PM मोदी का 5 देशों का दौरा शुरू: पहले UAE यात्रा, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक संकट पर रहेगी नजर
PM नरेंद्र मोदी शुक्रवार (15 मई 2026) से अपने महत्वपूर्ण पांच देशों के विदेश दौरे पर रवाना हो रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण वैश्विक भू-राजनीतिक हालात अस्थिर बने हुए हैं। प्रधानमंत्री का यह दौरा ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक साझेदारी और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित माना जा रहा है।
PM मोदी इस यात्रा की शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से करेंगे और इसके बाद वह नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और अंत में इटली का दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह पूरा दौरा लगभग छह दिनों का होगा।
सबसे पहले UAE क्यों जा रहे हैं PM मोदी?
PM का पहला पड़ाव संयुक्त अरब अमीरात इसलिए रखा गया है क्योंकि भारत और UAE के बीच ऊर्जा और व्यापारिक संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं। मौजूदा वैश्विक हालात में, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच, ऊर्जा आपूर्ति और तेल-गैस सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। विशेष रूप से एलपीजी आपूर्ति, कच्चे तेल के रणनीतिक भंडार और दीर्घकालिक ऊर्जा सहयोग पर समझौते होने की संभावना है।
ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा बड़ा फोकस
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और UAE के बीच ऊर्जा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौते हो सकते हैं। इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के बीच रणनीतिक साझेदारी प्रमुख है।
इसके तहत एलपीजी आपूर्ति को लेकर दीर्घकालिक समझौता किए जाने की उम्मीद है। इसके अलावा भारत की रणनीतिक तेल भंडारण योजना को मजबूत करने के लिए इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) और ADNOC के बीच भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है।
इन समझौतों का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा संकट की स्थिति में भारत की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और स्थिर बनाए रखना है।
वैश्विक संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य का असर
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति अस्थिर बनी हुई है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति गुजरती है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
हाल ही में इस क्षेत्र में ड्रोन हमलों और जहाजों पर कब्जे जैसी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।
भारत-UAE संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश
विदेश मंत्रालय ने बताया है कि प्रधानमंत्री मोदी की UAE यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और जन-संबंधों को और मजबूत करना है।
भारत और UAE के बीच पहले से ही मजबूत व्यापारिक संबंध हैं, और लाखों भारतीय वहां रोजगार के लिए रहते हैं। ऊर्जा, निवेश और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी लगातार बढ़ रही है।
नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा
UAE यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड जाएंगे, जहां व्यापार और तकनीकी सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद वे स्वीडन और नॉर्वे का दौरा करेंगे, जहां हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और तकनीकी नवाचार जैसे मुद्दों पर बातचीत होगी।
इस दौरे का अंतिम पड़ाव इटली होगा, जहां यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा होने की उम्मीद है।
ऊर्जा, व्यापार और रणनीति पर फोकस
इस पूरे दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता लाना और प्रमुख देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच यह दौरा भारत की विदेश नीति और आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
PM मोदी का यह पांच देशों का दौरा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की स्थिति को भी और सुदृढ़ करेगा। UAE से शुरू होकर इटली तक का यह दौरा रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
