रतलाम के अपना घर आश्रम में रक्षाबंधन का पर्व बेहद भावुक अंदाज में मनाया गया। नेहा बौरासी, निखिल शर्मा और शीतल पांचाल ने बेसहारा और असहाय प्रभुजनों को तिलक लगाकर राखी बांधी और मिठाई खिलाई।
रतलाम अपना घर आश्रम रक्षाबंधन: 3 बहनों की अनोखी पहल, प्रभुजनों की आंखों में आए खुशी के आंसू
मानवता की मिसाल: नेहा बौरासी, निखिल शर्मा और शीतल पांचाल ने निभाया बहन का फर्ज, प्रभुजनों को मिला परिवार का प्यार
रिपोर्टर: पवन धाकड़, रतलाम
रतलाम। रतलाम अपना घर आश्रम रक्षाबंधन कार्यक्रम ने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के साथ मानवता और अपनत्व का ऐसा संदेश दिया, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर रतलाम स्थित अपना घर आश्रम में अत्यंत भावुक, हृदयस्पर्शी और प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां आमतौर पर लोग अपने परिवार के साथ घरों में त्योहार मनाते हैं, वहीं समाजसेवी बहनों ने आश्रम में निवासरत बेसहारा, निराश्रित और असहाय प्रभुजनों के साथ रक्षाबंधन मनाकर मानवता की मिसाल पेश की।
रतलाम अपना घर आश्रम रक्षाबंधन कार्यक्रम में तीन बहनों की खास पहल
आश्रम परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य रूप से समाजसेविका सुश्री नेहा बौरासी, सुश्री निखिल शर्मा और सुश्री शीतल पांचाल विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत में आश्रम प्रबंधन द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया।
इसके बाद बहनों ने एक-एक कर आश्रम में रहने वाले सभी प्रभुजनों को तिलक लगाया, उनकी आरती उतारी और मिठाई खिलाई। इसके बाद प्रभुजनों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को जीवंत किया। इस दौरान आश्रम में त्योहार जैसा उल्लास दिखाई दिया।
राखी बंधते ही भावुक हुआ माहौल, आंखों में आए खुशी के आंसू
रतलाम अपना घर आश्रम रक्षाबंधन कार्यक्रम का सबसे भावुक पल उस समय देखने को मिला, जब बहनों ने प्रभुजनों की कलाई पर राखी बांधी। राखी बंधते ही कई प्रभुजनों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए, जबकि कई चेहरों पर लंबे समय बाद मुस्कान देखने को मिली।
वर्षों से परिवार से दूर रह रहे प्रभुजनों को रक्षाबंधन के दिन बहन का प्यार और परिवार जैसा अपनापन मिला। प्रभुजनों ने भी हाथ उठाकर अपनी बहनों को ढेर सारा आशीर्वाद और दुआएं दीं। इस भावुक दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भी भाव-विभोर कर दिया।
“यह धागा नहीं, अपनत्व का बंधन है” — नेहा बौरासी
इस अवसर पर सुश्री नेहा बौरासी ने कहा कि रक्षाबंधन सिर्फ एक धागे का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अपनत्व, सुरक्षा और मानवता का पर्व है। उन्होंने कहा कि उनके लिए आश्रम में रहने वाले सभी प्रभुजन उनके भाई हैं।
नेहा बौरासी ने कहा कि प्रभुजनों के साथ त्योहार मनाकर जो आत्मिक शांति और सुकून मिला है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने समाज के लोगों से भी अपील की कि वे कभी न कभी अपना घर आश्रम आएं और यहां रहने वाले प्रभुजनों के जीवन में खुशियां बांटें। उनके अनुसार जरूरतमंदों के चेहरे पर खुशी लाना ही सच्ची सेवा है।
निखिल शर्मा और शीतल पांचाल ने भी सेवा जारी रखने का लिया संकल्प
सुश्री निखिल शर्मा और सुश्री शीतल पांचाल ने कहा कि अपना घर आश्रम वास्तव में अपने घर जैसा ही है। यहां आकर ऐसा महसूस होता है, जैसे वे अपने ही परिवार के सदस्यों से मिल रही हों।
दोनों ने कहा कि प्रभुजनों के चेहरों पर राखी बंधने के बाद दिखाई दी खुशी उनके लिए सबसे बड़ा उपहार है। उन्होंने भविष्य में भी इसी प्रकार सेवा कार्यों से जुड़कर जरूरतमंद और असहाय लोगों के जीवन में खुशियां बांटने की बात कही।
अपना घर आश्रम में असहाय प्रभुजनों की होती है सेवा
अपना घर आश्रम बेसहारा, लावारिस, बीमार, मानसिक रूप से अस्वस्थ और असहाय लोगों को आश्रय देकर उनकी सेवा करने वाली संस्था है। रतलाम आश्रम में वर्तमान में सैकड़ों प्रभुजी और माताजी निवासरत हैं।
यहां उनके भोजन, वस्त्र, चिकित्सा और आवास की व्यवस्था आश्रम द्वारा सेवा भाव से की जाती है। आश्रम प्रबंधन समय-समय पर विभिन्न पर्व और आयोजन भी करता है, ताकि यहां रहने वाले प्रभुजनों को अकेलेपन का एहसास न हो और उन्हें भी परिवार तथा समाज से जुड़ाव महसूस हो सके।
रक्षाबंधन ने दिया मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
रतलाम अपना घर आश्रम रक्षाबंधन कार्यक्रम केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस आयोजन ने समाज के सामने मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी रखा। त्योहारों की खुशियां उन लोगों तक पहुंचाना, जो अपने परिवार से दूर हैं या जिनके जीवन में कोई सहारा नहीं है, इस आयोजन का सबसे खास पहलू रहा।
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। अपना घर आश्रम में आयोजित कार्यक्रम ने इस रिश्ते की परिभाषा को और व्यापक करते हुए यह संदेश दिया कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदना और अपनत्व से भी बनते हैं।
मिष्ठान वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रभुजनों को मिष्ठान वितरित किया गया और सभी ने एक साथ मिलकर रक्षाबंधन पर्व का आनंद लिया। इस दौरान आश्रम के प्रमुख सेवादार, स्टाफ सदस्य और अन्य गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।
आश्रम प्रबंधन ने इस नेक और प्रेरणादायक पहल के लिए सुश्री नेहा बौरासी, सुश्री निखिल शर्मा और सुश्री शीतल पांचाल का आभार व्यक्त किया। तीनों बहनों की इस पहल ने रतलाम में रक्षाबंधन को केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं रहने दिया, बल्कि इसे मानवता, सेवा और अपनत्व के यादगार उत्सव में बदल दिया।
