पूर्व मुख्यमंत्री परिवार से जुड़ी दुखद खबर: Pratik Yadav के निधन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़े खुलासे
लखनऊ के सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक Devesh Chandra Pandey के अनुसार,Pratik Yadav को सुबह करीब 6 बजे अस्पताल लाया गया था, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी पल्स पूरी तरह बंद हो चुकी थी, आंखें स्थिर थीं और शरीर में किसी भी प्रकार की हलचल नहीं थी। उन्हें “ब्रॉट डेड” घोषित किया गया।
इसके बाद किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चार डॉक्टरों की टीम ने उनका पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट में उनकी मौत को लेकर कई महत्वपूर्ण चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने आए हैं।
पोस्टमार्टम में 6 चोटों के निशान मिले
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, प्रतीक यादव के शरीर पर कुल 6 चोटों के निशान पाए गए हैं। ये चोटें छाती, दाईं बाजू, दाईं कलाई, कोहनी और बाईं कलाई पर मौजूद थीं।
हालांकि, मेडिकल जांच में यह स्पष्ट किया गया कि शरीर में किसी प्रकार के नशीले पदार्थ या स्टेरॉयड्स की मौजूदगी नहीं पाई गई। डॉक्टरों के अनुसार, मौत का कारण नशा या बाहरी जहर नहीं था।
मौत का कारण: फेफड़ों में खून का थक्का
रिपोर्ट के अनुसार, प्रतीक यादव की मौत का मुख्य कारण फेफड़ों में खून का थक्का जमना (Pulmonary Thromboembolism) बताया गया है।
इस स्थिति में फेफड़ों की नसों में खून का प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है। इसी कारण दिल तक रक्त नहीं पहुंच पाया और कार्डियक अरेस्ट हो गया।
डॉक्टरों ने इस स्थिति को “मस्कुलर थ्रोम्बोम्बोलिज्म” से जुड़ा गंभीर मेडिकल केस बताया है।
चोटें कब और कैसे लगीं?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शरीर पर पाए गए चोटों के निशान पुराने थे। परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव को ये चोटें दो अलग-अलग घटनाओं में लगी थीं।
29 अप्रैल को वे घर में गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उनका CT स्कैन भी किया गया और तीन दिन तक इलाज चला। बाद में हालत में सुधार होने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया था।
परिवार ने यह भी बताया कि मई के पहले सप्ताह में उनके बाएं पैर की सर्जरी हुई थी, जिससे उन्हें चलने-फिरने में परेशानी हो रही थी।
हाल ही में हुई दूसरी गिरने की घटना
परिजनों के अनुसार, मृत्यु से एक दिन पहले भी प्रतीक यादव घर में गिर गए थे। सर्जरी के कारण पैर में सूजन थी और उन्हें चलने में दिक्कत हो रही थी।
इसी वजह से वे संतुलन खो बैठे और गिर पड़े। बताया गया कि पिछले कुछ दिनों से वे अधिकतर समय घर के कमरे में ही रहते थे और बाहर नहीं निकल रहे थे।
अंतिम समय में उन्हें घर के किचन में बेहोशी की हालत में पाया गया था।
ब्लड थिनर दवाओं का लंबे समय से सेवन
परिवार ने बताया कि प्रतीक यादव लंबे समय से एंटीकोएगुलेंट (Blood Thinner) दवाओं का सेवन कर रहे थे।
ऐसी दवाएं उन मरीजों को दी जाती हैं जिन्हें रक्त के थक्के बनने का खतरा होता है। हालांकि, इन दवाओं के कारण मामूली चोट भी अधिक गंभीर दिखाई दे सकती है और शरीर पर निशान अधिक उभरकर आते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, वे लंबे समय से पल्मोनरी एंबॉलिज्म जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसमें पैरों की नसों में खून के थक्के बनते हैं और वे फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं।
दिल ने क्यों किया काम करना बंद?
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, फेफड़ों में खून के थक्के जमने के कारण रक्त प्रवाह पूरी तरह बाधित हो गया, जिससे दिल तक ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई नहीं पहुंच सकी।
इसी वजह से दिल ने अचानक काम करना बंद कर दिया और उनकी मृत्यु हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि इस स्थिति में अचानक सांस फूलना, सीने में तेज दर्द और हार्ट अटैक जैसे लक्षण सामने आते हैं।
मेडिकल टीम ने सुरक्षित रखे सैंपल
पोस्टमार्टम के दौरान मिले थ्रोम्बोम्बोलिक सैंपल को आगे की हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है, ताकि मौत के कारणों को और विस्तार से समझा जा सके।
निष्कर्ष
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि प्रतीक यादव की मौत का मुख्य कारण गंभीर मेडिकल स्थिति थी, जिसमें फेफड़ों में खून का थक्का जमने से हृदय तक रक्त प्रवाह रुक गया।
हालांकि शरीर पर चोटों के निशान पाए गए हैं, लेकिन प्राथमिक निष्कर्षों में मौत का कारण प्राकृतिक और चिकित्सकीय बताया गया है।
यह मामला अब आगे की विस्तृत जांच और रिपोर्ट के लिए मेडिकल विशेषज्ञों के अध्ययन में है।
