Narendra Modi की Iran-Israel War पर प्रतिक्रिया: भारत का रुख स्पष्ट, शांति और कूटनीति पर जोर
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी Iran-Israel सैन्य संघर्ष के बीच भारत ने एक बार फिर शांति और संवाद की नीति को दोहराया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक तनावों को लेकर भारत की सोच बिल्कुल साफ है—हम शांति, स्थिरता और कूटनीतिक समाधान के पक्षधर हैं।
नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय से अस्थिरता का सामना कर रहा है और मौजूदा हालात ने वैश्विक शांति के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत की चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय है। इस क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत के आर्थिक व सामरिक हित भी यहां जुड़े हुए हैं। ऐसे में भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बहाल करना और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के रास्ते पर लौटने की अपील करता है। भारत का मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। संबंधित देशों के साथ समन्वय स्थापित कर भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। यदि आवश्यकता पड़ी तो भारत हर संभव कदम उठाने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत अपने नागरिकों के साथ मजबूती से खड़ा है और विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
आतंकवाद और कट्टरपंथ पर भी सख्त संदेश
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ को मानवता के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि ये चुनौतियां केवल किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की साझा समस्या हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इन खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है। भारत और कनाडा जैसे लोकतांत्रिक देश मिलकर शांति और स्थिरता को मजबूत कर सकते हैं।
भारत-कनाडा संबंधों पर चर्चा
प्रेस वार्ता के दौरान भारत और कनाडा के बीच रक्षा सहयोग, मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ाने पर भी सहमति बनी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों ने “इंडिया-कनाडा डिफेंस डायलॉग” स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता की भलाई के साझा दृष्टिकोण के कारण भारत और कनाडा के संबंधों में नई ऊर्जा आई है।
वैश्विक शांति के लिए भारत की भूमिका
ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच भारत ने संतुलित और परिपक्व कूटनीतिक रुख अपनाया है। भारत न तो किसी पक्ष का समर्थन कर रहा है और न ही किसी के खिलाफ बयान दे रहा है, बल्कि शांति और स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है।
भारत का यह रुख उसकी पारंपरिक विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें “वसुधैव कुटुंबकम्” और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना प्रमुख रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब दो लोकतांत्रिक देश साथ खड़े होते हैं तो शांति की आवाज और सशक्त हो जाती है। यही कारण है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी शांति और संवाद की वकालत करता रहा है।
कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी देर रात कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक कर सकते हैं। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा संभव है।
निष्कर्ष
ईरान-इजरायल युद्ध जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भारत ने संतुलित, जिम्मेदार और दूरदर्शी रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत शांति, संवाद और कूटनीति का समर्थक है।
पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत के लिए सामरिक, आर्थिक और मानवीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में भारत की प्राथमिकता न केवल क्षेत्रीय शांति है, बल्कि वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना भी है।
इस बयान के जरिए भारत ने एक बार फिर दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।
