PM मोदी की ‘जरूरत न हो तो सोना न खरीदें’ अपील से ज्वेलरी सेक्टर में चिंता, छोटे कारोबारियों को मांग घटने का डर
PM Modi Gold Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी अपनाने पर दिया जोर, सोने की गैर-जरूरी खरीद से बचने की अपील के बाद ज्वेलरी कारोबार पर असर को लेकर CTI ने जताई चिंता
बिजनेस डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोने की खरीदारी को लेकर की गई एक अपील के बाद देश के ज्वेलरी सेक्टर में चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा है कि अगर जरूरत न हो तो सोना खरीदने से बचें। उन्होंने इससे पहले मई में भी इसी तरह की अपील की थी और अब इसे दोहराए जाने के बाद ज्वेलरी कारोबार से जुड़े व्यापारियों, छोटे ज्वैलर्स और आभूषण कारीगरों के बीच मांग में संभावित गिरावट को लेकर चिंता बढ़ गई है।
प्रधानमंत्री की अपील ऐसे समय सामने आई है जब सरकार घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में सोने की गैर-जरूरी खरीद को कम करने की बात भी कही गई है। हालांकि ज्वेलरी उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि यदि सोने की मांग में बड़ी गिरावट आती है तो इसका सीधा असर छोटे व्यापारियों और कारीगरों की आजीविका पर पड़ सकता है।
पीएम मोदी ने क्यों की सोने की खरीद कम करने की अपील?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए देशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की। इसी दौरान उन्होंने सोने की खरीद को लेकर भी संदेश दिया।
प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर था कि जिन वस्तुओं की तत्काल आवश्यकता नहीं है, उनकी गैर-जरूरी खरीद से बचा जाए। सोने को लेकर भी उन्होंने जरूरत के आधार पर खरीदारी करने की बात कही।
भारत में सोने की बड़ी मांग का एक हिस्सा आयात से पूरा होता है। इसलिए सोने के आयात में होने वाली बढ़ोतरी का असर देश के आयात बिल और व्यापार संतुलन पर भी पड़ सकता है। इसी संदर्भ में सोने की गैर-जरूरी खरीद को कम करने की अपील को आर्थिक दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है।
ज्वेलरी इंडस्ट्री में क्यों बढ़ी चिंता?
प्रधानमंत्री की अपील के बाद ज्वेलरी उद्योग से जुड़े संगठनों और कारोबारियों के बीच इसके संभावित प्रभाव पर चर्चा शुरू हो गई है। खासतौर पर छोटे ज्वैलर्स और परंपरागत आभूषण कारीगरों को आशंका है कि यदि ग्राहक सोने की खरीदारी कम करते हैं तो उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ सकता है।
देश में ज्वेलरी सेक्टर केवल बड़े ब्रांड और शोरूम तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों और कस्बों में हजारों छोटे ज्वैलर्स, सुनार और आभूषण बनाने वाले कारीगर इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। उनकी आमदनी काफी हद तक स्थानीय स्तर पर होने वाली सोने और चांदी के आभूषणों की बिक्री पर निर्भर करती है।
ऐसे में मांग में बड़ी कमी आने की स्थिति में छोटे कारोबारियों के सामने आर्थिक चुनौती पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।
CTI ने जताई चिंता, सोने की खपत घटने की आशंका
चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने भी प्रधानमंत्री की अपील के बाद ज्वेलरी सेक्टर पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई है। संगठन का अनुमान है कि मांग प्रभावित होने की स्थिति में देश में सोने की सालाना खपत घटकर करीब 500 टन के स्तर तक पहुंच सकती है।
हालांकि वास्तविक खपत कितनी रहेगी, यह सोने की कीमतों, वैश्विक बाजार, घरेलू मांग, त्योहारी खरीदारी और शादी-विवाह के सीजन समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
व्यापारियों के लिए चिंता का प्रमुख कारण यह है कि भारत में सोने की खरीद सिर्फ निवेश के लिए नहीं होती, बल्कि इसका गहरा संबंध सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी है।
छोटे ज्वैलर्स और कारीगरों पर पड़ सकता है ज्यादा असर
अगर सोने की मांग में गिरावट आती है तो बड़े ज्वेलरी ब्रांड की तुलना में छोटे और स्थानीय कारोबारियों पर इसका असर अधिक महसूस किया जा सकता है। छोटे ज्वैलर्स के पास आमतौर पर कारोबार के दूसरे विकल्प सीमित होते हैं।
इसके अलावा आभूषण बनाने वाले कारीगर, डिजाइनर, पॉलिशिंग और अन्य संबंधित कामों से जुड़े लोगों का रोजगार भी ज्वेलरी बाजार की मांग से जुड़ा हुआ है।
यही कारण है कि ज्वेलरी उद्योग से जुड़े लोग चाहते हैं कि सोने के आयात को कम करने और घरेलू कारोबार तथा रोजगार की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया जाए।
भारत में सोने का है खास महत्व
भारत दुनिया के बड़े सोना उपभोक्ता बाजारों में शामिल रहा है। भारतीय परिवारों में सोने को सिर्फ आभूषण के तौर पर नहीं, बल्कि बचत और निवेश के साधन के रूप में भी देखा जाता है।
शादी-विवाह, अक्षय तृतीया, धनतेरस, दिवाली और अन्य शुभ अवसरों पर सोना खरीदने की पुरानी परंपरा है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भी परिवार अपनी बचत का एक हिस्सा सोने में निवेश करते हैं।
इसी वजह से सोने की मांग में होने वाला बदलाव सीधे ज्वेलरी कारोबार, आयात और घरेलू अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकता है।
ऊंची कीमतें भी ज्वेलरी कारोबार के लिए चुनौती
ज्वेलरी बाजार के सामने केवल प्रधानमंत्री की अपील ही नहीं, बल्कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। जब सोने की कीमत तेजी से बढ़ती है तो आम ग्राहक भारी आभूषण खरीदने के बजाय कम वजन वाले आभूषणों या दूसरी बचत योजनाओं की ओर रुख कर सकते हैं।
ऐसे में यदि ऊंची कीमतों के साथ गैर-जरूरी सोने की खरीद कम करने का संदेश भी ग्राहकों के व्यवहार को प्रभावित करता है तो छोटे ज्वैलर्स की बिक्री पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि भारतीय बाजार में त्योहारी और शादी-विवाह के सीजन के दौरान सोने की मांग पारंपरिक रूप से मजबूत रहती है। इसलिए आने वाले महीनों में वास्तविक असर बाजार की मांग से ही स्पष्ट होगा।
स्वदेशी पर प्रधानमंत्री मोदी का जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार देशवासियों से भारत में निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील करते रहे हैं। उनका जोर घरेलू उत्पादन बढ़ाने, स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहित करने और आयात पर निर्भरता कम करने पर है।
सोने की खरीद को लेकर उनकी ताजा अपील को भी इसी व्यापक आर्थिक सोच के संदर्भ में देखा जा रहा है। दूसरी ओर ज्वेलरी उद्योग चाहता है कि घरेलू कारोबार और इस क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों के रोजगार को ध्यान में रखते हुए नीतिगत संतुलन कायम किया जाए।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रधानमंत्री की अपील का आने वाले त्योहारी और शादी-विवाह के सीजन में सोने तथा आभूषणों की बिक्री पर कितना असर दिखाई देता है।
