INDIA ब्लॉक के मार्च में रेणुका चौधरी का चुनाव आयोग पर निशाना, बोलीं—‘आम आदमी का वोट छीन लिया गया’
नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग के खिलाफ INDIA ब्लॉक के विरोध मार्च के दौरान कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने मतदाता अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी का वोट और संवैधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं। चौधरी ने कहा कि सांसदों की जिम्मेदारी जनता की आवाज उठाना है। उनका बयान मंगलवार, 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन के दौरान सामने आया। प्रदर्शनकारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
रेणुका चौधरी ने लोकतांत्रिक अधिकारों पर उठाए सवाल
रेणुका चौधरी ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में शामिल भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उन्होंने स्थिति को राष्ट्रीय शर्म का विषय बताया।
चौधरी ने आम नागरिक के मतदान और संवैधानिक अधिकारों को अपने बयान का केंद्र बनाया। उनका कहना था कि जनता से जुड़े सवालों को उठाना निर्वाचित प्रतिनिधियों का दायित्व है। उन्होंने इसी जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए विपक्ष के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया।
ये बातें कांग्रेस सांसद के राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें मतदाता अधिकार छीने जाने की स्वतंत्र पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची का भी किया उल्लेख
अपने बयान में चौधरी ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने इसे आम लोगों के मतदान अधिकार से जोड़कर उठाया और कहा कि सांसदों को ऐसे मामलों में जनता की आवाज बनना चाहिए।
हालांकि, उपलब्ध बयान में उन्होंने संबंधित मतदाताओं के व्यक्तिगत मामलों, दस्तावेजों अथवा नाम हटाने के आधार का विस्तृत विवरण नहीं दिया। इसलिए उनके आरोप की जांच के लिए संबंधित निर्वाचन रिकॉर्ड और आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
संसद से निर्वाचन सदन की ओर निकला मार्च
INDIA ब्लॉक के सांसद संसद से निर्वाचन आयोग मुख्यालय, निर्वाचन सदन की ओर रवाना हुए। विपक्षी नेताओं की प्रमुख मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा थी। मार्च के दौरान लोकतंत्र और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए गए।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के मद्देनजर इलाके में पुलिस तैनात थी। मार्ग पर बैरिकेड लगाए गए और आवाजाही पर प्रतिबंध भी रहे। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पक्षपात हुआ है।
आगे बढ़ने से रोके जाने पर सांसदों ने दिया धरना
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को निर्वाचन आयोग कार्यालय परिसर में प्रवेश करने से रोका गया। इसके बाद INDIA ब्लॉक के सांसदों ने धरना दिया और अपनी मांग दोहराई।
मार्च के दौरान नीति आयोग कार्यालय के पास राहुल गांधी लोहे के बैरिकेड पर चढ़कर तिरंगा लहराते दिखाई दिए। समाजवादी पार्टी सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और अन्य सांसद भी बैरिकेड पर नजर आए। एनसीपी-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले ने भी प्रदर्शन में भाग लिया।
खरगे और अन्य नेताओं ने भी जताया विरोध
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शन के दौरान नागरिकों को मिले लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि युवा मतदाताओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों के अधिकार प्रभावित किए जा रहे हैं।
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग भी की। इस तरह मार्च में अलग-अलग नेताओं ने मतदाता अधिकारों और संस्थागत जवाबदेही से जुड़ी अपनी आपत्तियां सामने रखीं।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर विपक्ष और आयोग के अलग पक्ष
विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। विपक्ष का आरोप है कि दस्तावेज संबंधी आवश्यकताओं के कारण गरीब और कमजोर वर्गों के पात्र मतदाताओं को परेशानी हो सकती है तथा उनके नाम सूची से बाहर होने का जोखिम है।
वहीं, निर्वाचन आयोग और सरकार ने गलत काम के आरोपों से इनकार किया है। उनका पक्ष है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य दोहरे और अपात्र नामों को हटाकर मतदाता सूची को अद्यतन करना है।
रेणुका चौधरी का बयान इसी विवाद के बीच सामने आया है। उनके आरोपों का केंद्र आम नागरिक का मतदान अधिकार रहा। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग प्रक्रिया को मतदाता सूची की शुद्धता से जोड़ता है। मामले में राजनीतिक बयानों के साथ संबंधित रिकॉर्ड और आधिकारिक जवाबों के आधार पर तथ्यों का मूल्यांकन आवश्यक है।
