नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2025 –
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की और उन्हें उनके 73वें जन्मदिन की हार्दिक बधाई दी। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की और उनके साथ भारत-रूस के द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती को लेकर भी चर्चा की।
दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत न केवल पारंपरिक शिष्टाचार का प्रतीक थी, बल्कि यह संकेत भी देती है कि भारत और रूस की रणनीतिक साझेदारी हर क्षेत्र में गहराई और मजबूती हासिल कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने दोनों देशों के विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का जिक्र किया और राष्ट्रपति पुतिन को भारत में स्वागत करने की अपनी उत्सुकता जताई। इस सम्मेलन के दौरान दोनों देश रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
पुतिन की भारत यात्रा की संभावना
सूत्रों के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 5 दिसंबर 2025 को भारत आ सकते हैं। इस यात्रा में पुतिन नई दिल्ली में होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। हालांकि अभी यह तय नहीं हो पाया है कि उनकी यात्रा एक दिन की होगी या दो दिनों की, लेकिन यह निश्चित है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग पर गहन चर्चा होगी।
उनकी यात्रा से पहले, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव नवंबर में भारत आएंगे और सम्मेलन की तैयारियों का निरीक्षण करेंगे। भारत और रूस के बीच अब तक 22 शिखर वार्ताएं हो चुकी हैं। पिछले साल जुलाई में पीएम मोदी मॉस्को गए थे, जबकि पुतिन आखिरी बार 2021 में भारत आए थे। इस बार शिखर सम्मेलन में सैन्य और तकनीकी सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
रक्षा और तकनीकी सहयोग पर ध्यान
भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग हमेशा मजबूत रहा है। माना जा रहा है कि इस वर्ष भारत अतिरिक्त एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली खरीद सकता है। भारत ने 2018 में 5 यूनिट के लिए 5 अरब डॉलर का समझौता किया था, जिसमें से तीन रेजिमेंट पहले ही मिल चुकी हैं और शेष दो रेजिमेंट अगले साल तक मिलने की संभावना है।
रूस की एस-400 वायु रक्षा प्रणाली ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के हवाई हमलों को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके जरिए यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए रूस के तकनीकी सहयोग पर भरोसा कर रहा है।
पुतिन ने पीएम मोदी की की तारीफ
फोन पर बातचीत के दौरान, पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी की भी खुले तौर पर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सोवियत संघ के समय से भारत और रूस के संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं, और यह संबंध आज भी बरकरार हैं। पुतिन ने कहा, “भारत में वे इसे याद करते हैं, जानते हैं और महत्व देते हैं। हम इसकी सराहना करते हैं कि भारत ने इसे नहीं भूला है।”
रूस के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को अपना मित्र बताया और कहा कि वह उनके साथ सहज महसूस करते हैं। उन्होंने मोदी के नेतृत्व वाली भारत की राष्ट्रवादी सरकार की प्रशंसा की और उन्हें ‘संतुलित, बुद्धिमान और राष्ट्र हितैषी’ नेता बताया।
यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत-रूस संबंध सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत नेतृत्व और भरोसे पर भी आधारित हैं।
द्विपक्षीय सहयोग के क्षेत्र
मोदी-पुतिन संवाद ने यह संकेत दिया कि आने वाले समय में दोनों देश रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग में नई पहल करेंगे। खासकर रक्षा और मिसाइल तकनीक में भारत रूस पर भरोसा बनाए रखेगा। इसके अलावा ऊर्जा और व्यापार क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने के लिए दोनों देशों की सरकारें सक्रिय कदम उठाएंगी।
विशेष रूप से 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि यह वार्ता भारत-रूस संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाएगी। यह बैठक दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और भी सुदृढ़ करेगी, जिससे वैश्विक स्तर पर दोनों देशों की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच यह फोन संवाद केवल जन्मदिन की बधाई तक सीमित नहीं था। यह भारत और रूस के लंबे समय से चले आ रहे मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकेत था।
पुतिन की संभावित भारत यात्रा, शिखर सम्मेलन और सैन्य तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में बढ़ते कदम यह दिखाते हैं कि भारत-रूस संबंध केवल कूटनीति नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी और विश्वास का प्रतीक हैं।
इस प्रकार, मोदी-पुतिन संवाद और आगामी वार्षिक शिखर सम्मेलन भारत-रूस संबंधों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहे हैं।
