अचल-अडोल स्थिति के लिए धैर्य और सकारात्मक सोच जरूरी: ब्रह्माकुमार सूरज भाई
भिलाई के सेक्टर-7 पीस ऑडिटोरियम में दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ, तनावमुक्त जीवन के लिए सकारात्मक विचार और वर्तमान में श्रेष्ठ कर्म करने का दिया संदेश
भिलाई, 18 अगस्त 2026। जीवन में परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य यदि धैर्य, सकारात्मक सोच और शांत मन के साथ उनका सामना करे तो वह मानसिक रूप से मजबूत रह सकता है। किसी दूसरे व्यक्ति की बात या व्यवहार से अपनी आंतरिक स्थिति को प्रभावित होने देने के बजाय स्वयं के विचारों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। यह संदेश प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से भिलाई पहुंचे वरिष्ठ राजयोग शिक्षक ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने दिया।
वे सेक्टर-7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम ‘अचल-अडोल स्थिति’ के प्रथम दिन उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। ब्रह्माकुमार सूरज भाई पीस ऑफ माइंड चैनल के चर्चित कार्यक्रम ‘समाधान’ के मुख्य वक्ता के रूप में भी जाने जाते हैं।
कार्यक्रम में उन्होंने जीवन में आने वाली समस्याओं, आपसी संबंधों, नकारात्मक विचारों, तनाव, क्रोध और मानसिक अस्थिरता से निपटने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर विस्तार से विचार रखे।
किसी की बातों से अपनी स्थिति न बिगाड़ें
ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने कहा कि अक्सर व्यक्ति दूसरों की बातों और व्यवहार को लेकर अपनी मानसिक शांति खराब कर लेता है। किसी ने हमारे बारे में क्या कहा या हमारे साथ कैसा व्यवहार किया, इन बातों को लगातार सोचने से मन में नकारात्मक विचार बढ़ते जाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह स्वीकार करना जरूरी है कि दुनिया में कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं है। हर व्यक्ति में कुछ अच्छाइयां और कुछ कमियां होती हैं।
उन्होंने कहा, “यह स्वीकार करना होगा कि कोई भी परफेक्ट नहीं है। न मैं परफेक्ट हूं और न कोई दूसरा। मेरी कमियां दूसरों को पसंद नहीं आतीं और दूसरों की कमियां मुझे पसंद नहीं आतीं।”
ऐसे में दूसरों की कमियों पर लगातार चिंतन करने के बजाय स्वयं के व्यवहार और सोच को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
परचिंतन और नकारात्मक बातों से बचने की सलाह
उन्होंने लोगों को दूसरों के विषय में अनावश्यक चिंतन और नकारात्मक चर्चाओं से बचने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जिस तरह के विचारों को अपने मन में स्थान देता है, धीरे-धीरे उसकी मानसिक स्थिति भी उसी प्रकार बनने लगती है।
यदि मन बार-बार शिकायत, आलोचना, ईर्ष्या और नकारात्मकता में उलझा रहेगा तो तनाव बढ़ेगा। इसके विपरीत यदि मन में शुभभावना, सहयोग, प्रेम और सकारात्मकता को स्थान दिया जाए तो आंतरिक शांति मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि शांत और तनावमुक्त जीवन के लिए व्यक्ति को अपने विचारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।
तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय धैर्य रखें
ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने धैर्य को मानसिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी घटना या व्यक्ति की बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देना कई बार परिस्थितियों को और कठिन बना देता है।
यदि कुछ समय रुककर शांत मन से परिस्थिति को समझा जाए तो बेहतर निर्णय लिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि धैर्य मनुष्य को अचल-अडोल स्थिति में रहने की शक्ति देता है। धैर्य खोने पर व्यक्ति कई बार ऐसे फैसले कर बैठता है, जिनका बाद में पछतावा होता है।
इसके विपरीत धैर्य के साथ लिया गया निर्णय व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से भी निकाल सकता है।
‘धैर्य खोने से अच्छे अवसर भी गंवा देते हैं’
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि धैर्य के भीतर अद्भुत शक्ति होती है। कई बार व्यक्ति जल्दबाजी और अधीरता के कारण अच्छे अवसर भी गंवा देता है।
जीवन में सफलता केवल तेजी से आगे बढ़ने का नाम नहीं है, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता भी जरूरी है। इसके लिए मन का शांत रहना आवश्यक है।
उन्होंने लोगों को किसी भी चुनौती के दौरान पहले स्वयं को शांत करने और फिर समाधान की दिशा में सोचने की सलाह दी।
हर दिन स्वयं में बदलाव लाने का अवसर


ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने कहा कि हर नया दिन परिवर्तन का अवसर लेकर आता है। इसलिए व्यक्ति को प्रतिदिन अपने व्यवहार, दृष्टिकोण और विचारों का निरीक्षण करना चाहिए।
यदि कोई आदत या सोच जीवन में अशांति पैदा कर रही है तो उसे बदलने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वास्तविक परिवर्तन दूसरों से शुरू नहीं होता, बल्कि स्वयं से शुरू होता है। हम दूसरों को बदलने की कोशिश करने के बजाय अपनी प्रतिक्रिया और दृष्टिकोण को बदलें तो कई समस्याएं स्वतः कम होने लगती हैं।
दुर्भावना को शुभकामना और नफरत को प्रेम से बदलें
कार्यक्रम में उन्होंने नकारात्मक भावनाओं को सकारात्मक भावनाओं में बदलने के कुछ सरल सूत्र भी बताए।
उन्होंने कहा कि दुर्भावना को शुभकामना से, नफरत को प्रेम से, ईर्ष्या को दया से और बदले की भावना को क्षमा से बदलने का अभ्यास करना चाहिए।
इसी प्रकार व्यर्थ और नकारात्मक विचारों के स्थान पर श्रेष्ठ विचारों को मन में स्थान देना चाहिए।
उनका कहना था कि इस प्रकार का आंतरिक परिवर्तन धीरे-धीरे मनुष्य के व्यवहार और जीवन दोनों में सकारात्मक प्रभाव पैदा करता है।
‘जो हो गया, सो हो गया; मेरा आज पर अधिकार है’


बीती हुई घटनाओं को लेकर परेशान रहने वाले लोगों को उन्होंने वर्तमान में जीने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा, “जो हो गया, सो हो गया। मेरा आज पर अधिकार है।”
मनुष्य बीते हुए समय को बदल नहीं सकता, लेकिन वर्तमान में वह क्या सोचता है और क्या कर्म करता है, यह उसके हाथ में है।
इसलिए पुरानी घटनाओं के दुख, पछतावे या नाराजगी को बार-बार दोहराने के बजाय आज के दिन को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
वर्तमान में बोएं श्रेष्ठ कर्मों के बीज
ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने कहा कि व्यक्ति के वर्तमान कर्म ही उसके भविष्य की दिशा निर्धारित करते हैं। इसलिए हर दिन अच्छे और श्रेष्ठ कर्म करने का संकल्प लेना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति अपने अतीत की गलतियों से सीख लेकर वर्तमान में बेहतर निर्णय करता है तो भविष्य में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बीती हुई बातों का बोझ लेकर आगे बढ़ना मुश्किल होता है। इसलिए उनसे सीख लेकर वर्तमान में श्रेष्ठ कर्मों के बीज बोना अधिक उपयोगी है।
विचारों का वातावरण पर भी पड़ता है प्रभाव
कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने विचारों की शक्ति पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति जो सोचता और करता है, उसका प्रभाव केवल उसके स्वयं के मन पर नहीं बल्कि आसपास के वातावरण और संबंधों पर भी पड़ता है।
यदि व्यक्ति लगातार स और शुभ विचार रखता है तो उसके व्यवहार में भी उसका प्रभाव दिखाई देता है। वहीं नकारात्मक विचार तनाव और आपसी संबंधों में दूरी का कारण बन सकते हैं।
उन्होंने सकारात्मक विचारों के अभ्यास को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी।
‘जो चाहिए वही सोचें’
उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपनी सोच की दिशा स्पष्ट रखनी चाहिए। जिस परिणाम की इच्छा है, मन को उसी दिशा में केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने संदेश दिया, “जो चाहिए, वही सोचें; जो नहीं चाहिए, उसके बारे में न सोचें।”
उनके अनुसार समस्या के बारे में लगातार सोचते रहने के बजाय उसके समाधान पर ध्यान केंद्रित करना ज्यादा उपयोगी है। सकारात्मक सोच का अर्थ समस्या को नजरअंदाज करना नहीं, बल्कि उसके समाधान की संभावना पर विश्वास बनाए रखना है।
कठिन परिस्थितियों से भागें नहीं, सामना करें
ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने जीवन की चुनौतियों से घबराने या उनसे भागने के बजाय उनका सामना करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, व्यक्ति यदि धैर्य और सकारात्मक सोच बनाए रखता है तो समाधान खोजने की उसकी क्षमता मजबूत रहती है।
मुश्किल समय में मन का संतुलन बनाए रखना ही अचल-अडोल स्थिति का महत्वपूर्ण आधार है।
मानसिक शांति के लिए राजयोग और सकारात्मक चिंतन
कार्यक्रम में राजयोग और सकारात्मक चिंतन के माध्यम से मानसिक शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने बताया कि वर्तमान समय में तनाव और मानसिक दबाव बढ़ने के कारण मन को शांत रखने का अभ्यास अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
नियमित आत्मचिंतन, सकारात्मक विचार और शांत प्रतिक्रिया के माध्यम से व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में आने वाली चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकता है।
पीस ऑडिटोरियम में दो दिवसीय आयोजन
सेक्टर-7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में आयोजित ‘अचल-अडोल स्थिति’ दो दिवसीय कार्यक्रम है। प्रथम दिन ब्रह्माकुमार सूरज भाई ने जीवन में शांति, धैर्य, सकारात्मक सोच, क्षमा और वर्तमान में श्रेष्ठ कर्म करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया।
