हजरत मोहम्मद (सल्ल.) की जिंदगी दुनिया को अमन, इंसाफ और कमजोरों की मदद का पैगाम देती है: मौलाना यूनुस
सवांददाता : मनोज कुमार पुष्पद
पड़ाना की शाही जामा मस्जिद में हुआ अजीमुश्शान जलसा सीरतुन्नबी, बड़ी संख्या में अकीदतमंद हुए शामिल
सारंगपुर। कस्बा पड़ाना की शाही जामा मस्जिद में बुधवार रात पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा (सल्ल.) की सीरत और शिक्षाओं को समर्पित ‘अजीमुश्शान जलसा सीरतुन्नबी’ का भव्य आयोजन किया गया। ईशा की नमाज के बाद रात करीब 9 बजे शुरू हुए इस धार्मिक कार्यक्रम में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में उलेमा-ए-किराम, सामाजिक हस्तियां, अंजुमन कमेटी के पदाधिकारी और अकीदतमंद शामिल हुए। जलसे का समापन रात करीब 12 बजे देश में अमन, चैन, भाईचारे और खुशहाली की विशेष दुआ के साथ हुआ।
सीरत-ए-पाक और तालीमात पर डाला प्रकाश
अंजुमन कमेटी के सदर एडवोकेट अनवर अंसारी और मोहम्मद अकरम अंसारी ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद मुस्तफा (सल्ल.) की मुबारक जिंदगी, उनके अखलाक, किरदार और तालीमात से लोगों को रूबरू कराना था। कार्यक्रम की सरपरस्ती और निजामत पड़ाना के उलमा-ए-किराम द्वारा संयुक्त रूप से की गई।
जलसे में पीथमपुर स्थित जामिया इस्लामिया बंजारी के उस्ताद-ए-हदीस एवं मुफस्सिर-ए-कुरआन हजरत मौलाना मोहम्मद यूनुस साहब कासमी तथा हजरत मौलाना गुफरान साहब मजाहिरी मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे।
अमन, भाईचारे और इंसाफ का दिया संदेश
मुख्य वक्ता मौलाना मोहम्मद यूनुस साहब कासमी ने अपने संबोधन में पैगंबर-ए-इस्लाम की सीरत-ए-पाक के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद (सल्ल.) की जिंदगी पूरी इंसानियत के लिए बेहतरीन नमूना और हिदायत का जरिया है। उनकी शिक्षाएं समाज में अमन, भाईचारा, सच्चाई, इंसाफ और जरूरतमंद एवं कमजोर लोगों की मदद करने की प्रेरणा देती हैं।
मौलाना यूनुस ने कहा कि आज के दौर में समाज को ऐसी शिक्षाओं की सबसे अधिक जरूरत है, जो लोगों को एक-दूसरे के करीब लाएं और आपसी नफरत एवं दूरियों को खत्म करें। उन्होंने युवाओं से शिक्षा हासिल करने, अच्छे आचरण को अपनाने और नबी-ए-करीम की सुन्नतों पर अमल करने की अपील की।
माता-पिता और पड़ोसियों के अधिकारों पर जोर
हजरत मौलाना गुफरान साहब मजाहिरी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय की अनेक सामाजिक समस्याओं का समाधान पैगंबर-ए-करीम की शिक्षाओं में मौजूद है। उन्होंने कहा कि इंसान को अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए और पड़ोसियों के अधिकारों का भी पूरा ख्याल रखना चाहिए।
उन्होंने समाज में आपसी सद्भाव, प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि धार्मिक शिक्षाओं का वास्तविक उद्देश्य इंसान के आचरण को बेहतर बनाना और समाज में भलाई को बढ़ावा देना है।
नात-ए-पाक से गूंजा माहौल
जलसे के दौरान नात-ख्वानों ने नबी-ए-करीम की शान में एक से बढ़कर एक खूबसूरत नात-ए-पाक पेश की। नातों की प्रस्तुति से पूरी शाही जामा मस्जिद का माहौल रूहानी हो गया। अकीदतमंदों ने भी पूरे अदब और एहतराम के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने लोगों से धार्मिक शिक्षाओं को केवल सुनने तक सीमित नहीं रखने, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन और व्यवहार में उतारने की अपील की।
देश में अमन और खुशहाली के लिए हुई दुआ
रात करीब 12 बजे जलसे का समापन हुआ। इस अवसर पर मुल्क में अमन-चैन, आपसी भाईचारे, तरक्की, खुशहाली और शांति के लिए विशेष दुआ की गई। लोगों ने देश और समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने तथा एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करने का संकल्प भी व्यक्त किया।
आयोजकों ने जताया आभार
अंजुमन कमेटी के पदाधिकारियों ने जलसे में शामिल होने वाले सभी उलमा-ए-किराम, मेहमानों, अकीदतमंदों और सहयोग करने वाले युवाओं का आभार व्यक्त किया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज को सकारात्मक संदेश देना और पैगंबर-ए-करीम की शिक्षाओं से लोगों को प्रेरित करना है।
जलसे को सफल बनाने में अंजुमन कमेटी के सदस्यों, स्थानीय युवाओं और पड़ाना के अकीदतमंदों का विशेष योगदान रहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान शाही जामा मस्जिद में श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
