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Pipliyakumar Green Belt पर अवैध गुमटियों को तहसीलदार ने बुलडोजर से जमींदोज किया

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Published On: 13 January 2026
Tehsildar Demolishes Illegal Stalls on Pipliyakumar Green Belt
— Tehsildar Demolishes Illegal Stalls on Pipliyakumar Green Belt

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Pipliyakumar Green Belt पर अवैध गुमटियों का निर्माण

Indore। Pipliyakumar Green Belt की जमीन पर पिछले दिनों अचानक आधा दर्जन गुमटियां (stalls) बन जाने का मामला सामने आया। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तहसीलदार जूनी इंदौर प्रीति भिसे के निर्देश पर बुलडोजर चलाकर इन गुमटियों को तोड़ दिया। यह कदम एक ऐसे भूखंड पर उठाया गया, जहां पहले से ही ग्रीन बेल्ट की जमीन पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर नोटिस जारी किए जा चुके थे। यह घटना इस बात का संकेत है कि कुछ लोग कोर्ट के आदेश और प्रशासनिक चेतावनियों के बावजूद नियमों की अवहेलना कर रहे हैं।

पूर्व में हुई कार्रवाई और ‘मां की बगिया’ का विकास

कुछ माह पहले प्रशासन ने Pipliyakumar इलाके में कई गुमटियों को जमींदोज किया था। इसके बाद ग्रीन बेल्ट की जमीन के एक हिस्से में “मां की बगिया” विकसित की गई। इस योजना का उद्देश्य था कि ग्रीन बेल्ट की जमीन का सही उपयोग हो और अवैध कब्जों और निर्माण को रोका जा सके। उस समय तहसीलदार ने गुमटियों और अन्य अवैध निर्माणों पर नोटिस जारी किए थे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई नया अतिक्रमण न हो।

स्टे के बावजूद नई गुमटियों का निर्माण

हालांकि, कुछ गुमटियों पर कोर्ट से स्टे मिल गया था। लेकिन इसी स्टे के बावजूद पिछले सप्ताह आधा दर्जन नई गुमटियां रातों-रात तैयार कर दी गईं। यह स्थिति प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुई। इस घटना की शिकायत एसडीएम जूनी इंदौर प्रदीप सोनी और तहसीलदार प्रीति भिसे से की गई। तहसीलदार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके पर बुलडोजर चलवाया और सभी नई गुमटियों को जमींदोज करवा दिया।

तहसीलदार की सख्त कार्रवाई और भविष्य की योजना

तहसीलदार प्रीति भिसे ने स्पष्ट किया कि कोर्ट से स्टे मिलने के बावजूद नई गुमटियों का निर्माण अवैध था। उन्होंने बताया कि कोर्ट से स्टे हटवाने की प्रक्रिया भी चल रही है और जैसे ही स्टे खत्म होगा, पूरी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य ग्रीन बेल्ट की जमीन को संरक्षित करना और उसे सही तरीके से विकसित करना है।

खसरा नंबर 294 और इसके महत्व

Pipliyakumar में यह विवादित भूखंड खसरा नंबर 294 पर स्थित है, जो राजस्व अभिलेखों में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। इस भूखंड पर पहले बनी 11 दुकानों को तोड़कर नगर निगम के माध्यम से “मां की बगिया” विकसित करवाई गई। इसी दौरान पास के भूखंड पर लगे बोर्ड को भी निगम के जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर ने हटवा दिया। यह भूमि विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र शहर के बीचोबीच स्थित है और इसके व्यावसायिक और आवासीय उपयोग के लिए पहले से ही योजना बनाई जा चुकी है।

निपानिया मेन रोड और अन्य इलाके की कार्रवाई

निपानिया मेन रोड पर स्थित बीसीएम पैराडाइज, अटलांटा, अपोलो डीबी सिटी सहित कई टाउनशिप में भी प्रशासन ने कार्रवाई की थी। कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार भिसे ने बुलडोजर से अवैध निर्माण हटवाया। इस दौरान एसडीएम जूनी इंदौर प्रदीप सोनी भी मौके पर मौजूद थे। इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि निजी भूमि और ग्रीन बेल्ट की जमीन पर कोई अवैध कब्जा न हो।

स्थानीय विवाद और पिछली घटनाएं

कुछ समय पूर्व खजराना निवासी रहमत अली पटेल ने प्रधानमंत्री के खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी, जिसके चलते उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इस मामले में उनके द्वारा अवैध कब्जे पर बनाई गई दुकानों और गुमटियों को भी प्रशासन ने बुलडोजर से हटवाया। यह घटना दर्शाती है कि स्थानीय विवाद और राजनीतिक टिप्पणी कभी-कभी भूमि कब्जे और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

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निजी संस्थाओं की भूमिका और अतिक्रमण की समस्या

Pipliyakumar स्थित जमीन पर तुलसी नगर कॉलोनी बसाने वाली संस्था मां सरस्वती गृह निर्माण ने भी भूखंड काटकर बेच दिए थे। इन भूखंडों पर लाइन से अवैध दुकानें और गुमटियां बनाई गईं, जो ग्रीन बेल्ट की भूमि पर अवैध निर्माण के रूप में सामने आई। यह दर्शाता है कि निजी संस्थाएं भी बिना प्रशासनिक अनुमति भूमि का उपयोग कर रही थीं।

भविष्य की योजनाएं और प्रशासन की रणनीति

तहसीलदार प्रीति भिसे ने बताया कि कोर्ट से स्टे हटवाने के प्रयास जारी हैं। स्टे हटने के बाद पूरी जमीन को अतिक्रमणमुक्त किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि ग्रीन बेल्ट की जमीन का विकास सही दिशा में हो और इसे संरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही, भविष्य में ऐसे अतिक्रमण रोकने के लिए प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई है।

समाज और प्रशासन के लिए संदेश

Pipliyakumar में ग्रीन बेल्ट पर गुमटियों का निर्माण यह दर्शाता है कि प्रशासनिक चेतावनी और कोर्ट के आदेशों के बावजूद कुछ लोग नियमों की अवहेलना कर सकते हैं। प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ग्रीन बेल्ट जैसी सार्वजनिक भूमि का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि नगर निगम और तहसीलदार का सतत निरीक्षण और निगरानी आवश्यक है ताकि अवैध कब्जों और निर्माणों को रोका जा सके। ग्रीन बेल्ट की जमीन का संरक्षण केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि शहर की योजना और नागरिक सुविधा के लिए भी आवश्यक है।

निष्कर्ष

Pipliyakumar की ग्रीन बेल्ट पर हुई यह कार्रवाई इस बात की याद दिलाती है कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर प्रशासन सतर्क है। चाहे कोर्ट से स्टे मिले या न मिले, नियमों का पालन करना अनिवार्य है। भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए प्रशासन की निगरानी, स्थानीय अधिकारियों की तत्परता और जनता की जागरूकता महत्वपूर्ण होगी। ग्रीन बेल्ट जैसी सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण और सही विकास ही स्थायी और संतुलित शहर निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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