एकीकृत हाई स्कूल बछड़िया में “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
रिपोर्ट: अर्जुन कुमावत | पिपलोदा (रतलाम)
नशा-मुक्त समाज के निर्माण का संदेश, विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाकर दिलाई जागरूकता की मिसाल
बछड़िया (रतलाम)। मध्य प्रदेश सरकार एवं जिला पुलिस रतलाम द्वारा युवाओं को नशे की लत से बचाने और समाज में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान के तहत शासकीय एकीकृत हाई स्कूल बछड़िया में एक प्रभावशाली जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह अभियान 15 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक संचालित किया जा रहा है, जिसमें जिले के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया जा रहा है।
कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार ‘माई भारत’ (MY Bharat) पहल के अंतर्गत किया गया। इसमें पुलिस विभाग, जनप्रतिनिधियों, माई भारत के स्वयंसेवकों, विद्यालय परिवार तथा ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना, नशीले पदार्थों के दुष्परिणामों की जानकारी देना तथा समाज में नशा-मुक्त वातावरण तैयार करना था।
युवाओं को नशे के खिलाफ किया गया जागरूक
आज के समय में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। विशेष रूप से युवाओं और किशोरों में नशे की बढ़ती लत उनके भविष्य, स्वास्थ्य और परिवार के लिए खतरा बन रही है। इसी चुनौती से निपटने के लिए जिला पुलिस रतलाम लगातार जनजागरूकता अभियान चला रही है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि नशीले पदार्थों का सेवन केवल व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि मानसिक संतुलन, शिक्षा, सामाजिक जीवन और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डालता है। अधिकारियों ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार एवं मित्रों को भी इसके प्रति जागरूक करें।
मानव श्रृंखला बनाकर दिया नशा-मुक्ति का सशक्त संदेश
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और प्रेरणादायक दृश्य तब देखने को मिला जब विद्यालय परिसर में सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने एक विशाल मानव श्रृंखला (Human Chain) का निर्माण किया। विद्यार्थियों ने एकजुट होकर समाज को यह संदेश दिया कि यदि युवा पीढ़ी नशे के खिलाफ संकल्प ले ले तो एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज का निर्माण संभव है।
विद्यालय मैदान में चूने की सहायता से “नशे से दूरी” लिखकर विद्यार्थियों ने विशेष मानव आकृति तैयार की। इस रचनात्मक प्रस्तुति के माध्यम से सभी ने “Say No to Drugs” का संदेश दिया। विद्यार्थियों का यह प्रयास उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक रहा और कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भी बना।
मानव श्रृंखला के दौरान विद्यार्थियों ने नशा-मुक्त समाज के समर्थन में विभिन्न जागरूकता संदेश भी दिए और लोगों से नशे से दूर रहने की अपील की।
पुलिस अधिकारियों ने बताई नशे की कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी हानियां
कार्यक्रम में रतलाम जिला पुलिस की ओर से उप निरीक्षक (SI) अलकेश सिंघाड़, आरक्षक हिम्मत सिंह तथा आरक्षक लक्ष्मण सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे।
पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नशा केवल व्यक्ति का जीवन ही नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। नशीले पदार्थों के सेवन से अपराध की घटनाओं में वृद्धि होती है तथा युवा अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों की पहचान, उनके दुष्परिणाम तथा उनसे जुड़े कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और सेवन के खिलाफ कानून बेहद सख्त हैं तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाती है।
हेल्पलाइन नंबरों की दी जानकारी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और ग्रामीणों को विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी भी दी गई ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को नशे की समस्या है या वह किसी अन्य व्यक्ति को नशे की लत से बाहर निकालना चाहता है तो वह मानस हेल्पलाइन 1933 तथा नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 पर संपर्क कर सकता है।
अधिकारियों ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशे की गिरफ्त में हो तो उसे छिपाने के बजाय उचित परामर्श और उपचार के लिए प्रेरित करें।
जनप्रतिनिधियों ने युवाओं से किया नशे से दूर रहने का आह्वान
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। जनपद पंचायत सदस्य प्रतिनिधि बालाराम पटेल, प्रहलाद कुमावत एवं दिनेश खारोल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र का भविष्य युवाओं के हाथ में है और यदि युवा नशे से दूर रहेंगे तो देश और समाज दोनों मजबूत होंगे।
उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति की प्रतिभा और क्षमता को समाप्त कर देता है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर शिक्षा, खेल और सकारात्मक गतिविधियों में अधिक समय देना चाहिए।
जनप्रतिनिधियों ने अभिभावकों से भी अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने और उन्हें अच्छी संगति तथा सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की अपील की।
‘माई भारत’ स्वयंसेवकों ने निभाई सक्रिय भूमिका
कार्यक्रम में ‘माई भारत’ (MY Bharat) के स्वयंसेवकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयंसेवकों ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर जागरूकता गतिविधियों में भाग लिया तथा अभियान को सफल बनाने में सहयोग प्रदान किया।
‘माई भारत’ के स्वयंसेवक एवं पत्रकार (ब्यूरो चीफ) अर्जुन कुमावत ने कार्यक्रम के दौरान युवाओं को नशा-मुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवा यदि अपने जीवन में अनुशासन, सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी को अपनाएं तो वे स्वयं भी सफल होंगे और समाज के लिए भी प्रेरणा बनेंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सोशल मीडिया, खेल, शिक्षा, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामाजिक सेवा जैसे सकारात्मक कार्यों में भागीदारी बढ़ाकर नशे जैसी बुराइयों से आसानी से बचा जा सकता है।
विद्यालय परिवार ने निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय परिवार की भूमिका भी अत्यंत सराहनीय रही। विद्यालय की प्रधान अध्यापक प्रतिभा विजावत के नेतृत्व में पूरे स्टाफ ने कार्यक्रम की व्यवस्थाएं संभालीं और विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस अवसर पर जीवनबाला मईडा, दशरथ प्रजापत, करूलाल कुमावत एवं यशवंत पाटीदार सहित विद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराया और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय परिवार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाना भी है।
विद्यार्थियों ने ली नशा न करने की शपथ
कार्यक्रम के समापन पर सभी छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से नशा-मुक्त जीवन अपनाने की शपथ ली। विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे जीवन में कभी भी किसी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन नहीं करेंगे तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे।
सभी ने यह भी संकल्प लिया कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशे की लत से जूझ रहा होगा तो उसे उपचार और परामर्श के लिए प्रेरित करेंगे तथा समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने का कार्य करेंगे।
नशा-मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के खिलाफ केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती, बल्कि समाज में व्यापक जनजागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। विद्यालयों में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होने से बच्चों और युवाओं में सही समय पर जागरूकता विकसित होती है और वे भविष्य में नशे जैसी बुराइयों से बच सकते हैं।
“नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0” अभियान का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि युवाओं में सकारात्मक सोच, स्वस्थ जीवनशैली और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। जिला पुलिस रतलाम द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान समाज में नशा-मुक्त वातावरण तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि पुलिस, प्रशासन, शिक्षक, जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संगठन और समाज मिलकर कार्य करें तो नशे जैसी सामाजिक बुराई पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह साबित किया कि नई पीढ़ी जागरूक है और एक स्वस्थ, सुरक्षित तथा नशा-मुक्त भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
