उज्जैन जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग, राधा मालवीय ने कलेक्टर को सौंपा पत्र
किसानों एवं आमजन को शासकीय वसूली में राहत, ड्रिप सिंचाई के पात्र आवेदनों की स्वीकृति और जलाशयों में नर्मदा का पानी छोड़ने की मांग
नागदा। उज्जैन जिले में अल्पवर्षा की स्थिति को देखते हुए जिला पंचायत सदस्य राधा मालवीय ने सोमवार को उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम पत्र सौंपा। उन्होंने नागदा-खाचरौद सहित संपूर्ण उज्जैन जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने तथा किसानों एवं आमजन को शासकीय वसूली में राहत देने की मांग की। पत्र की प्रतिलिपि संभाग आयुक्त को भी दी गई है।
मालवीय ने पत्र में कम वर्षा के कारण जलस्रोतों में पर्याप्त जलभराव नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने आगामी दिनों में पेयजल और कृषि सिंचाई की संभावित समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से राहत संबंधी कदम उठाने का आग्रह किया। पत्र में ड्रिप सिंचाई योजना के पात्र आवेदनों को स्वीकृति देने और क्षेत्र के जलाशयों में नर्मदा का पानी उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है।
जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं होने की चिंता
मालवीय ने पत्र में कहा कि उज्जैन संभाग में इस वर्ष सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है। उनके अनुसार, कम बारिश के कारण नदी, नाले, तालाब, स्टॉप डेम एवं कुओं में पर्याप्त जलभराव नहीं हो पाया है। इससे आने वाले दिनों में पेयजल की उपलब्धता और कृषि कार्यों को लेकर परेशानी उत्पन्न होने की आशंका है।
उन्होंने मांग की कि अल्पवर्षा की स्थिति को प्रशासनिक अभिलेखों में दर्ज किया जाए तथा नागदा-खाचरौद सहित पूरे उज्जैन जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। पत्र में किसानों और आमजन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समय रहते निर्णय लेने का आग्रह किया गया है। विशेष रूप से आगामी रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई गई।
लॉटरी के बजाय सभी पात्र आवेदनों को मिले स्वीकृति
राधा मालवीय ने रबी फसल की सिंचाई के लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति योजना से संबंधित आवेदनों का विषय भी उठाया। उन्होंने मांग की कि आवेदनों को निर्धारित लक्ष्य अथवा लॉटरी के आधार पर सीमित करने के बजाय प्रत्येक पात्र आवेदन को शीघ्र स्वीकृति दी जाए।
उन्होंने कहा कि उपलब्ध जल संसाधनों के माध्यम से किसानों को रबी फसल की बुआई करने में सहायता मिलनी चाहिए। कम वर्षा की स्थिति में सिंचाई व्यवस्था का महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में पात्र किसानों के आवेदनों पर शीघ्र निर्णय लेने की जरूरत है, ताकि वे आगामी खेती की तैयारी कर सकें।
बागला डेम और बनबना तालाब में छोड़ा जाए पानी
पत्र में करोड़ों रुपये की लागत वाली कृषि सिंचाई परियोजनाओं का पानी क्षेत्र के जलाशयों तक पहुंचाने की मांग की गई है। मालवीय ने बागला डेम, बनबना तालाब तथा चंबल नदी के स्टॉप डेमों में नर्मदा का पानी छोड़ने का आग्रह किया।
उनके अनुसार, इन जलाशयों में पानी उपलब्ध कराने से भूजल स्तर बढ़ाने और कृषि सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कम वर्षा के कारण जलभराव की कमी को देखते हुए परियोजनाओं के पानी का उपयोग क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप करने की मांग रखी।
फसलों के नुकसान से आर्थिक परेशानी का उल्लेख
मालवीय ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से रबी एवं खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है। किसानों को उनकी उपज का लागत के अनुरूप मूल्य भी नहीं मिल पाया है। उन्होंने आशंका जताई कि इस वर्ष अल्पवर्षा के कारण रबी की खेती प्रभावित होने पर किसानों की आर्थिक परेशानी और बढ़ सकती है।
इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने किसानों एवं आमजन को शासकीय वसूली में राहत देने की मांग की। मुख्यमंत्री के नाम सौंपे पत्र में सूखाग्रस्त घोषणा, सिंचाई की व्यवस्था और आर्थिक राहत से जुड़े विषयों पर निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।
