सिलवानी में धूमधाम और उत्साह से मना रक्षाबंधन, महंगाई ने फीकी की त्योहार की खुशियां
दूर-दूर से पहुंचीं बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र, मिठाई से लेकर कपड़े और राखियां महंगी होने से मध्यम व गरीब परिवारों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
संवाददाता वैभव जैन मस्ताना
सिलवानी भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक पवित्र रक्षाबंधन पर्व सिलवानी सहित आसपास के क्षेत्रों में उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही घरों में त्योहार की रौनक दिखाई दी। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की, वहीं भाइयों ने भी बहनों को उपहार देकर जीवनभर उनकी रक्षा और सहयोग का संकल्प लिया।
रक्षाबंधन को लेकर कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। बाजारों में राखी, मिठाई, कपड़े और उपहारों की दुकानें सजी रहीं। हालांकि इस बार त्योहार की खुशियों पर बढ़ती महंगाई का असर भी साफ दिखाई दिया। स्थानीय लोगों और व्यापारियों के अनुसार दैनिक उपयोग की वस्तुओं से लेकर त्योहार से जुड़े सामान की कीमतों में बढ़ोतरी ने विशेष रूप से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित किया।
दूर-दूर से भाइयों के घर पहुंचीं बहनें
रक्षाबंधन के अवसर पर विवाहित बहनें अपने मायके और भाइयों के घर पहुंचीं। सुबह से ही भाई-बहनों के मिलने और राखी बांधने का सिलसिला शुरू हो गया। बहनों ने तिलक लगाकर आरती उतारी और भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। इसके बाद मिठाई खिलाकर उनके मंगलमय जीवन की कामना की गई।
जो बहनें किसी कारणवश अपने भाइयों तक नहीं पहुंच सकीं, वहां परिवार के अन्य सदस्यों ने भी रिश्तों की आत्मीयता को बनाए रखते हुए पर्व की परंपराओं को निभाया। कई परिवारों में भाभियों और अन्य परिजनों की मौजूदगी ने त्योहार की खुशियों को और बढ़ाया।
बाजारों में रही रौनक, लेकिन महंगाई ने बढ़ाई चिंता
रक्षाबंधन से पहले सिलवानी के बाजारों में खरीदारों की चहल-पहल देखने को मिली। राखियों की दुकानों के साथ मिठाई, कपड़े, खिलौने और उपहार सामग्री की दुकानों पर लोग खरीदारी करते दिखाई दिए।
इसके बावजूद महंगाई का असर लोगों की खरीदारी पर नजर आया। कई परिवारों ने अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सीमित खरीदारी को प्राथमिकता दी। लोगों का कहना था कि त्योहार से जुड़ी लगभग हर वस्तु के दाम बढ़ने से इस बार पहले जैसी खुलकर खरीदारी करना मुश्किल हुआ।
मिठाई से लेकर राखी तक बढ़ी कीमतों का असर
त्योहार पर सबसे अधिक मांग मिठाइयों और राखियों की रहती है। स्थानीय स्तर पर लोगों ने बताया कि मिठाई, कपड़े, खिलौने और राखियों की कीमतों में बढ़ोतरी महसूस की गई।
खाने का तेल, घी, चीनी, बेसन और अन्य खाद्य सामग्री की बढ़ी कीमतों का असर घरों में बनने वाले पारंपरिक पकवानों पर भी पड़ा। कई परिवारों ने इस बार सीमित मात्रा में मिठाइयां और पकवान तैयार किए।
गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का बिगड़ा बजट
त्योहार पर बढ़े खर्च का सबसे अधिक प्रभाव सीमित आय वाले परिवारों पर देखने को मिला। रक्षाबंधन पर राखी, मिठाई, कपड़े और उपहार सहित कई तरह के खर्च होते हैं। ऐसे में रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ी कीमतों के कारण परिवारों को अपने त्योहार के बजट में कटौती करनी पड़ी।
कई लोगों के चेहरों पर बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता दिखाई दी। उनका कहना था कि त्योहार खुशी और मेल-मिलाप का अवसर होते हैं, लेकिन लगातार बढ़ते घरेलू खर्च के कारण त्योहार मनाने के लिए भी बजट का विशेष ध्यान रखना पड़ रहा है।
व्यापार पर भी दिखाई दिया महंगाई का असर
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि महंगाई का असर केवल ग्राहकों पर ही नहीं, बल्कि बाजार के कारोबार पर भी पड़ा है। लोगों ने खरीदारी तो की, लेकिन कई ग्राहकों ने पहले की तुलना में कम सामान खरीदा और बजट के अनुसार सस्ते विकल्पों को प्राथमिकता दी।
व्यापारियों को रक्षाबंधन जैसे बड़े पर्व पर अच्छे कारोबार की उम्मीद रहती है, लेकिन कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों की खरीदारी की क्षमता प्रभावित होने से अपेक्षित कारोबार पर भी असर पड़ने की बात कही गई।
महंगाई के बावजूद रिश्तों में दिखी वही मिठास

महंगाई की चिंता के बीच भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और रक्षाबंधन का उत्साह बरकरार रहा। परिवारों ने अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार पर्व मनाया और एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं।
दिनभर घरों में भाई-बहनों और रिश्तेदारों का आना-जाना लगा रहा। राखी बांधने, मिठाई खिलाने और उपहार देने की परंपरा के साथ रक्षाबंधन का पर्व पारिवारिक प्रेम और आत्मीयता के वातावरण में मनाया गया।
कुल मिलाकर सिलवानी में रक्षाबंधन का पर्व उत्साह, प्रेम और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। हालांकि बढ़ती महंगाई ने इस बार त्योहार के बजट और बाजार की खरीदारी पर असर जरूर डाला, लेकिन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के प्रति लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ।
