बुंदेलखंड के प्रसिद्ध जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला के तीसरे दिन याग मंडल विधि के साथ चार सत्र संपन्न हुए। देशभर के 100 से अधिक विद्वानों ने प्राचीन प्रतिष्ठा ग्रंथों का सामूहिक वाचन और मंथन किया।
प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला का भव्य तीसरा दिन: 20+ ग्रंथों का आगम सम्मत वाचन, 100 से अधिक विद्वानों का मंथन
याग मंडल विधि के साथ तृतीय दिवस की कार्यशाला संपन्न, प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ के परिमार्जन और प्रामाणिक स्वरूप को लेकर हुआ गहन मंथन
घुवारा। प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला के तृतीय दिवस पर बुंदेलखंड के सुप्रसिद्ध जैन अतिशय क्षेत्र कारीटोरन, जिला ललितपुर, उत्तर प्रदेश में याग मंडल विधि के साथ चारों सत्र व्यवस्थित एवं सुचारू रूप से संपन्न हुए। इस दौरान प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ के साथ लगभग 20 ग्रंथों का आगम सम्मत वाचन किया गया। देशभर से पहुंचे शताधिक विद्वानों ने विभिन्न सत्रों में भाग लेकर गहन स्वाध्याय एवं विचार-मंथन किया।
कार्यशाला मुख्य संयोजक ज्योति भूषण, प्रतिष्ठाचार्य, प्रतिष्ठा मार्तण्ड, प्रतिष्ठा शिरोमणि, विधि विशारद पं. महेश कुमार जी डीमापुर के कुशल निर्देशन में आयोजित की जा रही है।
प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला का पावन लक्ष्य
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य पूर्वाचार्यों द्वारा रचित एवं संकलित 20 से अधिक प्रतिष्ठा ग्रंथों का गहन स्वाध्याय करते हुए प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ का परिमार्जन एवं परिष्कार करना है, ताकि यह ग्रंथ सर्वमान्य, आगमोक्त तथा प्रामाणिक स्वरूप में समाज के समक्ष प्रस्तुत हो सके।
ज्ञान, अध्ययन, परिमार्जन एवं प्रामाणिकता के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यशाला में विद्वान लगातार विभिन्न ग्रंथों का तुलनात्मक अध्ययन एवं सामूहिक वाचन कर रहे हैं।
इन महत्वपूर्ण प्रतिष्ठा ग्रंथों का हुआ सामूहिक वाचन
कार्यशाला में ग्रंथ एवं आचार्य विरासत के अंतर्गत प्रतिष्ठा तिलक, प्रतिष्ठा पाठ, प्रतिष्ठा सारोद्दार, प्रतिष्ठा प्रदीप, प्रतिष्ठा रत्नाकर, प्रतिष्ठा चंद्रिका, नरेंद्राचार्य प्रतिष्ठा पाठ, एक संधि आचार्य प्रतिष्ठा पाठ, प्रतिष्ठा सौरभ, प्रतिष्ठा पुष्प तथा अचेतन से चेतन सहित अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों का अध्ययन एवं वाचन किया गया।
महान आचार्य परंपरा के अंतर्गत इंद्र नंदि, हस्तिमल्ल, जिनसेन, बसु बिंदु, अकलंक देव, माघनन्दी और सोम सेन आदि आचार्यों के हस्तलिखित एवं प्रकाशित ग्रंथों की भी सामूहिक बाचना की गई।
अष्टापद तीर्थ के अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक महोत्सव का दिया आमंत्रण
ट्रस्ट कमेटी के महामंत्री डॉ. श्रेयांश जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि देश के लब्ध प्रतिष्ठित प्रतिष्ठाचार्य पं. धर्मचंद जी शास्त्री, दिल्ली ने सभी विद्वानों को आगामी 29 नवंबर से 6 दिसंबर तक अष्टापद तीर्थ पर आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में पधारने का आमंत्रण दिया।
उन्होंने बताया कि यह आयोजन परम पूज्य चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में आयोजित होगा। इस अवसर पर विश्व प्रसिद्ध अष्टापद तीर्थ पर 151 फीट ऊंची अष्टधातु की खड़गासन मुनि सुब्रत नाथ भगवान की मनमोहक भव्य प्रतिमा का शिलान्यास एवं भूमि पूजन संपन्न होगा।
पंडित महेंद्र कुमार जी दे रहे लगातार मार्गदर्शन
प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला के सभी सत्रों में कार्यशाला के कुलपति पंडित महेंद्र कुमार जी लगातार उपस्थित रहकर विद्वानों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
वहीं आगम मार्गी विद्वत परिषद के पदेन निवर्तमान अध्यक्ष पंडित कमल कुमार जी कमलाकुर, भोपाल ने भी विभिन्न सत्रों में अपना महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।
शताधिक विद्वानों की सहभागिता
कार्यशाला में उल्लेखनीय विद्वानों में पंडित हरिश्चंद्र जी मुरैना, पंडित पवन जी दीवान मुरैना, पंडित भागचंद जी धरियाबाद और पंडित सुशील जी मैनपुरी सहित शताधिक विद्वान शामिल हैं। ये विद्वान विभिन्न सत्रों में लगातार नवोदित विद्वानों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।
प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला में प्राचीन आचार्य परंपरा, आगम, प्रतिष्ठा विधि एवं विभिन्न प्रामाणिक ग्रंथों पर हो रहा यह सामूहिक अध्ययन जैन आगम साहित्य के संरक्षण, परिमार्जन और भावी पीढ़ियों तक इसके प्रामाणिक स्वरूप को पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।



