Rajendra Bharti की सदस्यता खत्म: कानून के तहत हुई कार्रवाई, बोले विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर
मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया से कांग्रेस विधायक Rajendra Bharti की विधानसभा सदस्यता रद्द होने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा कि यह निर्णय किसी भी तरह की राजनीति से प्रेरित नहीं, बल्कि पूरी तरह कानून और निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिया गया है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई
विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि राजेंद्र भारती को न्यायालय द्वारा 3 साल की सजा सुनाई गई है। इसी आधार पर उनकी सदस्यता समाप्त की गई।
उन्होंने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8(3) का हवाला देते हुए बताया कि:
- यदि किसी जनप्रतिनिधि को 2 वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है,
- तो वह तुरंत प्रभाव से अयोग्य घोषित हो जाता है।
इस प्रावधान के अनुसार, विधानसभा सचिवालय ने कानूनी सलाह लेने के बाद उनकी सदस्यता शून्य घोषित कर दी।
विधिक प्रक्रिया का पूरा पालन
नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि यह फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया, बल्कि पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया।
- न्यायालय के आदेश की जानकारी मिलने के बाद
- विधिक विशेषज्ञों और एडवोकेट जनरल से राय ली गई
- उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया गया
उन्होंने बताया कि इस निर्णय की सूचना चुनाव आयोग और संबंधित विभागों को आधिकारिक रूप से भेज दी गई है।
विपक्ष के आरोपों पर जवाब
कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों—कि कार्रवाई जल्दबाजी में की गई—पर तोमर ने संयमित प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा:
“विधानसभा अध्यक्ष का पद दलगत भावना से ऊपर होता है। मेरा प्रयास हमेशा नियमों और कानून के अनुसार काम करने का रहता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि आरोप-प्रत्यारोप का जवाब देने के लिए कई लोग हैं, लेकिन वे केवल तथ्यों पर आधारित बात करेंगे।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाइयां
तोमर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी एक दल के खिलाफ नहीं है। पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं:
- प्रहलाद लोधी (2019) की सदस्यता भी इसी कानून के तहत समाप्त हुई थी
- इसी तरह अन्य मामलों में भी यह प्रावधान लागू किया गया है
इससे यह स्पष्ट होता है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह किसी भी पार्टी से हो।
शिकायतकर्ता की भूमिका
इस मामले में एक नागरिक द्वारा भी शिकायत की गई थी। तोमर ने बताया कि एक व्यक्ति ने न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए विधानसभा में आवेदन दिया था।
उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को यह अधिकार है कि वह कानून के पालन की मांग कर सकता है।
जीतू पटवारी के दौरे पर प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के विधानसभा पहुंचने के मुद्दे पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी।
तोमर ने कहा कि विधानसभा एक सार्वजनिक संस्था है और वहां आना-जाना किसी विवाद का विषय नहीं होना चाहिए।
आगे क्या होगा?
विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि फिलहाल प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन यदि न्यायालय भविष्य में कोई नया आदेश देता है, तो उसका पालन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून और न्यायपालिका सर्वोच्च हैं, और सभी निर्णय उसी के अनुसार लिए जाते हैं।
निष्कर्ष
Rajendra Bharti की सदस्यता समाप्त होने का मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि यह निर्णय पूरी तरह कानूनी प्रावधानों और न्यायालय के आदेशों के आधार पर लिया गया है।
अब आगे की स्थिति न्यायालय के फैसलों पर निर्भर करेगी। यदि कोर्ट से कोई राहत मिलती है, तो स्थिति बदल सकती है, अन्यथा दतिया विधानसभा सीट खाली मानी जाएगी।
