PM Modi Israel Visit 2026: भारत-इजरायल संबंधों में नया अध्याय और हेक्सागन एलायंस की चर्चा
नई दिल्ली: PM नरेंद्र मोदी 25 फरवरी 2026 से इजरायल की यात्रा पर जा रहे हैं। यह दौरा उनके 2017 के पहले दौरे के बाद दूसरा है और दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यात्रा से पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत को यह प्रस्ताव दिया है कि वह इस्लामी कट्टरपंथ का मुकाबला करने के लिए बनाए जाने वाले छह-पक्षीय गठबंधन, जिसे Hexagon Alliance कहा गया है, में शामिल हो। इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और विशेषज्ञों के बीच नई चर्चा को जन्म दिया है।
1. हेक्सागन एलायंस: क्या है यह गठबंधन?
नेतन्याहू के अनुसार हेक्सागन एलायंस पश्चिम एशिया और उसके आसपास के देशों का छह-पक्षीय गठबंधन होगा। इसमें भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ अन्य अनाम अरब, अफ्रीकी और एशियाई देश शामिल होंगे।
मुख्य उद्देश्य:
- कट्टरपंथी शिया और सुन्नी ध्रुवों के खिलाफ सामूहिक रणनीति बनाना।
- आर्थिक सहयोग, राजनयिक तालमेल और सुरक्षा सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना।
- ईरान और उसके प्रॉक्सी नेटवर्क का संतुलन बनाए रखना।
टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू का लक्ष्य इस गठबंधन के माध्यम से पश्चिम एशिया में ऐसा ध्रुव तैयार करना है, जो उभरते कट्टरपंथी खतरों और अस्थिरताओं का मुकाबला कर सके।
2. PM Modi और नेतन्याहू की दोस्ताना बैठक
इजरायली प्रधानमंत्री ने मोदी को प्रिय मित्र करार दिया और कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, इनोवेशन और रणनीतिक दृष्टिकोण में गहरा सहयोग है।
मोदी और नेतन्याहू पहले भी कई बार फोन पर बातचीत कर चुके हैं और दोनों देश का दौरा कर चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा दोनों नेताओं के बीच मजबूत दोस्ताना रिश्तों को और गहरा करेगी और द्विपक्षीय सहयोग के नए रास्ते खोलेगी।
3. भारत का दृष्टिकोण: धर्मनिरपेक्षता और रणनीतिक संतुलन
डिफेंस एक्सपर्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी का कहना है कि भारत और इजरायल लंबे समय से दोस्त रहे हैं और दोनों ही देश कट्टरपंथी हमलों का शिकार रहे हैं।
हालांकि, नेतन्याहू द्वारा प्रस्तावित हेक्सागन एलायंस सीधे शिया और सुन्नी कट्टरपंथी गुटों के खिलाफ है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश होने के नाते इस तरह के गठबंधन में शामिल होने से दूरी बनाए रखना चाहेगा।
भारत की प्राथमिकता:
- किसी भी बहुपक्षीय गठबंधन में शामिल होने से पहले राष्ट्रीय हित और धर्मनिरपेक्ष नीति को ध्यान में रखना।
- रक्षा और रणनीतिक सहयोग को द्विपक्षीय रूप में मजबूत करना।
- क्षेत्रीय संतुलन और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना।
4. पाकिस्तान पर प्रभाव
लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी के अनुसार, भारत और इजरायल के बीच संभावित रक्षा सहयोग पाकिस्तान के लिए एक बड़ा चुनौतीपूर्ण संदेश होगा।
- यदि भारत-इजरायल के बीच कोई रणनीतिक डील या रक्षा गठबंधन होता है, तो यह पाकिस्तान के मुंह पर “जोरदार तमाचा” साबित हो सकता है।
- पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ सैन्य गठबंधन की कोशिश की थी, लेकिन भारत-इजरायल का यह सहयोग उसे रणनीतिक रूप से कमजोर कर सकता है।
- ऑपरेशन सिंदूर जैसे पिछले इजरायली सैन्य अभियान ने पाकिस्तान के कई ठिकानों को नुकसान पहुंचाया था, और भविष्य में सहयोग और अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
5. हमास और अरब देशों की प्रतिक्रिया
हमास प्रवक्ता हाजेम कासिम ने हेक्सागन एलायंस के प्रस्ताव को खारिज कर दिया और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया।
- उनका कहना है कि यह कदम केवल कब्ज़े वाले देशों के हितों की पूर्ति करता है।
- गाजा युद्ध के दौरान अरब देशों की कमजोरी का फायदा उठाकर इजरायल इस गठबंधन के माध्यम से क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदलने का प्रयास कर रहा है।
इस परिप्रेक्ष्य में, भारत को किसी भी बहुपक्षीय गठबंधन में शामिल होने से पहले अपने दीर्घकालिक रणनीतिक हितों का मूल्यांकन करना आवश्यक है।
6. भारत-इजरायल द्विपक्षीय सहयोग
भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय सहयोग पहले से मजबूत है। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- रक्षा सहयोग: रक्षा तकनीक, हथियार और खुफिया साझेदारी।
- साइबर सुरक्षा और तकनीकी सहयोग: इजरायल की अत्याधुनिक तकनीक भारत के सुरक्षा ढांचे में सहायक।
- कृषि और जल प्रबंधन में साझेदारी: इजरायल की जल और कृषि तकनीक भारत में लागू की जा रही है।
- नवाचार और इनोवेशन: स्टार्टअप, तकनीकी अनुसंधान और विकास में सहयोग।
डिफेंस एक्सपर्ट का मानना है कि इन द्विपक्षीय साझेदारियों को और मजबूत किया जा सकता है, और यह भारत के लिए हेक्सागन एलायंस की तुलना में अधिक व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प है।
7. यात्रा का महत्व
पीएम मोदी की यह यात्रा कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
- रणनीतिक और रक्षा सहयोग को बढ़ाना।
- इजरायल और भारत के बीच आर्थिक और तकनीकी समझौते पर चर्चा।
- भारत की मध्यपूर्व नीति और धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण को संतुलित रखना।
- दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक दोस्ती को उजागर करना।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा न केवल भारत-इजरायल संबंधों में नया अध्याय खोलेगा, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा समीकरणों में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा।
निष्कर्ष
PM Modi की इजरायल यात्रा 2026 भारत-इजरायल संबंधों में रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को और गहरा करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- हेक्सागन एलायंस प्रस्ताव ने नई चर्चा को जन्म दिया है, लेकिन भारत धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए इसे संभालकर आगे बढ़ेगा।
- भारत-इजरायल द्विपक्षीय सहयोग और तकनीकी साझेदारी को बढ़ाना प्राथमिकता होगी।
- पाकिस्तान और क्षेत्रीय गुटों पर इसका रणनीतिक प्रभाव भी नजर रखा जाएगा।
पीएम मोदी और नेतन्याहू की यह मुलाकात दोनों देशों के लिए एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकती है, जिसमें सुरक्षा, आर्थिक विकास और तकनीकी नवाचार को प्रमुखता दी जाएगी।
