गुरु मां विन्ध्यश्री माताजी के सानिध्य में प्रतिष्ठा शिरोमणि कार्यशाला का समापन
200 से अधिक विद्वानों ने किया शास्त्रों का मंथन, विद्वानों को दी गई प्रतिष्ठा शिरोमणि की उपाधि
घुवारा। परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 विन्ध्यश्री माताजी के सानिध्य में आयोजित प्रतिष्ठा शिरोमणि कार्यशाला का समापन धार्मिक एवं विद्वतापूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिवस प्राचीन जैन परंपराओं, प्रतिष्ठा विधियों और निर्वाण कल्याणक से संबंधित विषयों पर विद्वानों ने गहन मंथन किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए करीब 200 विद्वानों ने सहभागिता की।
शांतिनाथ भगवान का अभिषेक और शांतिधारा
कार्यशाला के अंतिम दिवस 1650 वर्ष प्राचीन अतिशयकारी शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा पर नित्य अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया। इसके पश्चात कार्यशाला के अंतिम सत्र में श्री विहार, वस्त्र उत्सव एवं निर्वाण भक्ति सहित विभिन्न धार्मिक विधियों और परंपराओं पर प्राचीन शास्त्रों के आधार पर चर्चा की गई।
विद्वानों के मंथन के दौरान विभिन्न विधियों के प्रमाण सामने आए। साथ ही कुछ प्राचीन विधियों के वर्तमान समय में लुप्त होने की जानकारी भी सामने आई। चर्चा में यह बात विशेष रूप से सामने आई कि आचार्य नेमीचंद्र सिद्धांत चक्रवर्ती आचार्य भगवान द्वारा निर्वाण कल्याणक की विधि का उल्लेख किया गया है। दक्षिण भारत से प्राप्त नौवीं शताब्दी के ताड़पत्रों पर हाले कन्नड़ एवं संस्कृत भाषा से संबंधित शोध भी जारी होने की जानकारी दी गई।

विन्ध्यश्री माताजी ने आयोजन की सराहना की
परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 विन्ध्यश्री माताजी ने अपने उद्बोधन में कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में प्रचलित कुरीतियों और गलत धारणाओं पर से पर्दा हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ज्ञानवर्धक आयोजन निरंतर होते रहना चाहिए।
उन्होंने इस बात को भी विशेष उपलब्धि बताया कि जिन विद्वानों को आमंत्रित करने में लाखों रुपये का खर्च आता है, वे सभी एक स्थान पर एकत्र होकर ज्ञान के इस कुंभ में शास्त्रों का मंथन करने पहुंचे।
विद्वानों को प्रदान की गई उपाधियां
कार्यशाला में पंडित भागचंद जी धरियाबाद, ब.ब्रा. शोभित भैयाजी मदवाड़ा, मुकेश जी विनम्र, ब.ब्रा. आशीष भैया पुण्यांश भोपाल, संदीप उपाध्ये संभाजीनगर, अनिल जी अकोला, विनोद पगारिया, नितिन जी देंदू और शैलेश जी मँगीतूँगी सहित अन्य विद्वानों को ‘प्रतिष्ठा शिरोमणि’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।
अन्य विद्वानों को ‘प्रतिष्ठा शिरोमणि प्रशिक्षु’ की उपाधि से सुशोभित किया गया। उपस्थित विद्वानों ने पंडित महेश जी कारीटोरन/दिमापुर को ‘पंडित चक्रवर्ती’ की उपाधि प्रदान किए जाने का प्रस्ताव रखा। इसके लिए उपस्थित विद्वानों ने हस्ताक्षरयुक्त पत्र के माध्यम से प्रस्ताव तैयार किया, जिसे आचार्य विशुद्ध सागर जी के चरणों में होने वाली आगामी कार्यशाला में प्रस्तुत किया जाएगा।

प्रतिष्ठाचार्यों और आयोजकों का सम्मान
कार्यशाला के मुख्य बिम्ब प्रतिष्ठाचार्य अखिलेश जी शास्त्री रमगड़ा तथा नवोदित प्रतिष्ठाचार्य आयुष जी मोतीवाला जबलपुर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनका सम्मान किया गया। कुलपति महेंद्र पंडित जी मुरैना एवं संयोजक अरुण भैया जी शुद्धश भोपाल का भी सम्मान प्रस्तुत किया गया।
रायपुर में राष्ट्रीय जैन पत्रकार सम्मेलन का आमंत्रण
कार्यक्रम के दौरान आगामी 30 सितंबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय जैन पत्रकार सम्मेलन का आमंत्रण परम पूज्य गुरु मां विन्ध्यश्री माताजी को भेंट किया गया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
देशभर से आए विद्वानों में मौजूद संपादकों, लेखकों तथा मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ-साथ बुंदेलखंड क्षेत्र के जैन पत्रकारों को भी सम्मेलन में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया। सम्मेलन के बुंदेलखंड क्षेत्र प्रभारी एवं पत्रकार भरत सेठ घुवारा ने सभी से रायपुर पहुंचकर राष्ट्रीय जैन पत्रकार सम्मेलन को सफल बनाने का आग्रह किया।

