Rahul Gandhi on Voter List: ‘वोट चोरी से बनी सरकार के लिए जनता जरूरी नहीं’, वोटर लिस्ट से नाम हटने के मुद्दे पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला
दिल्ली और महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल, मतदाताओं के नाम हटाए जाने को फिर बताया ‘वोट चोरी’
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। दिल्ली और महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि करीब 2 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इसे लेकर उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे कथित ‘वोट चोरी’ से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा।
राहुल गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक मतदाता और उसका वोट महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाया जाना गंभीर मामला है और इसकी पारदर्शी तरीके से जांच तथा जवाबदेही जरूरी है।
‘जनता जरूरी नहीं’ कहकर साधा निशाना
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर हमला करते हुए कहा, “वोट चोरी से बनी सरकार के लिए जनता जरूरी नहीं।” उन्होंने दिल्ली और महाराष्ट्र की मतदाता सूचियों का हवाला देते हुए मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल खड़े किए।
राहुल गांधी पिछले कुछ समय से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने इससे पहले भी अलग-अलग राज्यों के चुनावों का उल्लेख करते हुए ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया था।
दिल्ली-महाराष्ट्र की वोटर लिस्ट पर सवाल
राहुल गांधी ने दिल्ली और महाराष्ट्र में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया है। उनका दावा है कि दोनों जगह मिलाकर करीब 2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
कांग्रेस नेता ने इसे केवल आंकड़ों का मामला नहीं बल्कि मताधिकार से जुड़ा विषय बताया है। उनका कहना है कि मतदाता सूची से किसी भी पात्र नागरिक का नाम हटने की स्थिति में उसे अपना पक्ष रखने और नाम जुड़वाने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
‘वोट चोरी’ का आरोप फिर दोहराया
राहुल गांधी चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठा चुके हैं। हालिया बयान में उन्होंने एक बार फिर ‘वोट चोरी’ शब्द का इस्तेमाल किया।
हालांकि राहुल गांधी की ओर से लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोप राजनीतिक दावे हैं। मतदाता सूची के संशोधन के दौरान नाम जोड़ने, हटाने और विवरण में सुधार की प्रक्रिया चुनावी नियमों के तहत होती है। ऐसे में ड्राफ्ट मतदाता सूची में बदलाव और अंतिम मतदाता सूची के आंकड़ों के बीच अंतर हो सकता है।
मतदाता सूची को लेकर सियासत तेज
वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का मुद्दा सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। विपक्ष मतदाता सूची की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है, जबकि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मामलों में निर्वाचन आयोग की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है।
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और उनमें होने वाले बदलावों को लेकर राजनीतिक दल लगातार नजर बनाए हुए हैं।
चुनावी प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे राहुल गांधी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी कई मौकों पर चुनावी व्यवस्था, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उनका आरोप रहा है कि मतदाता सूची में होने वाले बदलावों का सीधा प्रभाव चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस भी इस मुद्दे को लगातार राजनीतिक मंचों पर उठा रही है। पार्टी का कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से नहीं हटना चाहिए और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
अंतिम मतदाता सूची पर रहेगी नजर
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट अंतिम मतदाता सूची नहीं होती। ड्राफ्ट जारी होने के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज कराने तथा पात्र मतदाताओं को नाम जुड़वाने या विवरण में सुधार कराने का अवसर मिलता है। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है।
ऐसे में राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दे के बीच अब नजर इस बात पर रहेगी कि अंतिम मतदाता सूची में कितने मतदाताओं के नाम शामिल होते हैं और राजनीतिक दल इस मुद्दे को आगे किस तरह उठाते हैं।
फिलहाल राहुल गांधी के बयान के बाद मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
