Petrol Diesel Export Tax: पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर सरकार का बड़ा फैसला, Windfall Tax बढ़ाया; ATF पर मिली राहत
Petrol Diesel Export Tax: पेट्रोल और डीजल को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बदलाव किया है। नए फैसले के तहत पेट्रोल के निर्यात पर पहली बार प्रति लीटर 1.50 रुपये का टैक्स लगाया गया है, जबकि डीजल के निर्यात पर लगने वाली विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस की दर में भी बढ़ोतरी की गई है।
सरकार की ओर से यह बदलाव 1 सितंबर 2026 से लागू किया गया है। वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर नई दरों की जानकारी दी है। हालांकि, देश के भीतर बिक्री के लिए इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि यह फैसला सीधे तौर पर घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की मौजूदा टैक्स दरों को प्रभावित नहीं करता।
Petrol के निर्यात पर पहली बार टैक्स
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर 1.50 रुपये प्रति लीटर की दर से विंडफॉल टैक्स लगाया है। इससे पहले पेट्रोल के निर्यात पर इस तरह का टैक्स नहीं लगाया जा रहा था।
वहीं, डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में भी बदलाव किया गया है। स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी यानी SAED और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को मिलाकर डीजल पर अब कुल 25 रुपये प्रति लीटर का टैक्स लागू होगा। इससे पहले यह दर 24 रुपये प्रति लीटर थी।
इस बदलाव के बाद पेट्रोलियम कंपनियों के लिए विदेशों में पेट्रोल और डीजल की बिक्री से होने वाले अतिरिक्त मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
ATF के निर्यात पर घटाया गया टैक्स
सरकार ने केवल पेट्रोल और डीजल पर ही बदलाव नहीं किया है। विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर टैक्स में थोड़ी राहत दी गई है।
सरकार ने ATF के निर्यात पर लगने वाली दर को 19.50 रुपये से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। हाल के समय में ATF की कीमतों में बदलाव देखने को मिला है। ऐसे में सरकार की ओर से निर्यात टैक्स में मामूली कमी की गई है।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े इन टैक्स बदलावों की जानकारी दी गई है।
घरेलू पेट्रोल-डीजल पर नहीं बदला टैक्स
सरकार के इस फैसले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घरेलू बाजार में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी देश में पेट्रोल पंपों पर बिक्री के लिए उपलब्ध पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा टैक्स व्यवस्था पहले की तरह बनी रहेगी।
इसलिए निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ाए जाने का सीधा असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ना जरूरी नहीं है। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर कई अन्य कारकों का भी प्रभाव होता है, जिनमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, विनिमय दर और घरेलू कर शामिल हैं।
सरकार ने क्यों बढ़ाया विंडफॉल टैक्स?
विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य ऐसे समय में तेल कंपनियों के असाधारण मुनाफे पर कर लगाना है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल या पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेज बदलाव होता है। सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने की नीति से भी जुड़ा हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने पर रिफाइनिंग कंपनियों के लिए विदेशों में पेट्रोलियम उत्पाद बेचना अधिक लाभदायक हो सकता है। ऐसी स्थिति में यदि घरेलू आपूर्ति प्रभावित होती है तो देश के भीतर कीमतों और उपलब्धता पर दबाव बन सकता है।
इसी वजह से सरकार निर्यात पर अतिरिक्त कर लगाकर कंपनियों के लिए घरेलू बाजार को प्राथमिकता देने का प्रयास करती है। पेट्रोल के निर्यात पर 1.50 रुपये प्रति लीटर का नया टैक्स और डीजल पर 25 रुपये प्रति लीटर की संशोधित दर इसी नीति का हिस्सा है।
क्या आम जनता पर पड़ेगा सीधा असर?
विंडफॉल टैक्स बढ़ाए जाने के बाद आम लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार ने घरेलू बिक्री पर लागू टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
इसलिए केवल निर्यात पर टैक्स बढ़ाए जाने को घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी से जोड़ना सही नहीं होगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और तेल कंपनियों की लागत में होने वाले बदलाव का पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर अलग प्रभाव पड़ सकता है।
कुल मिलाकर सरकार के नए फैसले का मुख्य उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से होने वाले अतिरिक्त लाभ को नियंत्रित करना और देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। वहीं, ATF के निर्यात पर टैक्स में मामूली कमी करके विमान ईंधन के क्षेत्र को कुछ राहत देने की कोशिश की गई है।
