डॉ. आचार्य श्री 108 प्रणाम सागर जी महाराज के सान्निध्य में भक्ति, साधना और संस्कार का अद्भुत संगम
पुणे, 9 अक्टूबर। अंतरराष्ट्रीय भक्तामर दिवस के अवसर पर धर्मनगरी पुणे में पंडित फार्म, कोथरूड में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ। विश्व संत, भक्तामर वाले बाबा, डॉ. आचार्य श्री 108 प्रणाम सागर जी महाराज के सान्निध्य में हजारों जैन श्रावक-श्राविकाओं ने एक साथ, एक स्वर में भक्तामर अनुष्ठान कर भक्ति, आस्था और सामूहिक साधना की अनूठी मिसाल पेश की। यह जानकारी प्रचार प्रमुख प्रवीण जैन ने दी।
9 अक्टूबर, 9 मिनट, 9 सेकंड: भक्ति का ऐतिहासिक संकल्प
आयोजन का सबसे खास क्षण वह रहा, जब 9 अक्टूबर को निर्धारित 9 मिनट 9 सेकंड के समय पर हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ भक्तामर अनुष्ठान किया। पूरा वातावरण भक्तामर के पवित्र मंत्रों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं की एकाग्रता, सामूहिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक ऊर्जा ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भक्तामर स्तोत्र के प्रति श्रद्धा, आत्मविश्वास, संस्कार और आध्यात्मिक जागरण का सामूहिक उद्घोष था।
आचार्य श्री का संदेश: साधक के जीवन में परिवर्तन की प्रेरणा
इस अवसर पर आचार्य श्री प्रणाम सागर जी महाराज ने एक प्रेरक उदाहरण के माध्यम से भक्तामर की महिमा समझाई। उन्होंने कहा कि जब कोई संत किसी पाषाण पर मंत्रों का न्यास और अंकन करता है, तो वही पाषाण परमात्मा की प्रतिमा के रूप में प्रतिष्ठित होने की दिशा में आगे बढ़ता है।
इसी तरह, जब कोई संत उपवास, साधना और आध्यात्मिक अनुशासन के साथ भक्तों को भक्तामर के विशेष काव्यों, मंत्रों और संस्कारों का ज्ञान देता है, तो वह साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक जागृति का आधार बन सकता है।
आचार्य श्री के संदेश का मूल भाव यही था कि सच्ची साधना केवल मंत्रोच्चार तक सीमित नहीं होती, वह जीवन में संस्कार, अनुशासन, श्रद्धा और आत्मकल्याण की भावना जगाती है।
भक्तामर साधना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास
आचार्य श्री के मार्गदर्शन में भक्तामर को केवल पाठ तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक जागरण, संस्कार निर्माण और आत्मकल्याण का संदेश समाज तक पहुंचाने का विशेष प्रयास किया जा रहा है।
पंडित फार्म, कोथरूड में आयोजित भक्तामर भक्त कल्याण महोत्सव ने भक्तामर साधना के प्रति समाज की सामूहिक आस्था और सहभागिता को नया आयाम दिया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और एक साथ अनुष्ठान में भागीदारी ने इस आयोजन को विशेष पहचान दी।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
आयोजन में राज्यसभा से जुड़े ललित गांधी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित जैन श्रावक और समाज के प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा और बढ़ाई।
लंबे समय तक याद रहेगा यह आयोजन
सामूहिक भक्तामर साधना, आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक एकता के लिए यह महोत्सव लंबे समय तक याद किया जाएगा। 9 अक्टूबर, 9 मिनट और 9 सेकंड का यह आध्यात्मिक संकल्प श्रद्धालुओं के लिए केवल एक आयोजन की स्मृति नहीं, बल्कि भक्ति, साधना और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा बनकर उभरा है।
पुणे की पावन धरा पर भक्तामर के मंत्रों से गूंजते इस वातावरण ने संदेश दिया कि जब श्रद्धा को साधना का साथ मिलता है, ज्ञान के साथ संस्कार जुड़ते हैं और समाज एक स्वर में धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ता है, तब ऐसे आयोजन जनमानस पर अमिट छाप छोड़ते हैं।
