Petrol-Diesel Rate (4 जून): अमेरिका-ईरान तनाव से क्रूड $95 के पार, भारत में फ्यूल कीमतें स्थिर, आगे बढ़ोतरी की आशंका बरकरार
वैश्विक तनाव से ऊर्जा बाजार में फिर बढ़ी अनिश्चितता
Petrol-Diesel Rate : अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का माहौल बन गया है। दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित किया है। इसका असर सीधे तौर पर एशियाई शेयर बाजारों पर भी देखा जा रहा है, जहां दबाव बढ़ता जा रहा है।
सबसे बड़ा प्रभाव कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों पर पड़ा है, जो लगातार ऊपर की ओर जा रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, इजरायल और लेबनान के बीच सैन्य गतिविधियों और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चित स्थिति ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
ब्रेंट क्रूड $95 के पार, कुछ समय $97 के करीब
लेटेस्ट मार्केट डेटा के अनुसार, ब्रेंट क्रूड लगातार $95 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि हाल के सत्रों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें कुछ समय के लिए $97 प्रति बैरल के करीब भी पहुंच गई थीं।
वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग $95 के आसपास कारोबार कर रहा है। लगातार तीसरे दिन कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मई महीने में जब शांति वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत मिले थे, तब तेल की कीमतों में गिरावट आई थी। लेकिन अब हालात फिर बदल गए हैं और बाजार में “सेफ्टी प्रीमियम” बढ़ गया है।
होर्मुज स्ट्रेट और सप्लाई चेन पर खतरा
तेल बाजार में सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी हुई है, जो दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। यदि यहां किसी प्रकार की बाधा आती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
इसी अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क हैं और तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के स्तर को भी छू सकता है।
भारत में Petrol-Diesel Rate फिलहाल स्थिर
इन वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। 4 जून (गुरुवार) सुबह 6 बजे जारी किए गए ताजा रेट्स के अनुसार देशभर में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर है। कोलकाता में पेट्रोल ₹113.47 और डीजल ₹99.82 प्रति लीटर दर्ज किया गया है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
अन्य प्रमुख शहरों में बेंगलुरु में पेट्रोल ₹110.93 और डीजल ₹98.80 प्रति लीटर, भोपाल में पेट्रोल ₹114.54 और डीजल ₹99.64 प्रति लीटर, भुवनेश्वर में पेट्रोल ₹108.98 और डीजल ₹100.71 प्रति लीटर, चंडीगढ़ में पेट्रोल ₹101.51 और डीजल ₹89.47 प्रति लीटर तथा देहरादून में पेट्रोल ₹100.54 और डीजल ₹96.00 प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
तेल कंपनियों पर बढ़ता वित्तीय दबाव
भारत की तीन प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियां—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)—अभी भी भारी वित्तीय दबाव में चल रही हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ये कंपनियां मिलकर प्रतिदिन लगभग 550 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची हैं, जबकि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नियंत्रित स्तर पर रखी गई हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि पेट्रोल पर लगभग 5.5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 4.5 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी अभी भी जारी है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है।
आगे कीमतों में 12 रुपये तक बढ़ोतरी की आशंका
ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक क्रूड ऑयल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में फ्यूल कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर 12 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि यह पूरी तरह सरकार की नीति और वैश्विक स्थिति पर निर्भर करेगा।
मई में मिली राहत, अब फिर पलटा बाजार
गौरतलब है कि मई महीने में जब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में सुधार के संकेत मिले थे, तब कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी। लेकिन अब स्थिति फिर उलट गई है और बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल द्वारा लेबनान पर हमले और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई है।
वैश्विक नीति और राजनीतिक बयान भी अहम
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौते की उम्मीद जताई है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कूटनीतिक स्तर पर ठोस समझौता नहीं होता, तब तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।
भारत पर संभावित असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के फ्यूल सेक्टर पर पड़ सकता है।
यदि क्रूड ऑयल लंबे समय तक $95 से ऊपर बना रहता है, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, 4 जून को भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अल्पकालिक राहत मिली है। हालांकि वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की लगातार बढ़ती कीमतें आने वाले समय में चिंता बढ़ा सकती हैं। ब्रेंट क्रूड का $95 प्रति बैरल से ऊपर बने रहना इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार अभी भी अस्थिर है।
यदि अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां ईंधन की कीमतें वैश्विक बाजार से जुड़ी होती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार और कूटनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं, जो आगे की दिशा तय करेंगे।
