Nitin Gadkari: पुणे में एक ही पिलर पर बनेंगे कई स्तर के फ्लाईओवर, सबसे ऊपर दौड़ेगी मेट्रो
ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए वर्टिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर, मलेशिया की तकनीक से कम जमीन में तैयार होंगे बहुस्तरीय मार्ग
पुणे। देश के बड़े शहरों में लगातार बढ़ते यातायात दबाव और जमीन की कमी से निपटने के लिए केंद्र सरकार अब वर्टिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि पुणे में एक ही पिलर पर कई स्तर की एलिवेटेड सड़कें बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। सबसे ऊपरी स्तर पर मेट्रो रेल चलाने का भी प्रावधान होगा।
इस व्यवस्था के अंतर्गत जमीन की सतह पर स्थानीय यातायात चलता रहेगा। उसके ऊपर अलग-अलग स्तर पर एलिवेटेड सड़कें बनाई जाएंगी, जबकि सबसे ऊपर मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जा सकेगा। एक ही पिलर प्रणाली का उपयोग होने से अलग-अलग सड़क और मेट्रो परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त जमीन लेने की आवश्यकता कम होगी।
गडकरी के अनुसार, भारत ने मलेशिया में इस्तेमाल होने वाली ऐसी तकनीक को अपनाया है, जिसकी सहायता से एक ही आधार अथवा पिलर पर बहुस्तरीय परिवहन ढांचा तैयार किया जा सकता है। पुणे जिले के तीन प्रमुख एलिवेटेड रोड कॉरिडोर में इस तकनीक के उपयोग की तैयारी होने की बात सामने आई है।
क्या है वर्टिकल इंफ्रास्ट्रक्चर?
सामान्य तौर पर सड़कों, फ्लाईओवर और मेट्रो लाइन के लिए अलग-अलग जगह की आवश्यकता होती है। घनी आबादी वाले शहरों में पर्याप्त जमीन मिलना मुश्किल होता है। जमीन अधिग्रहण के कारण परियोजनाओं की लागत बढ़ती है और निर्माण में भी लंबा समय लग सकता है।
वर्टिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में परिवहन के विभिन्न माध्यमों को जमीन पर एक-दूसरे के समानांतर फैलाने के बजाय अलग-अलग ऊंचाई पर विकसित किया जाता है। एक बहुस्तरीय कॉरिडोर में सबसे नीचे स्थानीय सड़क, उसके ऊपर एलिवेटेड मार्ग और सबसे ऊपरी स्तर पर मेट्रो लाइन हो सकती है।
इस डिजाइन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि कम जमीन में अधिक यातायात क्षमता विकसित की जा सकती है। एक ही पिलर और साझा आधारभूत संरचना होने से शहर की मौजूदा सड़क के ऊपर कई परिवहन स्तर तैयार किए जा सकते हैं।
पुणे की ट्रैफिक समस्या को देखते हुए योजना
पुणे तेजी से विकसित होने वाले शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों और बढ़ती आबादी के कारण यहां वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शहर की कई प्रमुख सड़कों पर व्यस्त समय के दौरान लंबे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है।
नई सड़क बनाने के लिए शहर के बीच पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मौजूदा सड़क के ऊपर एलिवेटेड मार्ग विकसित करना एक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है। बहुस्तरीय कॉरिडोर के माध्यम से स्थानीय और लंबी दूरी के यातायात को अलग-अलग स्तरों पर बांटा जा सकेगा।
स्थानीय वाहन जमीन की सतह वाली सड़क पर चलेंगे, जबकि एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक जाने वाले वाहनों के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर उपलब्ध होगा। सबसे ऊपर चलने वाली मेट्रो सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करेगी और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में सहायता कर सकती है।
एक पिलर पर कई परिवहन स्तर
इस तकनीक के अंतर्गत मजबूत आधार और विशेष डिजाइन वाले पिलर तैयार किए जाएंगे। इन्हीं पिलरों पर अलग-अलग ऊंचाई पर सड़क तथा मेट्रो का ढांचा स्थापित होगा। प्रत्येक स्तर को उसकी जरूरत और भार के अनुसार डिजाइन किया जाएगा।
सामान्य फ्लाईओवर और मेट्रो कॉरिडोर के लिए अलग-अलग पिलर बनाने से सड़क की चौड़ाई का बड़ा हिस्सा घिर जाता है। एकीकृत डिजाइन में पिलरों की संख्या और जमीन पर उनके फैलाव को कम किया जा सकता है। इससे मौजूदा सड़क पर वाहनों के लिए अधिक जगह उपलब्ध रह सकती है।
हालांकि, ऐसी संरचना के लिए अत्यधिक मजबूत डिजाइन, भूकंपरोधी तकनीक और विस्तृत सुरक्षा परीक्षण की आवश्यकता होगी। निर्माण से पहले मिट्टी की क्षमता, यातायात का दबाव, आसपास की इमारतों और भूमिगत उपयोगिता लाइनों का अध्ययन करना भी जरूरी होगा।
जमीन अधिग्रहण और परियोजना लागत में कमी की उम्मीद
शहरी सड़क परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती होती है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में निजी संपत्तियों का अधिग्रहण करना महंगा और समय लेने वाला हो सकता है। इससे परियोजनाओं के खिलाफ स्थानीय स्तर पर विरोध की स्थिति भी बन सकती है।
वर्टिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से मौजूदा सड़क क्षेत्र का उपयोग करते हुए अतिरिक्त यातायात क्षमता तैयार की जा सकती है। इससे जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता घटने और परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
एक ही पिलर एवं साझा निर्माण व्यवस्था के कारण अलग-अलग फ्लाईओवर और मेट्रो कॉरिडोर बनाने की तुलना में संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकता है। हालांकि, वास्तविक लागत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, इंजीनियरिंग डिजाइन और निर्माण संबंधी आवश्यकताओं के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुणे में पहले से मौजूद है डबल-डेकर कॉरिडोर
पुणे में गणेशखिंड रोड स्थित सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय चौक पर एकीकृत डबल-डेकर कॉरिडोर विकसित किया जा चुका है। इस परियोजना में सड़क यातायात और मेट्रो को एक ही कॉरिडोर में अलग-अलग स्तरों पर स्थान दिया गया है। मार्च 2026 में सड़क यातायात के लिए इसका उद्घाटन किया गया था। के अनुसार, इसका उद्देश्य पाषाण रोड, बाणेर रोड, औंध और शिवाजीनगर की ओर जाने वाले यातायात का दबाव कम करना है।
अब प्रस्तावित नई तकनीक इस व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए एक ही पिलर पर दो से अधिक परिवहन स्तर तैयार करने की संभावना प्रस्तुत करती है। इसके सफल होने पर पुणे के अन्य व्यस्त मार्गों पर भी ऐसे कॉरिडोर विकसित किए जा सकते हैं।
अन्य शहरों के लिए भी बन सकता है मॉडल
नितिन गडकरी ने महानगरों में ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए वर्टिकल निर्माण को भविष्य की आवश्यकता बताया है। पुणे में प्रस्तावित बहुस्तरीय कॉरिडोर सफल होता है तो मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद और अन्य घनी आबादी वाले शहरों में भी इस मॉडल का उपयोग किया जा सकता है।
हालांकि, परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव, निर्माण अवधि में यातायात प्रबंधन, सुरक्षा मानकों और रखरखाव की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। तकनीकी स्वीकृति और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के बाद ही इसके मार्ग, लागत तथा निर्माण समयसीमा की अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।
कुल मिलाकर, एक ही पिलर पर सड़क और मेट्रो के कई स्तर तैयार करने की योजना शहरों में सीमित जमीन के बेहतर उपयोग की दिशा में बड़ा कदम हो सकती है। इससे पुणे की यातायात व्यवस्था को नई क्षमता मिलने के साथ भविष्य की शहरी परिवहन परियोजनाओं के लिए एक नया मॉडल विकसित होने की उम्मीद है।
