प्राकृत भाषा संस्थान वैशाली में लंबे समय से बंद शैक्षणिक गतिविधियां अब फिर शुरू होंगी। मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रयास और बिहार सरकार के निर्णय से रिक्त पद भरने तथा प्राकृत भाषा के नए कोर्स शुरू करने का फैसला लिया गया। पढ़ें पूरी खबर।
प्राकृत भाषा संस्थान वैशाली: मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से फिर जीवंत हुआ संस्थान, बंद पड़ी शैक्षणिक गतिविधियां शुरू करने का ऐतिहासिक निर्णय
राजेश जैन दद्दू
इंदौर
वैशाली/इंदौर। प्राकृत भाषा संस्थान वैशाली को लेकर जैन समाज के लिए बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। भगवान महावीर स्वामी की जन्मस्थली वैशाली में बिहार सरकार द्वारा संचालित प्राकृत भाषा शोध संस्थान की लंबे समय से बंद पड़ी शैक्षणिक गतिविधियों को फिर से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। यह सफलता परम पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद, प्रेरणा एवं मार्गदर्शन तथा राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के देशव्यापी प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।
संस्थान में वर्षों से नियुक्तियां बंद होने और विभाग को शिक्षा विभाग से हटाकर अन्य विभाग में स्थानांतरित किए जाने के कारण इसकी गतिविधियां लगभग ठप हो गई थीं। इससे प्राकृत भाषा के अध्ययन एवं शोध कार्यों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था।
प्राकृत भाषा संस्थान वैशाली क्यों हुआ था निष्क्रिय
वैशाली स्थित प्राकृत भाषा शोध संस्थान जैन दर्शन, प्राकृत भाषा एवं प्राचीन साहित्य के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। लेकिन पिछले कई वर्षों से रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं होने और प्रशासनिक कारणों से संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियां लगभग बंद हो गई थीं।इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा प्राकृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आह्वान से चला राष्ट्रीय अभियान
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं संघ के प्रमुख राकेश जैन गोहिल ने बताया कि इस विषय को लेकर पूरे देश में व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया।
परम पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने समाज को इस विषय पर जागरूक करते हुए कहा कि प्राकृत भाषा केवल एक भाषा नहीं बल्कि जैन संस्कृति और परंपरा की आत्मा है। उनके आशीर्वाद एवं प्रेरणा से राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने देशभर में समाज को संगठित किया।
संघ की ओर से बिहार के राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को अनेक स्थानों से ज्ञापन सौंपे गए और संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियां पुनः शुरू करने की मांग लगातार उठाई गई।
16 जून की बैठक बनी ऐतिहासिक
लगातार किए गए प्रयासों के बाद बिहार सरकार के संस्कृति विभाग ने 16 जून को जैन समाज के प्रतिनिधियों को महत्वपूर्ण बैठक के लिए आमंत्रित किया।इस बैठक में बिहार राज्य तीर्थ क्षेत्र कमेटी के मानद मंत्री पराग जैन की विशेष भूमिका रही।बैठक में सर्वसम्मति से समाज हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में लिए गए तीन बड़े निर्णय
बैठक के दौरान निम्न प्रमुख निर्णय लिए गए—
1. रिक्त पदों पर होगी नियुक्ति
संस्थान में लंबे समय से रिक्त पड़े सभी महत्वपूर्ण पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा।
2. शैक्षणिक गतिविधियां फिर होंगी शुरू
वर्तमान शैक्षणिक सत्र से ही संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियां पुनः प्रारंभ की जाएंगी।
3. नए कोर्स होंगे शुरू
प्राकृत भाषा के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए तीन माह तथा छह माह के अल्पकालीन कोर्स प्रारंभ किए जाएंगे।
अभयसागर महाराज का भी मिला मार्गदर्शन
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने बताया कि इस महत्वपूर्ण सफलता में परम पूज्य मुनि श्री अभयसागर महाराज का भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने क्या कहा
इस उपलब्धि पर परम पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा—
“प्राकृत भाषा हमारी मातृभाषा है। यह जैन समाज के लिए गर्व की बात है कि शोध संस्थान की गतिविधियां फिर से शुरू हो रही हैं। लेकिन जब तक यह विभाग पहले की तरह स्थायी रूप से स्थापित नहीं हो जाता, तब तक राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ और समाज को निरंतर जागरूक रहना होगा। शांति मत लेना।”
उन्होंने आगे कहा कि—
“जिन शासन एकता संघ की मेहनत से बोर्ड की बैठक में संशोधन संभव हुआ। यह इस वर्ष की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता है। हम जाग गए तो बच गए।”
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ की भूमिका रही महत्वपूर्ण
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ ने इस पूरे अभियान के दौरान देशभर में समाज को एकजुट किया।
संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यदि समाज एकजुट होकर अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर सक्रिय रहता है तो सकारात्मक परिणाम अवश्य मिलते हैं।उन्होंने कहा कि यह सफलता पूरे भारतवर्षीय जैन समाज की सामूहिक जागरूकता और संतों के आशीर्वाद का परिणाम है।
जैन समाज में खुशी की लहर
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर देशभर के जैन समाज में खुशी का माहौल है।समाज के वरिष्ठ समाजसेवी—
- डॉ. जैनेन्द्र जैन
- अमित कासलीवाल
- आनंद नवीन गोधा
- मयंक जैन टीके वेद
- हंसमुख गांधी
- डीके जैन (डीएसपी)
- श्रीमती पुष्पा कासलीवाल
- श्रीमती मुक्ता जैन
- श्रीमती रेखा जैन
ने इसे जैन समाज के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए परम पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज, मुनि श्री अभयसागर महाराज तथा राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रति आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष
प्राकृत भाषा संस्थान वैशाली में शैक्षणिक गतिविधियों का पुनः प्रारंभ होना केवल एक संस्थान के पुनर्जीवन की घटना नहीं है, बल्कि यह जैन संस्कृति, प्राकृत भाषा और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समाज को उम्मीद है कि बिहार सरकार द्वारा लिए गए निर्णय शीघ्र ही धरातल पर लागू होंगे और संस्थान पुनः राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन एवं शोध का प्रमुख केंद्र बनेगा।

