पीएम-प्रणाम के तहत ‘उर्वरक की पाठशाला’ का आयोजन, किसानों को संतुलित खाद के उपयोग की दी जानकारी
‘संतुलित खाद अपनाएं, धरती मां को बचाएं’ के संदेश के साथ किसानों को टिकाऊ कृषि के लिए किया जागरूक
नागदा। पीएम-प्रणाम अभियान के अंतर्गत बिलशुडा स्थित चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल लिमिटेड की ओर से किसानों को संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ‘उर्वरक की पाठशाला’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और फसल की आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्वों के उपयोग के संबंध में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को बताया गया कि फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग कृषि उत्पादन के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक हो सकता है। आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से बचने और वैज्ञानिक तरीके से खाद का उपयोग करने पर जोर दिया गया।
मिट्टी के स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर
उर्वरक की पाठशाला में किसानों को मिट्टी के स्वास्थ्य को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाने की जानकारी दी गई। किसानों को समझाया गया कि फसल की आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करने से पोषक तत्वों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है और कृषि भूमि की गुणवत्ता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में फसल की जरूरत, उर्वरक की मात्रा और उचित उपयोग से जुड़े विभिन्न कृषि विषयों पर भी चर्चा की गई।
किसानों से किया संवाद
इस अवसर पर चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल लिमिटेड के प्रतिनिधि महेश सोन्ती ने किसानों से संवाद करते हुए संतुलित पोषण और उर्वरकों के उचित उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को उर्वरकों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल तथा कृषि में टिकाऊ तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में किसानों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और कृषि से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की। किसानों ने उर्वरक प्रबंधन और मिट्टी के स्वास्थ्य से संबंधित अपनी जिज्ञासाएं भी साझा कीं।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
कार्यक्रम के माध्यम से ‘संतुलित खाद अपनाएं, धरती मां को बचाएं’ का संदेश दिया गया। किसानों को पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
आयोजकों के अनुसार किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाना मिट्टी के स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
