रायपुर में SBI ब्रांच मैनेजर से 4.99 लाख की साइबर ठगी, 2 करोड़ की FD का दिया झांसा
खुद को कार कंपनी से जुड़ा बताकर किया संपर्क, मेडिकल भुगतान के नाम पर RTGS से मुंबई के खाते में ट्रांसफर कराए 4.99 लाख रुपए; तेलीबांधा थाने में शिकायत के बाद जांच शुरू
रायपुर। साइबर ठग अब आम लोगों के साथ बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों को भी निशाना बना रहे हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक ब्रांच मैनेजर से 4 लाख 99 हजार रुपए की कथित साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने एक कार कंपनी से जुड़े होने का दावा करते हुए पहले करीब 2 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने का प्रस्ताव दिया और इसके बाद मेडिकल भुगतान की तत्काल जरूरत बताकर बैंक मैनेजर से दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर करा ली।
घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र से जुड़ी बताई जा रही है। ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित बैंक मैनेजर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब कॉल, ई-मेल और बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
2 करोड़ रुपए की FD के प्रस्ताव से शुरू हुआ मामला
जानकारी के मुताबिक रायपुर स्थित SBI की IGKV शाखा की ब्रांच मैनेजर से आरोपियों ने फोन और ई-मेल के माध्यम से संपर्क किया। आरोपियों ने कथित तौर पर एक कार कंपनी के नाम का इस्तेमाल किया और कंपनी की तरफ से बैंक में करीब 2 करोड़ रुपए की FD कराने की बात कही।
बड़ी रकम की सावधि जमा का प्रस्ताव मिलने के कारण बैंक स्तर पर बातचीत आगे बढ़ी। आरोपियों ने अपनी बात को विश्वसनीय दिखाने के लिए फोन के साथ ई-मेल का भी सहारा लिया। आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान जालसाजों ने बैंक मैनेजर का भरोसा जीतने की कोशिश की।
पुलिस शिकायत के अनुसार, शुरुआत में बातचीत बड़ी FD और कारोबारी लेन-देन को लेकर हुई थी। इसके बाद आरोपियों ने अचानक एक जरूरी भुगतान का हवाला देते हुए रकम ट्रांसफर कराने की बात कही।
मेडिकल भुगतान के नाम पर मांगे 4.99 लाख रुपए
आरोप है कि जालसाजों ने बैंक मैनेजर से कहा कि मेडिकल जरूरत से जुड़ा एक तत्काल भुगतान किया जाना है। इसके लिए 4 लाख 99 हजार रुपए दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा गया।
बड़ी FD कराने की बातचीत पहले से चलने के कारण कथित कंपनी प्रतिनिधियों पर भरोसा कर लिया गया। इसके बाद RTGS के माध्यम से 4.99 लाख रुपए बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए गए।
रकम भेजे जाने के बाद जब संबंधित दावों और लेन-देन की वास्तविकता की जांच की गई तो मामला संदिग्ध नजर आया। इसके बाद बैंक मैनेजर को कथित ठगी का पता चला और पुलिस को घटना की जानकारी दी गई।
मुंबई के कुरला स्थित खाते में ट्रांसफर हुई रकम
जानकारी के अनुसार 4.99 लाख रुपए RTGS के जरिए मुंबई के कुरला स्थित केनरा बैंक के एक खाते में भेजे गए। अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि जिस खाते में रकम ट्रांसफर हुई, वह किसके नाम पर है और उस खाते को कौन संचालित कर रहा था।
साइबर ठगी के मामलों में कई बार अपराधी सीधे अपने नाम के खातों का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि दूसरे व्यक्तियों के बैंक खातों के जरिए रकम हासिल करने का प्रयास करते हैं। ऐसे में पुलिस बैंक खाते की KYC और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री सहित संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर सकती है।
इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि 4.99 लाख रुपए खाते में पहुंचने के बाद रकम आगे किसी अन्य खाते में भेजी गई या निकाली गई।
फर्जी कॉल और ई-मेल की जांच पर फोकस
पूरे घटनाक्रम में फोन कॉल और ई-मेल अहम भूमिका में बताए जा रहे हैं। ऐसे में जांच के दौरान आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संपर्क करने वाले लोगों ने कंपनी से जुड़ी पहचान को किस तरह पेश किया और बैंक अधिकारी को भरोसे में लेने के लिए किन दस्तावेजों या जानकारियों का इस्तेमाल किया।
जांच में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपियों ने संबंधित कंपनी का केवल नाम इस्तेमाल किया था या कंपनी से मिलते-जुलते ई-मेल अथवा अन्य डिजिटल माध्यम तैयार किए थे। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही ठगी के तरीके और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
तेलीबांधा थाने में शिकायत, पुलिस ने शुरू की जांच
कथित धोखाधड़ी सामने आने के बाद बैंक मैनेजर ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के सामने आरोपियों की पहचान करने के साथ रकम के ट्रांजेक्शन की पूरी कड़ी तलाशने की चुनौती है। बैंक खाते के रिकॉर्ड के अलावा कॉल और ई-मेल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच के जरिए आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
यह भी जांच का विषय हो सकता है कि इसी तरीके से किसी अन्य बैंक अधिकारी, कारोबारी या संस्था से संपर्क किया गया था या नहीं। यदि एक ही बैंक खाते, फोन नंबर या ई-मेल का इस्तेमाल अन्य मामलों में भी हुआ है तो उससे कथित साइबर गिरोह के नेटवर्क की जानकारी सामने आ सकती है।
बड़ी FD का प्रस्ताव बना भरोसा जीतने का जरिया
इस मामले में कथित साइबर ठगी का तरीका सामान्य ऑनलाइन फ्रॉड से थोड़ा अलग दिखाई देता है। यहां शुरुआत किसी OTP, लिंक या लॉटरी के लालच से नहीं, बल्कि एक बड़े बैंकिंग कारोबार के प्रस्ताव से हुई।
करीब 2 करोड़ रुपए की FD कराने की बात कर पहले एक संभावित ग्राहक और बैंक अधिकारी के बीच कारोबारी संवाद जैसी स्थिति तैयार की गई। इसके बाद अचानक मेडिकल जरूरत बताकर भुगतान कराने का प्रयास किया गया। इस तरह पहले भरोसा पैदा करना और बाद में तत्काल भुगतान का दबाव बनाना साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाली सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति हो सकती है।
हालांकि पूरे घटनाक्रम और आरोपियों द्वारा अपनाए गए वास्तविक तरीके की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी।
कॉर्पोरेट पहचान की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी
यह मामला बैंकिंग और कारोबारी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी सतर्कता का संदेश देता है। किसी बड़ी कंपनी, संस्था या कारोबारी समूह के नाम से फोन या ई-मेल आने पर केवल भेजी गई जानकारी के आधार पर भरोसा करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
किसी भी बड़े FD प्रस्ताव, निवेश या कॉर्पोरेट लेन-देन से पहले संबंधित कंपनी की पहचान स्वतंत्र माध्यम से सत्यापित करना जरूरी है। खासतौर पर जब नियमित प्रक्रिया से हटकर किसी निजी, मेडिकल या अन्य कारण से तत्काल दूसरे खाते में भुगतान करने के लिए कहा जाए तो अतिरिक्त सावधानी बरतना आवश्यक है।
कंपनी के आधिकारिक संपर्क माध्यम से संबंधित अधिकारी की पहचान की पुष्टि, ई-मेल डोमेन की जांच और भुगतान प्राप्त करने वाले बैंक खाते के नाम का सत्यापन संभावित धोखाधड़ी से बचने में मदद कर सकता है।
साइबर ठगी के नए तरीकों ने बढ़ाई चुनौती
ऑनलाइन ठगी के मामलों में अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। कभी सरकारी अधिकारी बनकर, कभी बैंक प्रतिनिधि और कभी किसी प्रतिष्ठित कंपनी से जुड़े व्यक्ति के रूप में संपर्क कर लोगों को भरोसे में लेने की कोशिश की जाती है।
रायपुर में सामने आया यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक बैंक अधिकारी को निशाना बनाए जाने का आरोप है। इससे संकेत मिलता है कि पेशेवर अनुभव रखने वाले लोगों को भी योजनाबद्ध सोशल इंजीनियरिंग के जरिए भ्रमित करने की कोशिश की जा सकती है।
फिलहाल तेलीबांधा पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। 4.99 लाख रुपए जिस खाते में भेजे गए, उससे जुड़े बैंक रिकॉर्ड और आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए डिजिटल माध्यमों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित साइबर ठगी के पीछे कौन लोग थे और रकम कहां पहुंची।
