Alirajpur में हजारों ग्रामीणों का प्रदर्शन, जमीन अधिग्रहण के विरोध में कलेक्टर कार्यालय घेरा
संवाददाता : खलील मंसूरी
महेश पटेल और जोबट विधायक सेना महेश पटेल के नेतृत्व में आंदोलन, एसडीएम-अपर कलेक्टर के बाद कलेक्टर ने जमीन पर बैठकर सुनी ग्रामीणों की बात
Alirajpur । जमीन अधिग्रहण, प्रस्तावित खनिज ब्लॉकों की प्रक्रिया और किसानों को खाद वितरण में आ रही परेशानियों को लेकर मंगलवार को Alirajpur में हजारों ग्रामीणों और किसानों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल एवं जोबट विधायक सेना महेश पटेल के नेतृत्व में आयोजित आंदोलन में Alirajpur -जोबट विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों के सरपंच, कांग्रेस प्रतिनिधि, जनपद प्रतिनिधि, किसान, ग्रामीण और बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।
आंदोलन की शुरुआत आलीराजपुर के रामदेव मंदिर परिसर में सभा के साथ हुई। सभा के बाद हजारों ग्रामीण और किसान हाथों में तख्तियां लेकर रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। इस दौरान ग्रामीण केंद्र एवं राज्य सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर नारे लगाते हुए आगे बढ़े।
तख्तियों और नारों से गूंजा क्षेत्र
रैली में ग्रामीणों के हाथों में “जल-जंगल-जमीन हमारा है”, “जमीन हमारी—फैसला हमारा”, “ग्राम सभा का निर्णय मानना होगा” और “जल-जंगल-जमीन बचाना है” जैसे संदेश लिखी तख्तियां थीं।
प्रदर्शन के दौरान “जय जोहार”, “जय आदिवासी”, “आदिवासी एकता जिंदाबाद”, “ग्राम सभा जिंदाबाद” और “लड़ेंगे-लड़ेंगे, हक के लिए लड़ेंगे” जैसे नारे लगाए गए। ग्रामीणों ने “जय जोहार का नारा है, भारत देश हमारा है” का उद्घोष करते हुए आदिवासी एकता का संदेश दिया।
एसडीएम और अपर कलेक्टर को ज्ञापन देने से किया इनकार
कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बाद आंदोलनकारियों से ज्ञापन लेने के लिए पहले एसडीएम मौके पर पहुंचे। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम को ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे अपनी मांगें और ग्राम सभा के प्रस्ताव सीधे कलेक्टर को सौंपेंगे।
इसके बाद अपर कलेक्टर भी प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे और ज्ञापन लेने का प्रयास किया, लेकिन आंदोलनकारियों ने उन्हें भी ज्ञापन देने से इनकार कर दिया।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगें सीधे कलेक्टर के सामने रखना चाहते हैं और ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्ताव भी उन्हीं को सौंपेंगे।
कलेक्टर ने जमीन पर बैठकर सुनी ग्रामीणों की बात
लगातार धरना-प्रदर्शन के बाद कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचीं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बीच जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनकी मांगों पर चर्चा की।
इस दौरान जमीन अधिग्रहण और प्रस्तावित खनिज ब्लॉकों से संबंधित प्रक्रिया को लेकर प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच विस्तार से बातचीत हुई।
सरकारों की ओर से पत्र जारी होने की जानकारी
चर्चा के दौरान प्रशासन की ओर से बताया गया कि भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार की ओर से संबंधित पत्र जारी हुए हैं। इन्हीं पत्रों के आधार पर प्रशासन द्वारा ग्राम सभाओं से प्रस्ताव मांगे गए थे।
कलेक्टर ने बताया कि अब आंदोलनकारियों द्वारा सौंपे गए ग्राम सभा के प्रस्तावों में जमीन नहीं देने का निर्णय दर्ज है। इन प्रस्तावों से शासन के उच्च स्तर को अवगत कराया जाएगा।
तीन पंचायतों के प्रस्ताव सौंपे
ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन के साथ सेमलाया पंचायत, मोटाउमर पंचायत और जुवारी पंचायत की ग्राम सभाओं द्वारा पारित प्रस्ताव भी सौंपे।
इन प्रस्तावों में ग्राम सभाओं द्वारा जमीन अधिग्रहण के खिलाफ निर्णय लेने और जमीन नहीं देने की बात कही गई है। ग्रामीणों ने मांग की कि इन प्रस्तावों को प्रशासनिक रिकॉर्ड में शामिल किया जाए और ग्राम सभा के निर्णय का सम्मान किया जाए।
सेना महेश पटेल ने कहा—ग्राम सभा के अधिकारों से समझौता नहीं
जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज के जीवन, संस्कृति और पहचान का आधार हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए और ग्रामीणों की सहमति के बिना उनकी जमीन से संबंधित कोई निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।
विधायक ने कहा कि आंदोलन के दौरान प्रशासन ने स्वयं स्पष्ट किया है कि संबंधित पत्र सरकारों की ओर से जारी हुए हैं और इन्हीं के आधार पर ग्राम सभाओं से प्रस्ताव मांगे गए थे। अब ग्राम सभाओं ने जमीन नहीं देने के प्रस्ताव प्रशासन को सौंप दिए हैं। प्रशासन को इन प्रस्तावों से शासन को अवगत कराना चाहिए।
महेश पटेल बोले—जल, जंगल और जमीन हमारी मां है
आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने कहा कि ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने एकमत होकर अपनी जमीन नहीं देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा, “जल, जंगल और जमीन हमारी मां है। ग्राम सभा के निर्णय और आदिवासी समाज के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। हम अपनी जमीन किसी को नहीं देंगे और अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।”
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि आदिवासी क्षेत्रों में जमीन और खनिज से संबंधित किसी भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले ग्राम सभा के अधिकारों और पेसा कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
खाद की समस्या भी बनी प्रमुख मुद्दा
धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों ने खाद वितरण की समस्या को लेकर भी आवाज उठाई। किसानों ने टोकन व्यवस्था समाप्त करने, आधार एवं खसरा नकल के आधार पर आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने और पर्याप्त मात्रा में खाद की व्यवस्था करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि खाद लेने के लिए किसानों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए और वितरण व्यवस्था को सरल एवं सुगम बनाया जाना चाहिए।

मांगों पर कार्रवाई तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान
महेश पटेल और जोबट विधायक सेना महेश पटेल के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में हजारों ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के सामने आवाज बुलंद की।
हाथों में तख्तियां, नारों और ग्राम सभा के प्रस्तावों के साथ ग्रामीणों ने स्पष्ट संदेश दिया कि जल, जंगल, जमीन, किसान और ग्राम सभा के अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर द्वारा ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी बात सुनने और ग्राम सभाओं से प्राप्त “जमीन नहीं देने” के प्रस्तावों से शासन के उच्च स्तर को अवगत कराने की बात कही गई। इसके बाद भी आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
