PF की वेतन सीमा बढ़कर 25 हजार रुपये हुई, 12 साल बाद बदलाव से 51 लाख कर्मचारियों को लाभ
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज सीमा 15 हजार से बढ़ाई, कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा का मिलेगा लाभ
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के अंतर्गत अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद इस निर्णय की जानकारी दी।
सरकार के अनुसार इस बदलाव से देशभर के करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आ सकते हैं। इन्हें कर्मचारी भविष्य निधि योजना (EPF), कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद 25 हजार रुपये तक के निर्धारित PF वेतन वाले पात्र कर्मचारियों को EPFO में शामिल करना नियोक्ताओं के लिए अनिवार्य होगा।
हालांकि कर्मचारियों की वास्तविक कटौती, नियोक्ता का योगदान और नई व्यवस्था लागू होने की प्रक्रिया श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तथा EPFO द्वारा जारी अधिसूचना एवं विस्तृत दिशानिर्देशों के अनुसार तय होगी।
12 साल बाद बढ़ाई गई वेतन सीमा
EPF के लिए अनिवार्य वेतन सीमा में पिछला बदलाव सितंबर 2014 में किया गया था। उस समय सीमा को 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया था। इसके बाद कर्मचारियों के वेतन, महंगाई और जीवन-यापन की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, लेकिन EPFO कवरेज की सीमा में बदलाव नहीं किया गया था।
लंबे समय से श्रमिक संगठनों और विशेषज्ञों द्वारा सीमा बढ़ाने की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि 15 हजार रुपये की मौजूदा सीमा के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर रह जाते हैं। सरकार के नए फैसले के बाद 15 हजार से अधिक और 25 हजार रुपये तक PF वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारी भी अनिवार्य रूप से योजना में शामिल हो सकेंगे।
के अनुसार इस निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य EPFO कवरेज में लाने की उम्मीद है।
किन कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ?
इस बदलाव का प्रमुख लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जो किसी EPF-लागू संस्थान में नई नौकरी शुरू करते हैं और जिनका निर्धारित मासिक PF वेतन 15 हजार रुपये से अधिक, लेकिन 25 हजार रुपये तक है। अभी तक 15 हजार रुपये से अधिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाले कर्मचारी कुछ परिस्थितियों में अनिवार्य EPF सदस्यता से बाहर रह सकते थे।
नई सीमा लागू होने के बाद पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि खाते में नियमित बचत, EPS के माध्यम से पेंशन और EDLI योजना के अंतर्गत बीमा सुरक्षा मिल सकेगी। पहले से EPFO सदस्य बने कर्मचारी केवल वेतन सीमा पार करने के कारण सदस्यता से बाहर नहीं होते। इसलिए पुराने सदस्यों पर प्रभाव उनकी कंपनी की योगदान नीति और अंतिम अधिसूचना पर निर्भर करेगा।
यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि सामान्य बोलचाल में इसे ‘बेसिक सैलरी लिमिट’ कहा जा रहा है, लेकिन PF की गणना में मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता और नियमों में निर्धारित अन्य मदों को भी शामिल किया जा सकता है।
PF कटौती पर क्या होगा प्रभाव?
वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारी सामान्यतः अपने निर्धारित PF वेतन का 12 प्रतिशत EPF में जमा करता है। नियोक्ता भी 12 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन नियोक्ता के हिस्से का एक भाग EPS में और शेष EPF में जमा होता है।
यदि 25 हजार रुपये की पूरी नई सीमा पर 12 प्रतिशत योगदान लागू किया जाता है, तो कर्मचारी का मासिक योगदान 3,000 रुपये तक हो सकता है। वर्तमान 15 हजार रुपये की सीमा पर यह राशि 1,800 रुपये बनती है। इस तरह कुछ कर्मचारियों के मासिक योगदान में 1,200 रुपये तक का अंतर आ सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक कर्मचारी के वेतन से अनिवार्य रूप से 3,000 रुपये ही काटे जाएंगे। वास्तविक कटौती इस बात पर निर्भर करेगी कि कर्मचारी पहले से EPFO सदस्य है या नहीं, कंपनी पूरा वेतन लेकर योगदान करती है अथवा वैधानिक सीमा तक और अंतिम अधिसूचना में किस प्रकार के प्रावधान किए जाते हैं।
हाथ में मिलने वाली सैलरी घट सकती है?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पहली बार PF के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की हाथ में मिलने वाली मासिक सैलरी कुछ कम हो सकती है, क्योंकि उनके वेतन से PF योगदान काटा जाएगा। हालांकि यह राशि कर्मचारी के अपने EPF खाते में जमा होगी और उस पर नियमानुसार ब्याज मिलेगा।
यदि नियोक्ता का PF योगदान कर्मचारी के कॉस्ट टू कंपनी यानी CTC में शामिल है, तो वेतन संरचना में बदलाव दिखाई दे सकता है। जिन कंपनियों में नियोक्ता का योगदान CTC से अलग दिया जाता है, वहां कंपनी की लागत बढ़ सकती है। इसलिए सभी कर्मचारियों पर प्रभाव एक जैसा नहीं होगा।
कर्मचारियों को अपनी संशोधित वेतन पर्ची में बेसिक वेतन, PF वेतन, कर्मचारी योगदान और नियोक्ता योगदान को ध्यान से देखना चाहिए। कोई भ्रम होने पर कंपनी के मानव संसाधन या पेरोल विभाग से जानकारी ली जा सकती है।
भविष्य निधि, पेंशन और बीमा का फायदा
EPFO कवरेज मिलने से कर्मचारी के नाम पर नियमित सेवानिवृत्ति बचत तैयार होती है। नौकरी बदलने पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर के माध्यम से PF खाते को जारी रखा जा सकता है। पात्रता की शर्तें पूरी होने पर कर्मचारी को EPS के अंतर्गत मासिक पेंशन का लाभ भी मिलता है।
EDLI योजना के तहत सेवा अवधि के दौरान सदस्य की मृत्यु होने पर नामित व्यक्ति को नियमों के अनुसार बीमा लाभ मिल सकता है। इस प्रकार नई वेतन सीमा केवल PF बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पेंशन और बीमा सुरक्षा का दायरा भी बढ़ेगा।
सरकार ने इस फैसले पर सालाना लगभग 11,339 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान लगाया है। के अनुसार अगले पांच वर्षों में सरकारी लागत करीब 56,696 करोड़ रुपये हो सकती है।
कर्मचारियों और नियोक्ताओं को अब श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तथा EPFO की विस्तृत अधिसूचना का पालन करना होगा। उसी में लागू होने की तारीख, योगदान की गणना और संक्रमणकालीन व्यवस्था से संबंधित अंतिम नियम स्पष्ट होंगे।
