सिलवानी (संवाददाता वैभव जैन मस्ताना) — मध्य प्रदेश का रायसेन जिला इन दिनों किसी स्वास्थ्य सेवा या विकास कार्य के कारण नहीं, बल्कि मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी (CMHO) पद को लेकर चल रहे लगातार विवाद के कारण सुर्खियों में है। यह विवाद अब सिर्फ जिला स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में प्रशासनिक अस्थिरता और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं का केंद्र बन गया है।
जिले में CMHO पद पर तैनाती और जिम्मेदारी को लेकर जिस तरह बार-बार बदलाव और असमंजस की स्थिति बनी हुई है, उसने न केवल विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ा दी है।
बार-बार बदलता CMHO पद: दिनेश खत्री और हरिनारायण मांडरे के बीच जिम्मेदारी का खेल
रायसेन जिले में मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी के पद को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कभी डॉक्टर दिनेश खत्री को CMHO की जिम्मेदारी सौंपी जाती है तो कभी डॉक्टर हरिनारायण मांडरे को इस पद पर नियुक्त किया जाता है।
यह बदलाव इतनी बार हुआ है कि अब स्वास्थ्य विभाग के अंदर भी यह स्पष्टता नहीं रह गई है कि वास्तविक रूप से पद पर कौन कार्यरत है। इसी वजह से कई प्रशासनिक निर्णयों में देरी और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एक बार फिर डॉक्टर हरिनारायण मांडरे को रायसेन जिले का CMHO नियुक्त किया गया था, लेकिन इस बार भी मामला शांत नहीं रहा और पदभार ग्रहण से पहले ही नया विवाद सामने आ गया।
कार्यालय में ताला लगाने का आरोप और बढ़ता विवाद
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा उस समय शुरू हुई जब यह आरोप सामने आया कि डॉक्टर दिनेश खत्री ने CMHO कार्यालय में ताला लगाकर वहां से प्रस्थान कर दिया। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई।
जब डॉक्टर हरिनारायण मांडरे पदभार संभालने के लिए CMHO कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें कार्यालय बंद मिला और उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि एक संवेदनशील पद पर इस तरह की अव्यवस्था पूरे जिले की स्वास्थ्य प्रणाली को प्रभावित कर सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित असर
CMHO पद स्वास्थ्य विभाग में सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों में से एक होता है। इस पद के अंतर्गत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य योजनाओं का संचालन और निगरानी होती है।
लेकिन रायसेन में चल रहे इस विवाद का सीधा असर जमीनी स्तर पर दिखाई देने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या है। ऐसे में प्रशासनिक अस्थिरता इस समस्या को और गंभीर बना सकती है।
स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि जब शीर्ष स्तर पर ही स्पष्टता नहीं होगी, तो निचले स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन बाधित होना स्वाभाविक है।
प्रशासनिक असमंजस और कार्यप्रणाली पर सवाल
स्वास्थ्य विभाग के अंदर इस पूरे मामले को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ डॉक्टर दिनेश खत्री का पक्ष सामने आता है, तो दूसरी तरफ डॉक्टर हरिनारायण मांडरे को जिम्मेदारी सौंपने की बात की जाती है।
इस तरह की स्थिति से विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है और कई महत्वपूर्ण निर्णय लंबित पड़े हैं। स्वास्थ्य योजनाओं, दवाओं की आपूर्ति, अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारियों के स्थानांतरण जैसे कार्यों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है।
जिला स्तर से प्रदेश स्तर तक चर्चा
रायसेन CMHO विवाद अब केवल जिला प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला पूरे मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासनिक गलियारों में भी यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एक महत्वपूर्ण पद पर इतनी अस्थिरता क्यों बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर होती है, बल्कि जनता का भरोसा भी प्रभावित होता है।
स्वास्थ्य कर्मचारियों और जनता की परेशानी
इस विवाद का सबसे अधिक असर स्वास्थ्य कर्मचारियों और आम जनता पर पड़ने की आशंका है। अस्पतालों में काम कर रहे कर्मचारी भी इस स्थिति को लेकर असमंजस में हैं कि निर्देश किस अधिकारी के मानें।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को पहले ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है, और यदि प्रशासनिक स्तर पर ही भ्रम की स्थिति बनी रहे, तो इसका सीधा असर मरीजों की देखभाल पर पड़ सकता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल
हालांकि यह मामला पूरी तरह प्रशासनिक प्रतीत होता है, लेकिन अंदरखाने इसे लेकर राजनीतिक और विभागीय हलचल भी तेज है। अधिकारी स्तर पर निर्णयों में देरी और स्पष्ट निर्देशों की कमी के कारण स्थिति और अधिक जटिल होती जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि जल्द ही उच्च स्तर पर इस मामले का समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है ताकि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य स्थिति में लाया जा सके।
समाधान की आवश्यकता
रायसेन CMHO पद विवाद यह दर्शाता है कि प्रशासनिक स्थिरता किसी भी विभाग के सुचारू संचालन के लिए कितनी जरूरी है। बार-बार बदलते आदेश और असमंजस की स्थिति न केवल अधिकारियों के काम को प्रभावित करती है, बल्कि आम जनता के हितों पर भी असर डालती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में स्पष्ट और स्थायी निर्णय लेना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।
निष्कर्ष
रायसेन जिले में CMHO पद को लेकर चल रहा यह विवाद अब एक प्रशासनिक समस्या से बढ़कर एक बड़ी व्यवस्था संबंधी चुनौती बन गया है। डॉक्टर दिनेश खत्री और डॉक्टर हरिनारायण मांडरे के बीच जिम्मेदारी को लेकर चल रही यह खींचतान स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस स्थिति को कैसे संभालता है और कब तक रायसेन जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को स्थिर और सुचारू बनाया जा सकेगा।
