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Delhi का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने का प्रस्ताव, BJP नेता ने अमित शाह को लिखा पत्र

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Published On: 27 February 2026
Proposal to Rename Delhi as ‘Indraprastha’; BJP Leader Writes to Home Minister Amit Shah
— Proposal to Rename Delhi as ‘Indraprastha’; BJP Leader Writes to Home Minister Amit Shah

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Delhi का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग तेज, केंद्रीय गृह मंत्री को भेजा गया प्रस्ताव

देश की राजधानी Delhi का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग ने एक बार फिर राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस को जन्म दे दिया है। हाल ही में केरल का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद देशभर में शहरों और राज्यों के नामों को उनके प्राचीन या सांस्कृतिक स्वरूप में लौटाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी क्रम में अब दिल्ली का नाम बदलने की मांग सामने आई है।

प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने का औपचारिक प्रस्ताव दिया है।

‘Delhi’ की जगह ‘इंद्रप्रस्थ’ क्यों?

प्रवीण खंडेलवाल ने अपने पत्र में तर्क दिया कि ‘दिल्ली’ नाम मध्यकालीन और औपनिवेशिक प्रभावों से जुड़ा हुआ है, जबकि ‘इंद्रप्रस्थ’ भारत की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक है। उनका कहना है कि देश की राजधानी का नाम ऐसा होना चाहिए जो भारत की हजारों वर्षों पुरानी विरासत और सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाए।

उन्होंने यह भी कहा कि जब अन्य शहरों और राज्यों के नाम बदले जा सकते हैं, तो दिल्ली के संदर्भ में भी इस विषय पर गंभीर विचार होना चाहिए।

महाभारत काल से जुड़ा है ‘इंद्रप्रस्थ’

भारतीय पौराणिक ग्रंथ महाभारत के अनुसार इंद्रप्रस्थ पांडवों की राजधानी थी। कथा के मुताबिक पांडवों ने खांडवप्रस्थ नामक वन क्षेत्र को साफ कर एक भव्य नगर बसाया था, जिसे इंद्रप्रस्थ कहा गया। यह नगर अत्यंत समृद्ध, योजनाबद्ध और वैभवशाली बताया गया है।

कई इतिहासकारों और पुरातत्वविदों का मानना है कि वर्तमान दिल्ली का भूगोल प्राचीन इंद्रप्रस्थ से मेल खाता है। पुराना किला क्षेत्र में हुई खुदाइयों में ऐसे पुरातात्विक अवशेष मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि इस इलाके में हजारों वर्षों से मानव बस्तियां मौजूद थीं।

हालांकि, यह भी सच है कि आधुनिक दिल्ली को सीधे तौर पर इंद्रप्रस्थ घोषित करने के लिए ठोस और निर्विवाद ऐतिहासिक प्रमाण अब तक उपलब्ध नहीं हैं। यह विषय आज भी इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के बीच बहस का मुद्दा बना हुआ है।

Delhi के नाम का ऐतिहासिक विकास

Delhi का इतिहास कई परतों में बंटा हुआ है। इस शहर को अलग-अलग कालखंडों में बसाया, उजाड़ा और फिर से बसाया गया। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि दिल्ली के कई नाम रहे हैं, जिनमें इंद्रप्रस्थ, दिल्लिका, दहली, तुगलकाबाद, शाहजहानाबाद और नई दिल्ली शामिल हैं।

मुगल काल में शाहजहानाबाद के रूप में यह शहर प्रसिद्ध हुआ। ब्रिटिश शासन के दौरान 1911 में राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित किया गया और ‘नई दिल्ली’ का निर्माण किया गया। धीरे-धीरे ‘दिल्ली’ नाम सबसे व्यापक और आधिकारिक पहचान बन गया।

इस ऐतिहासिक क्रम से स्पष्ट है कि दिल्ली का नाम समय-समय पर सत्ता और शासन के अनुसार बदलता रहा है।

नाम बदलने के अन्य उदाहरण

भारत में शहरों और राज्यों के नाम बदलने का चलन नया नहीं है। पिछले कुछ दशकों में कई बड़े शहरों के नाम बदले गए हैं, ताकि उनकी स्थानीय या ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित किया जा सके।

उदाहरण के तौर पर:

  • मुंबई (पूर्व में बॉम्बे)
  • कोलकाता (पूर्व में कलकत्ता)
  • चेन्नई (पूर्व में मद्रास)
  • प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद)

इन बदलावों के समर्थकों का कहना है कि इससे स्थानीय संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान को मजबूती मिलती है। वहीं आलोचकों का तर्क है कि नाम बदलने से प्रशासनिक खर्च बढ़ता है और इससे जुड़े दस्तावेजों, नक्शों और आधिकारिक रिकॉर्ड में व्यापक बदलाव करने पड़ते हैं।

राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस

Delhi का नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ करने का प्रस्ताव केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। एक पक्ष का मानना है कि राजधानी का नाम भारत की प्राचीन विरासत से जुड़ा होना चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष इसे प्रतीकात्मक राजनीति मानता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी राज्य या शहर का नाम बदलने की प्रक्रिया में राज्य सरकार की सिफारिश, विधानसभा में प्रस्ताव पारित होना और केंद्र सरकार की मंजूरी शामिल होती है। अंततः संसद की स्वीकृति भी आवश्यक होती है।

आगे क्या?

फिलहाल यह प्रस्ताव प्रारंभिक स्तर पर है। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस पर क्या रुख अपनाता है, यह देखना बाकी है। यदि इस दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू होती है, तो यह एक लंबी प्रशासनिक और राजनीतिक प्रक्रिया होगी।

Delhi का नाम ‘इंद्रप्रस्थ’ किया जाए या नहीं, यह भविष्य तय करेगा, लेकिन इतना तय है कि इस प्रस्ताव ने इतिहास, संस्कृति और पहचान को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

राजधानी का नाम बदलना केवल शब्दों का बदलाव नहीं होगा, बल्कि यह भारत की ऐतिहासिक स्मृति और आधुनिक पहचान के बीच संतुलन का प्रश्न भी होगा।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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