राष्ट्रीय किसान दिवस 2025 पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का भावुक और शक्तिशाली संदेश। जानिए किसान को ब्रह्मा-विष्णु-महेश क्यों कहा गया और भारत कैसे बना कृषि में आत्मनिर्भर।
राष्ट्रीय किसान दिवस 2025 भारत के अन्नदाताओं को समर्पित एक ऐसा दिन है, जो न केवल कृषि की महत्ता को रेखांकित करता है, बल्कि किसान के त्याग, तपस्या और समर्पण को नमन करने का अवसर भी देता है। हर वर्ष 23 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह दिवस देश के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर आयोजित होता है।
राष्ट्रीय किसान दिवस 2025: किसान क्यों हैं भारत की आत्मा
भारत की संस्कृति में कहा गया है—
“अन्न ही ब्रह्म है”
लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने इस विचार को और ऊंचाई देते हुए कहा कि—
“अन्न उपजाने वाला किसान स्वयं ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप है।”
किसान = ब्रह्मा, विष्णु और महेश
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ब्रह्मा – सृजन करता है (बीज बोता है)
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विष्णु – पालन करता है (फसल को सींचता है)
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महेश – त्याग करता है (स्वयं भूखा रहकर देश को भोजन देता है)
धूप, बारिश, ठंड और विपरीत परिस्थितियों में खेतों में पसीना बहाने वाला किसान केवल अन्न नहीं, जीवन पैदा करता है।

2014 से 2024: कृषि में ऐतिहासिक क्रांति
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि—
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अनाज उत्पादन में 44% की रिकॉर्ड वृद्धि
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भारत आज गेहूं, चावल, फल, सब्जी और दूध में आत्मनिर्भर
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कभी आयातक रहा भारत, आज वैश्विक कृषि शक्ति बन चुका है
इस परिवर्तन के पीछे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाई गई कृषि नीतियां हैं।
ICAR और आधुनिक खेती की भूमिका
ICAR द्वारा:
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उन्नत बीज
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वैज्ञानिक खेती
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डिजिटल और तकनीकी समाधान
इन सबने राष्ट्रीय किसान दिवस 2025 को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि उपलब्धियों का उत्सव बना दिया।
प्राकृतिक खेती: आने वाली पीढ़ियों के लिए संकल्प
शिवराज सिंह चौहान ने ज़ोर दिया कि—
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रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग
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प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा
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दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता लक्ष्य
यह कदम धरती, किसान और उपभोक्ता—तीनों के लिए वरदान है।
किसानों की सेवा = भगवान की पूजा
केंद्रीय कृषि मंत्री ने भावुक शब्दों में कहा—
“कृषि मंत्री के रूप में किसानों की सेवा करना मेरे लिए भगवान की पूजा के समान है।”
यही भावना राष्ट्रीय किसान दिवस 2025 को विशेष बनाती है।
