Indore की शराब दुकानों की नीलामी में रिकॉर्ड उछाल
Indore में शराब की दुकानों की नीलामी इस बार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। शहर में कुल 173 शराब दुकानों में से अब तक 113 दुकानों की नीलामी पूरी हो चुकी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन 113 दुकानों के लिए विभाग को 1613 करोड़ रुपए की बोली प्राप्त हुई है। यह पिछले साल हुई नीलामी के 1209 करोड़ रुपए की तुलना में 404 करोड़ ज्यादा है।
पिछले साल और इस साल की तुलना
पिछले साल शहर की शराब दुकानों की नीलामी 1209 करोड़ रुपए में हुई थी। इस बार सरकार ने इन दुकानों के लिए प्रारंभिक कीमत 1451 करोड़ रुपए तय की थी। लेकिन नीलामी में इस कीमत को पार करते हुए 1613 करोड़ रुपए की बोली प्राप्त हुई। इसका मतलब यह हुआ कि नीलामी में इस बार दुकानों की कीमत में 161 करोड़ रुपए का अतिरिक्त उछाल देखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह उछाल शराब की बढ़ती मांग और नए आबकारी नीति के कारण हुआ है। सरकार ने 2026-27 की नई आबकारी नीति के तहत दुकानों की कीमतें लगभग 20 प्रतिशत बढ़ा दी हैं।
नीलामी प्रक्रिया
शहर की 173 शराब दुकानों को 56 समूहों में बांटा गया और तीन अलग-अलग चरणों में नीलामी की जा रही है। पहले चरण में कुल 113 दुकानों के लिए टेंडर प्राप्त हुए। सहायक आबकारी आयुक्त अभिषेक तिवारी ने बताया कि विभाग को इन दुकानों के लिए निर्धारित कीमत से ज्यादा बोली मिली है।
नीलामी का उद्देश्य न केवल सरकारी राजस्व में वृद्धि करना है, बल्कि शराब की बिक्री में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखना भी है। प्रत्येक समूह के लिए अलग-अलग टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई है।
दूसरे चरण की नीलामी
पहले चरण में 22 समूहों की 60 दुकानों के लिए कोई टेंडर प्राप्त नहीं हुआ था। अब इन्हें दूसरे चरण में नीलाम किया जाएगा। डिप्टी कंट्रोलर मनोज अग्रवाल ने बताया कि इन दुकानों की प्रारंभिक कीमत 650 करोड़ रुपए तय की गई है। उम्मीद है कि पिछले चरण की तरह इन दुकानों के लिए भी विभाग को तय कीमत से अधिक बोली प्राप्त होगी।
आबकारी नीति 2026-27 का प्रभाव
प्रदेश सरकार ने नई आबकारी नीति 2026-27 लागू की है। इसमें शहर की सभी शराब दुकानों की कीमत लगभग 20 प्रतिशत बढ़ा दी गई। नीति का उद्देश्य सरकारी राजस्व बढ़ाना और शराब व्यापार में अनुशासन सुनिश्चित करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति के कारण दुकानों की नीलामी में बोली इतनी अधिक रही। इसके अलावा शहर में शराब की बढ़ती मांग ने भी बोली में इजाफा किया।
सरकार की उम्मीद और रणनीति
सरकार की उम्मीद है कि नीलामी से मिलने वाली राशि से प्रदेश के विकास कार्यों में निवेश किया जाएगा। आबकारी विभाग ने इस बार भी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नीलामी प्रक्रिया ऑनलाइन और खुली की है।
सहायक आयुक्त अभिषेक तिवारी ने कहा कि इस नीलामी से प्रदेश की आबकारी प्रणाली मजबूत होगी और भविष्य में शराब की बिक्री में सुधार देखने को मिलेगा।
शहर में शराब की मांग
इंदौर शहर में शराब की लगातार बढ़ती मांग ने नीलामी में उच्च बोली लगाने वाले खरीदारों की संख्या को काफी बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ती मांग मुख्य रूप से शहर के युवा वर्ग और कारोबारियों के कारण है, जो शराब के विभिन्न ब्रांडों और विकल्पों में अधिक रुचि ले रहे हैं। इसके साथ ही, शराब के सेवन और मनोरंजन के नए रुझान भी बाजार में कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। पिछले साल की तुलना में इस साल नीलामी में बोली की रकम काफी ऊपर गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि इंदौर में शराब की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा, शहर में शराब की दुकानों की संख्या और उनकी उपलब्धता, विशेष रूप से व्यावसायिक क्षेत्रों में, भी कीमतों को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मांग के कारण नीलामी में प्रतिस्पर्धा अधिक हो गई है, और इसलिए दुकानों की कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में काफी ऊंची पहुंच गई हैं।
निष्कर्ष
इंदौर में शराब दुकानों की नीलामी ने रिकॉर्ड स्तर पर सरकारी राजस्व में इजाफा किया है। पहले चरण में 113 दुकानों पर प्राप्त 1613 करोड़ रुपए की बोली पिछले साल की तुलना में 404 करोड़ रुपए ज्यादा है। दूसरी नीलामी में भी अधिक बोली की उम्मीद है। नई आबकारी नीति 2026-27 और बढ़ती मांग के चलते इंदौर की शराब दुकानों की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
