प्रज्ञा कौशल शिविर भीनमाल के समापन पर 72 महिलाओं ने सिलाई एवं फैशन डिजाइनिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया। प्रदर्शनी में ₹4,800 की पहली आय हुई। पढ़ें दैनिक स्वराज वाणी की विस्तृत रिपोर्ट।
प्रज्ञा कौशल शिविर भीनमाल: 72 महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया मजबूत कदम, पहली कमाई बनी नई प्रेरणा
रिपोर्ट: मुकेश सोलंकी | दैनिक स्वराज वाणी
प्रज्ञा कौशल शिविर का भव्य समापन
प्रज्ञा कौशल शिविर भीनमाल के अंतर्गत राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड स्थानीय संघ एवं विप्र फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो माह के निःशुल्क सिलाई एवं कौशल प्रशिक्षण शिविर का भव्य समापन सैन महाराज मंदिर परिसर में हुआ। प्रेरक दिनेशकुमार दवे नवीन की सक्रियता से आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं के हुनर, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की सराहना की गई।
दो माह तक चले इस शिविर में 72 महिलाओं ने सिलाई, फैशन डिजाइनिंग तथा स्वरोजगार से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक कौशल सीखे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रतिभागियों ने अपने हाथों से तैयार परिधानों और अन्य उत्पादों का प्रदर्शन कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।
कौशल विकास से विकसित भारत का निर्माण
समारोह के मुख्य अतिथि एवं जिला शिक्षा अधिकारी (जालोर) मनोहरलाल गोदारा ने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब वह व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कौशल विकास ही विकसित भारत की मजबूत नींव है और इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।
प्राचार्य शांतिलाल दवे ने इस शिविर को जीवन परिवर्तन का अभियान बताया। वहीं विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय सरोकार प्रकल्प समन्वयक जितेंद्र गौड़ ने कहा कि वास्तविक सेवा वही है, जो किसी परिवार को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बना दे।
12 वर्षों में 1910 से अधिक महिलाओं को मिला प्रशिक्षण
विप्र फाउंडेशन के दिनेशकुमार दवे एवं स्थानीय संघ के सचिव डॉ. घनश्याम व्यास ने बताया कि संस्था पिछले 12 वर्षों से लगातार महिलाओं के कौशल विकास के लिए कार्य कर रही है।
अब तक—
- 1910 से अधिक महिलाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण
- 150 से अधिक सिलाई मशीनों का वितरण
- अगले चरण में 100 जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीनें देने की तैयारी
यह पहल ग्रामीण एवं जरूरतमंद महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
प्रदर्शनी में पहली बार हुई कमाई
प्रज्ञा कौशल शिविर भीनमाल की सबसे बड़ी उपलब्धि प्रशिक्षणार्थियों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी रही।
महिलाओं ने स्वयं तैयार किए—
- स्कूल यूनिफॉर्म
- परिधान
- बैग
- हस्तनिर्मित वस्त्र
- अन्य उपयोगी उत्पाद
प्रदर्शनी में आगंतुकों ने उत्साहपूर्वक खरीदारी की और ₹4,800 के उत्पाद खरीदे। यह महिलाओं की पहली व्यावसायिक आय थी जिसने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण के साथ वास्तविक बाजार का अनुभव महिलाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
प्रशिक्षण में केवल सिलाई ही नहीं, जीवन कौशल भी
दो माह के प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों को केवल सिलाई और फैशन डिजाइनिंग ही नहीं बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इनमें शामिल रहे—
- सिलाई एवं फैशन डिजाइनिंग
- साक्षरता
- विधिक साक्षरता
- वित्तीय साक्षरता
- डिजिटल बैंकिंग
- उद्यमिता विकास
- स्वरोजगार की जानकारी
इस बहुआयामी प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त करना था।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम का संचालन डॉ. घनश्याम व्यास ने किया।
इस अवसर पर मायड़ भाषा के प्रसिद्ध कवि वरदाराम सुथार ने अपनी ओजस्वी हिंदी एवं राजस्थानी कविताओं के माध्यम से राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम में रहे प्रमुख अतिथि
समारोह में अनेक गणमान्य नागरिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें—
- मनोहरलाल गोदारा (जिला शिक्षा अधिकारी, जालोर)
- शांतिलाल दवे
- जितेंद्र गौड़
- दिनेशकुमार दवे
- डॉ. घनश्याम व्यास
- सवाईसिंह राठौड़ (सीओ स्काउट)
- नैनसिंह राजपुरोहित
- भरत देवड़ा
- चंदनसिंह
- भोमाराम सैन
- कांतिलाल सैन
- डॉ. महेश बालेचा
- सीता शर्मा
- गोमती
- रामदास वैष्णव
- वासुदेव अवस्थी
- माणकमल भंडारी
- नरोत्तमलाल त्रिवेदी सहित अनेक शिक्षाविद एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

निष्कर्ष
प्रज्ञा कौशल शिविर भीनमाल ने यह साबित किया कि यदि महिलाओं को उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। 72 महिलाओं की यह सफलता अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है। विप्र फाउंडेशन और भारत स्काउट गाइड की यह पहल महिला सशक्तिकरण एवं कौशल विकास की दिशा में एक सराहनीय कदम मानी जा रही है।



