राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी ने उप नेता पद से हटा दिया है। जानिए क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला, कौन हैं नए उपनेता अशोक मित्तल, और दिल्ली-पंजाब की राजनीति पर क्या होगा असर। पूरी खबर पढ़ें।
आम आदमी पार्टी का बड़ा एक्शन: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उप नेता पद से हटाया गया
राघव चड्ढा को हटाकर आम आदमी पार्टी ने अशोक मित्तल को राज्यसभा में अपना नया उपनेता बनाया है, जिससे दिल्ली की सियासत गरमा गई है।
बड़ा फैसला: राघव चड्ढा हुए बर्खास्त
नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2026 – आम आदमी पार्टी (AAP) ने आज अपने राज्यसभा सांसद और युवा चेहरे राघव चड्ढा को पार्टी के राज्यसभा उपनेता के पद से हटाने का ऐलान किया। यह कदम पार्टी के भीतर बढ़ती अंतर्कलह और अनुशासनहीनता के बीच उठाया गया माना जा रहा है। राघव चड्ढा, जो पिछले कई महीनों से पार्टी के सबसे तेज तर्रार और युवा नेताओं में गिने जाते थे, अब सिर्फ एक साधारण सांसद के रूप में रह जाएंगे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक में लिया गया। बैठक में राघव चड्ढा के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों और लगातार पार्टी लाइन से बाहर जाकर बयानबाजी करने के आरोप लगे। हालांकि, आधिकारिक तौर पर पार्टी ने इस बदलाव के पीछे “नई जिम्मेदारियों” और “संगठनात्मक पुनर्गठन” का हवाला दिया है।
क्यों उठाया गया यह कदम?
हालांकि पार्टी ने कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन करीबी सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा का पिछले कुछ समय से पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से मतभेद चल रहा था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के शराब घोटाला मामले में उनके नाम के आने के बाद से ही पार्टी उनसे दूरी बनाने लगी थी। हालांकि, चड्ढा हमेशा से इस मामले में अपनी निर्दोषता का दावा करते रहे हैं।एक अन्य बड़ा कारण पंजाब में पार्टी की बिगड़ती स्थिति को भी माना जा रहा है। राघव चड्ढा, जो मूल रूप से पंजाबी हैं, पंजाब पार्टी इकाई में अपनी राय रखते थे, जो केजरीवाल के करीबी नेताओं को रास नहीं आई। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “पार्टी में कोई भी व्यक्ति नेता से बड़ा नहीं है। राघव को कई बार समझाया गया, लेकिन उन्होंने अपनी अलग राह अपनाने की कोशिश की।”
कौन हैं अशोक मित्तल? AAP के नए उपनेता
राघव चड्ढा की जगह अब अशोक मित्तल को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी का उपनेता बनाया गया है। अशोक मित्तल एक वरिष्ठ उद्योगपति और राजनीतिज्ञ हैं, जो 2018 में AAP में शामिल हुए थे। इससे पहले वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का हिस्सा थे। मित्तल को पार्टी का वफादार और संगठनात्मक रणनीतिकार माना जाता है।उनकी नियुक्ति को पार्टी के भीतर ‘सुरक्षित हाथों’ में कमान देने के रूप में देखा जा रहा है। अशोक मित्तल राज्यसभा में पार्टी की सभी रणनीतियों को अमलीजामा पहनाएंगे और संसदीय कार्यवाही में पार्टी की ओर से मुख्य भूमिका निभाएंगे।
राज्यसभा सचिवालय को सौंपा गया पत्र
इस बदलाव को आधिकारिक रूप देने के लिए आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक औपचारिक पत्र सौंपा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि राघव चड्ढा अब राज्यसभा में पार्टी के उपनेता नहीं रहेंगे और उनके स्थान पर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई है। पत्र में यह भी कहा गया है कि आगे चलकर सभी संसदीय रणनीतियों और बैठकों का नेतृत्व अशोक मित्तल करेंगे।यह पत्र उस वक्त आया है जब संसद का बजट सत्र चल रहा है और AAP कई मुद्दों पर सरकार को घेर रही है। ऐसे में नेतृत्व में यह बदलाव काफी अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक असर और संभावित कारण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम AAP के अंदर चल रही ‘बागी’ प्रवृत्ति को खत्म करने का एक प्रयास है। राघव चड्ढा, जो अपने करिश्माई व्यक्तित्व और मीडिया हैंडलिंग के लिए जाने जाते थे, उनकी गिरफ्तारी से बचने की रणनीति शायद पार्टी नेतृत्व को रास नहीं आई।
- आंतरिक लोकतंत्र का सवाल: इस फैसले ने एक बार फिर AAP में आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि पार्टी में केजरीवाल के विचारों के खिलाफ जाने वालों को हाशिए पर धकेल दिया जाता है।
- 2027 चुनावों पर असर: राघव चड्ढा जैसे युवा नेता को हटाने का असर पंजाब और दिल्ली में पार्टी के युवा वोट बैंक पर पड़ सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि चड्ढा अब पार्टी के खिलाफ बगावत करते हैं या चुप्पी साध लेते हैं।
- राघव चड्ढा की प्रतिक्रिया: अब तक राघव चड्ढा ने इस फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उम्मीद है कि वह जल्द ही सोशल मीडिया या प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी बात रख सकते हैं।

