और गंभीर प्रकृति का है तथा उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
आरोपी राशिद अली की दूसरी जमानत याचिका खारिज
चर्चित रीवा आर्यिका हत्याकांड में आरोपी राशिद अली की ओर से दूसरी बार जमानत याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों तथा समाज पर पड़े प्रभाव का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका खारिज कर दी।
न्यायालय की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि साध्वी एवं आर्यिकाओं पर हमला केवल किसी व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं, बल्कि समाज की आत्मा पर प्रहार है।न्यायालय ने माना कि आरोपी पर लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य उसके विरुद्ध हैं। ऐसे में आरोपी को जमानत देना समाज में गलत संदेश दे सकता है।न्यायालय ने यह भी माना कि अपराध की प्रकृति अत्यंत घृणित एवं जघन्य है तथा न्यायहित में जमानत देना उचित नहीं होगा।
देशभर के जैन समाज में था भारी आक्रोश
गौरतलब है कि रीवा में विहाररत दो पूज्य दिगंबर जैन आर्यिकाओं की नृशंस हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था।घटना के बाद देशभर के जैन समाज में भारी आक्रोश देखने को मिला था। विभिन्न राज्यों और शहरों में जैन समाज द्वारा ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।भारत वर्षीय सकल जैन समाज सहित अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की मांग की थी।
जैन समाज ने किया फैसले का स्वागत
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि जैन समाज को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।उन्होंने कहा कि आर्यिकाओं की हत्या ने पूरे समाज को गहरा आघात पहुंचाया था और समाज लगातार दोषियों को कठोरतम दंड दिए जाने की मांग करता रहा है।न्यायालय द्वारा जमानत याचिका निरस्त किए जाने से समाज में न्याय की उम्मीद और मजबूत हुई है।
विभिन्न संगठनों ने जताया संतोष
न्यायालय के फैसले पर भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा, विश्व जैन संगठन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ, रीवा जैन समाज एवं देशभर की विभिन्न जैन संस्थाओं ने संतोष व्यक्त किया है।इंदौर जैन समाज के प्रतिनिधियों में
- डॉ. जैनेन्द्र जैन
- अमित कासलीवाल
- आनंद नवीन गोधा
- हर्ष जैन
- मयंक जैन
- टीके वेद
- हंसमुख गांधी
- सुशील पांड्या
- अजय मिटा
- अक्षय कासलीवाल
ने संयुक्त रूप से कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है और आरोपी को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही सुनवाई
शासकीय अधिवक्ता के अनुसार मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में जारी है।पुलिस द्वारा प्रकरण की चार्जशीट पहले ही न्यायालय में प्रस्तुत की जा चुकी है। जांच एजेंसियों के अनुसार उपलब्ध साक्ष्य आरोपी के विरुद्ध हैं और अभियोजन पक्ष मामले को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।
शीघ्र न्याय की उम्मीद
रीवा आर्यिका हत्याकांड में जमानत याचिका खारिज होने के बाद जैन समाज ने उम्मीद जताई है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले का शीघ्र निपटारा होगा और दोषी को कानून के अनुसार कठोरतम सजा मिलेगी।देशभर का जैन समाज इस मामले में न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है और मानता है कि यह फैसला समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को और मजबूत करेगा।


