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PM Modi ने CSPOC सम्मेलन का उद्घाटन किया, कहा – “संसदीय दायित्व सिर्फ बोलना नहीं, सुनना भी है”

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Published On: 15 January 2026
PM Modi Inaugurates CSPOC Conference, Says Parliamentary Duty is to Speak and Listen
— PM Modi Inaugurates CSPOC Conference, Says Parliamentary Duty is to Speak and Listen

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दिल्ली के ऐतिहासिक संविधान सदन में राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय सम्मेलन (CSPOC) का 28वां संस्करण 14 जनवरी 2026 से शुरू हुआ। इस भव्य आयोजन का उद्घाटन PM Modi ने किया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रों के बीच संसदीय मूल्यों, विधायी प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। इसमें राष्ट्रमंडल देशों के संसदाध्यक्ष, पीठासीन अधिकारी और वरिष्ठ संसदीय प्रतिनिधि शामिल हुए।

संसदीय प्रक्रिया में सुनना और धैर्य बनाए रखना आवश्यक

PM Modi ने उद्घाटन सत्र में कहा कि संसदीय कार्य सिर्फ बोलने तक सीमित नहीं है। सांसदों का दायित्व केवल अपनी बात रखने का नहीं, बल्कि सभी की बात सुनने का भी है। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय सभाओं में धैर्य बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी शोरगुल या अत्यधिक उत्साह के बीच सांसदों को मुस्कान के साथ संभालते हुए चर्चा को आगे बढ़ाना चाहिए। उनका मानना है कि यही गुण एक प्रभावशाली और सफल संसद सदस्य में होना चाहिए।

PM Modiने भारत के 75 सालों के लोकतांत्रिक सफर को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान भारत ने सिर्फ लोकतंत्र को टिकाए रखने का काम नहीं किया, बल्कि इसे अपनी विविधताओं की ताकत बनाकर दुनिया में एक मिसाल पेश की। उन्होंने डिजिटल इंडिया, वैक्सीन उत्पादन, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों का भी विवरण दिया।

भारत की वैश्विक स्थिति और उपलब्धियां

PM Modi ने अपने संबोधन में भारत की वैश्विक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। देश के पास दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश है और स्टील उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। साथ ही भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम और एविएशन मार्केट दुनिया में तीसरे स्थान पर हैं।

रेलवे नेटवर्क और मेट्रो नेटवर्क में भी भारत शीर्ष स्थान पर है। देश दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है और चावल उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिरता, विधायी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और सक्षम प्रशासन ने भारत को इन क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति प्रदान की है।

लोकतंत्र का सार: चुनाव से अधिक, अंतिम नागरिक तक सेवाएं पहुंचाना

PM Modi ने कहा कि भारत में लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र का असली उद्देश्य है हर नागरिक तक सुविधाएं और सेवाएं सुनिश्चित करना। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उनका कहना था कि संसदीय प्रक्रियाओं और विधायी संस्थाओं का वास्तविक मूल्य तभी है, जब वे हर नागरिक तक न्यायसंगत और समावेशी विकास सुनिश्चित कर सकें।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संसदीय प्रणाली के माध्यम से “लास्ट माइल डिलीवरी” संभव हो पाई है। इसका मतलब है कि हर नागरिक तक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना, चाहे वह किसी भी क्षेत्र या वर्ग का हो। इस दृष्टिकोण के चलते भारत ने शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल सेवाएं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के माध्यम से अपने नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया है।

CSPOC सम्मेलन के उद्देश्य और विषय

CSPOC सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय नेताओं के बीच अनुभव साझा करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना है। सम्मेलन में तीन दिन तक गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। मुख्य विषयों में शामिल हैं:

  • विधायी प्रक्रियाओं और संसदीय संस्थाओं की क्षमता और पारदर्शिता बढ़ाना
  • संसदीय लोकतंत्र में जवाबदेही और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना
  • वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त बनाना और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान
  • संसदीय नेतृत्व, नीति निर्माण और विधायी निष्पादन के आधुनिक तरीकों पर चर्चा

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि संसदीय व्यवस्था केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों तक न्याय और विकास सुनिश्चित करने का माध्यम भी है। CSPOC का यह मंच राष्ट्रमंडल देशों को संसदीय सुधार, पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता साझा करने का अवसर देता है।

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भारत की विविधताओं को लोकतंत्र में समाहित करना

पीएम मोदी ने भारत के लोकतंत्र की सफलता का श्रेय इसकी विविधताओं को सहकारिता और समावेशिता में बदलने को दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय कुछ लोग आशंका जताते थे कि इतने विविधताओं वाले देश में लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा। लेकिन भारत ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र को किसी भी चुनौती से पार पाया जा सकता है यदि संस्थाएं सक्षम और नागरिक सहयोगी हों।

उन्होंने बताया कि भारत ने लोकतांत्रिक संस्थाओं, स्थिर प्रशासन और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से देश को विकास और स्थिरता दोनों प्रदान किए हैं। यही कारण है कि आज भारत वैश्विक स्तर पर न केवल तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी जीवंत उदाहरण है।

सम्मेलन का महत्व

CSPOC सम्मेलन राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय नेताओं और अधिकारियों के लिए एक साझा मंच है। यह सम्मेलन लोकतांत्रिक मूल्यों, विधायी प्रथाओं और संसदीय सहयोग को बढ़ावा देता है। तीन दिवसीय कार्यक्रम में देशों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे, सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा करेंगे और संसदीय सुधारों के लिए विचार-विमर्श करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन सत्र में जोर देकर कहा कि संसदीय संस्कृति का मूल तत्व है सुनना, समझना और धैर्य रखना। यही गुण लोकतंत्र को मजबूत और प्रभावी बनाते हैं। इस सम्मेलन के माध्यम से सभी प्रतिभागी देशों को संसदीय प्रक्रियाओं और विधायी क्षमता के सुधार में मार्गदर्शन मिलेगा।

समापन विचार

CSPOC सम्मेलन न केवल संसदीय नेताओं के लिए विचार-विमर्श का अवसर है, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा और प्रशासनिक दक्षता की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी प्रदर्शित करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर यह संदेश दिया कि लोकतंत्र का सार केवल बोलना नहीं, बल्कि सुनना, धैर्य रखना और नागरिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध होना है।

तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत की संसदीय परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और विधायी दक्षता का अनुभव राष्ट्रमंडल के अन्य देशों के साथ साझा किया जाएगा। इस तरह CSPOC सम्मेलन भारत को वैश्विक संसदीय नेतृत्व के रूप में स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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