राजनाथ सिंह के बयान पर पवन खेड़ा का पलटवार, बोले—चुनाव के जरिए करेंगे रिजीम चेंज
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विपक्ष पर बांग्लादेश जैसी स्थिति के जरिए भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने के आरोप के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार किया है। खेड़ा ने कहा कि विपक्ष सरकार को चुनाव के जरिए हराकर व्यवस्था में बदलाव करना चाहता है। उन्होंने सवाल किया कि जब विपक्ष अपनी बात सार्वजनिक रूप से कह रहा है, तो राजनाथ सिंह को “जग्गा जासूस” बनकर सामने आने की जरूरत क्यों पड़ी?
‘विपक्ष अपनी मंशा खुलकर बता रहा है’
पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान चला रही है और यह बात देशभर में खुलकर कही जा रही है। उनके मुताबिक, विपक्ष यह दोहरा रहा है कि उसे मौजूदा सरकार को चुनाव में हराना है और सिस्टम में बदलाव करना है। खेड़ा ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनावों के जरिए सरकार बदलना है और इसमें कुछ छिपा हुआ नहीं है।
खेड़ा ने अपने बयान में राजनाथ सिंह की टिप्पणी पर तंज कसते हुए पूछा कि वे “जग्गा जासूस” बनकर क्यों आए। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार बदलने की बात कर रहा है, इसलिए इस पर संदेह जताने या इसे किसी दूसरी राजनीतिक घटना से जोड़ने की जरूरत नहीं है। खेड़ा ने इसे विपक्ष की घोषित राजनीतिक मंशा बताया।
1977 के सत्ता परिवर्तन का दिया उदाहरण
कांग्रेस नेता ने अपनी बात के समर्थन में वर्ष 1977 का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या उस वर्ष देश में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ था? खेड़ा के अनुसार, भारत जैसे लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष सड़क पर उतरता है या कोई आंदोलन होता है, तब सत्ता परिवर्तन की चर्चा उठती है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम फैसला चुनाव के माध्यम से होता है।
खेड़ा ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार के खिलाफ सवाल उठाना और जनता के बीच अपनी बात रखना है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के जरिए सरकार को हराना और सिस्टम में बदलाव की मांग करना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा है। उनका तर्क था कि ‘रिजीम चेंज’ की बात को असामान्य या अलोकतांत्रिक बताने से पहले यह देखना चाहिए कि विपक्ष किस माध्यम से बदलाव की बात कर रहा है।
राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर लगाए थे आरोप
पवन खेड़ा का यह बयान राजनाथ सिंह की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें रक्षा मंत्री ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर बांग्लादेश जैसी घटनाओं से प्रेरित होकर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगाया था। सिंह ने कहा था कि विपक्ष युवाओं को अराजक राजनीति में मोहरा बनाने और देश में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि विरोध प्रदर्शनों को चुनावी सुधारों की मांग तक सीमित नहीं माना जा सकता।
राजनाथ सिंह ने विपक्ष के आंदोलन और निर्वाचन आयोग से जुड़े विरोध को लेकर सवाल उठाए थे। उनके बयान के अनुसार, विपक्ष लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और सरकार गिराने की दिशा में काम कर रहा है। सिंह ने बांग्लादेश का संदर्भ देते हुए कहा था कि भारत में भी उसी तरह का सत्ता परिवर्तन करने की कोशिश की जा रही है।
चुनावी प्रक्रिया और विरोध को लेकर राजनीतिक बयानबाजी
राजनाथ सिंह के आरोपों पर जवाब देते हुए खेड़ा ने कहा कि विपक्ष अपनी मंशा छिपा नहीं रहा है। उन्होंने चुनावों के जरिए सरकार बदलने की बात को लोकतंत्र की सामान्य प्रक्रिया बताया। खेड़ा ने 1977 का उदाहरण देकर कहा कि देश में पहले भी चुनावों के माध्यम से सत्ता परिवर्तन हुआ है।
दोनों नेताओं के बयानों के बाद चुनाव प्रक्रिया, विरोध प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन को लेकर सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राजनाथ सिंह ने विपक्ष की गतिविधियों को देश की स्थिरता और संस्थाओं के लिए खतरा बताया, जबकि पवन खेड़ा ने चुनाव के जरिए सरकार बदलने की मांग को लोकतांत्रिक अधिकार और विपक्ष की राजनीतिक भूमिका से जोड़ा।
