मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर सरकार की गाइडलाइन लागू है, लेकिन किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर स्पष्ट नियम नहीं होने से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है। जानिए पूरी खबर।
निजी स्कूलों की फीस पर सख्ती, लेकिन किताबों और यूनिफॉर्म पर नहीं गाइडलाइन, अभिभावकों की बढ़ी चिंता
पड़ाना। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों सहित प्रदेशभर के अभिभावकों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। निजी विद्यालयों की फीस वृद्धि पर सरकार ने गाइडलाइन तय कर दी है, लेकिन किताबों और स्कूल यूनिफॉर्म को लेकर अब भी स्पष्ट नियम नहीं होने से अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावकों का कहना है कि कई निजी विद्यालय एनसीईआरटी (NCERT) पुस्तकों के साथ अन्य निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें भी अनिवार्य कर रहे हैं। वहीं अलग-अलग प्रकार की स्कूल यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव भी बनाया जाता है, जिससे शिक्षा का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
अभिभावक प्रद्युम्न परमार, महेंद्र भुरु परमार, पुरुषोत्तम पाटीदार, संतोष सैन, रामबाबू परमार, धीरज सेन, सोहन सिरोलिया तथा कांग्रेस जिला अध्यक्ष रामबाबू सेन सहित अन्य लोगों ने सरकार से पुस्तकों और यूनिफॉर्म के लिए भी स्पष्ट गाइडलाइन लागू करने की मांग की है।
फीस वृद्धि के लिए तय हैं नियम
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार निजी विद्यालयों की फीस वृद्धि के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
- फीस वृद्धि की जानकारी डीईओ कार्यालय में निर्धारित प्रारूप (3-1) में देना अनिवार्य है।
- 10 से 15 प्रतिशत तक फीस वृद्धि के लिए जिला शिक्षा कार्यालय एवं कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति से अनुमति आवश्यक होगी।
- 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय समिति से स्वीकृति लेना अनिवार्य रहेगा।
वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी
स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार निजी विद्यालयों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट एवं विद्यालय के सूचना बोर्ड पर निम्न जानकारी प्रदर्शित करनी होगी—
- प्रवेश शुल्क
- वार्षिक फीस
- यूनिफॉर्म की जानकारी
- पुस्तकों की सूची
- अन्य शुल्क
साथ ही किसी भी अभिभावक को किसी निर्धारित दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
किताबों को लेकर नहीं हैं सख्त निर्देश
हालांकि विभाग ने एनसीईआरटी पुस्तकों के संचालन के निर्देश दिए हैं, लेकिन अन्य निजी प्रकाशकों की पुस्तकों पर कोई स्पष्ट रोक नहीं है। इसी का लाभ उठाकर कई निजी विद्यालय महंगी किताबें संचालित कर रहे हैं। कई स्कूल पुस्तकों की मूल्य सूची भी सार्वजनिक नहीं करते, जिससे अभिभावकों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
बीएल वर्मा (बीएसी, सारंगपुर) के अनुसार फीस निर्धारण को लेकर सख्त गाइडलाइन लागू है। यदि कोई विद्यालय किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाता है तो शिकायत मिलने पर संबंधित विद्यालय के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
