देशभर के 2,573 Petrol पंपों पर पेट्रोल की बिक्री बंद, मिलावट की शिकायतों के बाद सरकार का बड़ा एक्शन
देश में Petrol की गुणवत्ता को लेकर सामने आ रही शिकायतों और वाहनों में खराबी की घटनाओं के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देशभर में 2,573 रिटेल फ्यूल आउटलेट्स यानी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल की बिक्री रोक दी गई है। यह कार्रवाई पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों की ओर से चलाए जा रहे व्यापक जांच अभियान के दौरान की गई है। सरकार का फोकस पेट्रोल में मिलावट के संभावित कारणों का पता लगाने और ग्राहकों तक गुणवत्तापूर्ण ईंधन पहुंचाने पर है।
पिछले कुछ समय से देश के अलग-अलग हिस्सों में पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर वाहन मालिकों की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई मामलों में लोगों ने पेट्रोल भरवाने के बाद गाड़ियों में खराबी आने, इंजन के प्रदर्शन पर असर पड़ने और वाहन के ठीक से नहीं चलने की शिकायत की। इन शिकायतों के बाद सरकार और तेल कंपनियों ने फ्यूल सप्लाई सिस्टम की व्यापक जांच शुरू की है।
करीब 90 हजार पेट्रोल पंप जांच के दायरे में
सरकार और सरकारी तेल कंपनियों की निगरानी में देशभर के लगभग 90 हजार रिटेल फ्यूल आउटलेट्स हैं। जांच अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर जमीन के नीचे बने स्टोरेज टैंकों में पानी की मौजूदगी का पता लगाना है। माना जा रहा है कि भूमिगत टैंकों में पानी जाने की स्थिति में ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और इससे पेट्रोल में मिलावट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
इसी वजह से पेट्रोलियम मंत्रालय और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल पंपों पर मौजूद स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच तेज कर दी है। सरकार की ओर से जारी टेस्टिंग गाइडलाइंस के तहत कई आउटलेट्स पर स्टोरेज टैंकों की नियमित और बार-बार जांच की जा रही है।
किस कंपनी के कितने Petrol पंपों पर बिक्री रोकी गई?
सरकारी तेल कंपनियों के पेट्रोल पंपों पर भी इस अभियान के तहत कार्रवाई की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक पेट्रोल पंप इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) के प्रभावित हुए हैं।
- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन: 1,257 पेट्रोल पंप
- हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन: 915 पेट्रोल पंप
- भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन: 401 पेट्रोल पंप
इन तीनों कंपनियों के कुल 2,573 रिटेल फ्यूल आउटलेट्स पर पेट्रोल की बिक्री रोकने की कार्रवाई की गई है।
यह कदम उन आउटलेट्स पर उठाया गया है जहां जांच के दौरान ईंधन की गुणवत्ता या स्टोरेज सिस्टम से संबंधित समस्याओं की आशंका सामने आई। इसका उद्देश्य ग्राहकों को संदिग्ध या खराब गुणवत्ता वाला ईंधन मिलने से रोकना है।
दिन में कई बार हो रही स्टोरेज टैंकों की जांच
सरकार की ओर से पेट्रोल पंपों पर स्थित भूमिगत स्टोरेज टैंकों की जांच के लिए विशेष टेस्टिंग प्रक्रिया अपनाई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ पेट्रोल पंपों पर टैंकों की दिन में 8 से 12 बार तक जांच की जा रही है।
जांच के दौरान मॉनिटरिंग सिस्टम की भी पहचान की जा रही है। जहां सिस्टम में खराबी या किसी तरह की तकनीकी समस्या मिल रही है, वहां उसे ठीक करने या जरूरत पड़ने पर बदलने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस पूरी कवायद का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पेट्रोल के भंडारण और सप्लाई के दौरान किसी भी स्तर पर ईंधन की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
सिर्फ पेट्रोल पंप नहीं, पूरे सप्लाई नेटवर्क की निगरानी
सरकार और तेल कंपनियों का क्वालिटी चेक केवल पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं है। पेट्रोल और इथेनॉल की सप्लाई से जुड़े पूरे डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को जांच के दायरे में लाया गया है।
इसमें इथेनॉल टैंकर, स्टोरेज टैंक, डिपो और टर्मिनल समेत सप्लाई चेन के अलग-अलग हिस्सों की जांच की जा रही है। तेल कंपनियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ईंधन की गुणवत्ता में किसी तरह की समस्या सप्लाई चेन के किस स्तर पर उत्पन्न हो सकती है।
इस व्यापक जांच का उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखना और किसी भी संभावित गड़बड़ी को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ना है।
ऑटो कंपनियां भी कर रही हैं फ्यूल क्वालिटी की जांच
Petrol की गुणवत्ता को लेकर चल रहे विवाद के बीच ऑटोमोबाइल कंपनियां भी सक्रिय हो गई हैं। वाहन निर्माताओं की ओर से भी फ्यूल क्वालिटी पर नजर रखी जा रही है।
इंडस्ट्री स्तर पर की गई टेस्टिंग में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 250 से ज्यादा फ्यूल सैंपल शामिल किए गए। देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा भी ईंधन की गुणवत्ता से जुड़े परीक्षण कर चुकी हैं।
ऑटो कंपनियों की दिलचस्पी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खराब गुणवत्ता वाला ईंधन सीधे वाहनों के इंजन और दूसरे महत्वपूर्ण हिस्सों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है। यदि ईंधन में पानी या अन्य अवांछित तत्व मौजूद हों, तो इससे वाहन के संचालन में समस्या आने की संभावना बढ़ सकती है।
ग्राहकों को बेहतर गुणवत्ता वाला ईंधन उपलब्ध कराने पर जोर
सरकार की इस कार्रवाई से साफ है कि पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर अब निगरानी का दायरा काफी बढ़ाया गया है। पेट्रोल पंपों के साथ-साथ स्टोरेज टैंक, टैंकर, डिपो, टर्मिनल और इथेनॉल से जुड़े सिस्टम की भी जांच की जा रही है।
2,573 पेट्रोल पंपों पर बिक्री रोकना इस अभियान की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, इसका अंतिम उद्देश्य पेट्रोल की बिक्री को लंबे समय तक बाधित करना नहीं, बल्कि संभावित खामियों को दूर कर फ्यूल सप्लाई सिस्टम को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।
आने वाले समय में जांच के परिणामों के आधार पर प्रभावित पेट्रोल पंपों पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है। साथ ही, सरकार और तेल कंपनियों की कोशिश होगी कि देशभर में वाहन चालकों को मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण पेट्रोल और अन्य ईंधन उपलब्ध कराया जाए।
