Indore में राष्ट्रीय संगोष्ठी 2026 का भव्य शुभारंभ आचार्य श्री सुनील सागर महाराज के सानिध्य में हुआ। प्राकृत भाषा, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति पर देशभर के विद्वानों ने अपने विचार रखे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
राष्ट्रीय संगोष्ठी 2026 का भव्य शुभारंभ: प्राकृत भाषा, पर्यावरण संरक्षण और संस्कृति पर ऐतिहासिक मंथन
रिपोर्ट: राजेश जैन दद्दू | Indore
Indore में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी 2026 का शुभारंभ रविवार दोपहर आचार्य श्री सुनील सागर महाराज के पावन सानिध्य में अत्यंत गरिमामय वातावरण में हुआ। श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट एवं कुंद-कुंद ज्ञानपीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय “कालजयी विरासत, समकालीन विमर्श और स्वर्णिम भविष्य की रूपरेखा” रखा गया है। देशभर से आए विद्वानों, संतों एवं शोधकर्ताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर की संगोष्ठी का स्वरूप प्रदान किया।
विद्वानों ने प्राकृत भाषा का महत्व बताया
राष्ट्रीय संगोष्ठी 2026 के प्रथम सत्र में नीरज जैन (इंदौर), सत्येंद्र कुमार जैन (जयपुर), अभय वर्णी, वीरेंद्र जैन एवं तारा डागा सहित अनेक विद्वानों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने प्राकृत भाषा, भू-वलय, पर्यावरण, प्राकृत साहित्य तथा नवांक के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि प्राकृत भाषा भारतीय भाषाओं की मूल धारा रही है, जिससे कन्नड़, मलयालम, बंगाली, गुजराती, मराठी तथा संस्कृत जैसी अनेक भाषाओं का विकास हुआ। संगोष्ठी में प्रस्तुत शोधपत्रों ने प्राकृत साहित्य की समृद्ध विरासत को नए दृष्टिकोण से सामने रखा।
जयपुर से पधारे अध्यक्षीय वक्ता जयकुमार उपाध्ये ने सभी शोधपत्रों की सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत करते हुए संगोष्ठी को उच्च बौद्धिक स्तर तक पहुंचाया।
आचार्य श्री ने प्रदर्शनी एवं लाइब्रेरी का किया अवलोकन
आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने उदासीन आश्रम एवं कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा संचालित विशाल लाइब्रेरी तथा प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने दुर्लभ ग्रंथों एवं प्रदर्शित सामग्री के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।इस अवसर पर डॉ. अरविंद जैन, अमित कासलीवाल, आदित्य कासलीवाल सहित ट्रस्ट के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
पर्यावरण बचाना हम सबकी जिम्मेदारी
मंगल प्रवचन में आचार्य श्री सुनील सागर महाराज ने कहा कि जैन धर्म पूर्णतः वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है। यदि वैज्ञानिक इसकी गहराई को समझें तो वे भी इसकी वैज्ञानिकता को स्वीकार करेंगे।उन्होंने कहा कि वाहनों से निकलने वाला कार्बन, पटाखों के रसायन और बढ़ता प्रदूषण पृथ्वी के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। समाज को सादगीपूर्ण जीवन अपनाना चाहिए। आवश्यकता से अधिक बिजली, एसी तथा संसाधनों का उपयोग कम करना भी पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है।
आचार्य श्री ने मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन के दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए पक्षियों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया।
प्रकृति और संस्कृति दोनों का संरक्षण आवश्यक
आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य का शरीर पंचमहाभूत—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और वनस्पति से निर्मित है। यदि प्रकृति दूषित होगी तो मानव जीवन भी संकट में पड़ जाएगा।उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यमुना जैसी पवित्र नदी का जल आज पीने योग्य नहीं रह गया है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
पेड़-पौधों में भी जीवन है
अपने प्रवचन में आचार्य श्री ने वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु के शोध का उल्लेख करते हुए कहा कि पेड़-पौधों में भी जीवन होता है। विकास कार्यों के नाम पर अंधाधुंध वृक्षों की कटाई भविष्य के लिए गंभीर संकट है।उन्होंने कहा कि आधुनिक रासायनिक उत्पादों के अत्यधिक उपयोग से त्वचा रोग बढ़ रहे हैं। हमें प्राकृतिक जीवनशैली अपनाते हुए प्रकृति एवं संस्कृति दोनों का संरक्षण करना चाहिए। “अतिथि देवो भव” की भावना भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है।
प्राकृत भाषा अपनाने का संदेश
अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी महाराज ने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठी 2026 में प्राकृत भाषा पर गहन चिंतन हुआ है। यदि समाज प्राकृत भाषा को अपनाए और इसे जीवनचर्या का हिस्सा बनाए, तो जैन आगमों एवं प्राचीन शास्त्रों का वास्तविक ज्ञान सहज रूप से प्राप्त किया जा सकता है।उन्होंने सभी से प्राकृत भाषा सीखने और इसके प्रचार-प्रसार का संकल्प लेने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में इन संस्थाओं का सहयोग
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन में श्री दिगंबर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट, कुंद-कुंद ज्ञानपीठ, दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन इंदौर रीजन तथा दिगंबर जैन श्राविका आश्रम समवशरण मंदिर ट्रस्ट सहित अनेक संस्थाओं का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
संगोष्ठी को प्राकृताचार्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज, अंतर्मुखी मुनि पूज्यसागर जी महाराज संघ एवं आर्यिका माताजी संघ का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ। संचालन विदुषी प्रो. संगीता मेहता एवं डॉ. अरविंद जैन ने किया।
प्रमुख अतिथि एवं गणमान्यजन
इस अवसर पर अमित कासलीवाल, हंसमुख गांधी, सुशील कासलीवाल, आदित्य कासलीवाल, लोकेश कासलीवाल, ब्र. अनिल जैन, आनंद गोधा, नवीन गोधा, महामंत्री हर्ष जैन, मनोहर झांझरी, प्रदीप चौधरी, संदीप मोयरा, शरद सेठी, सुमत लुहाड़िया, डॉ. जैनेन्द्र जैन, प्रिंसिपल टेंग्या, राजेन्द्र सोनी, मुकेश बाकलीवाल, अजीत जैन, इंजी. अनिल कुमार जैन, प्रो. संगीता मेहता, रेखा संजय जैन, बाबूलाल पाण्ड्या, कीर्ति पाण्ड्या, दिलीप पाटनी, संजय पापड़ीवाल, ऋषभ जैन सहित बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज के महिला एवं पुरुष उपस्थित रहे।



